Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

चाबुक पर चाबुक…

By   /  September 15, 2012  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-कुलदीप सिंह राघव||

केंद्र सरकार जनता पर अपना खूब चाबुक चला रही है. बेचारी जनता जब तक पहले चाबुक के जख्म को भर पाती है तब तक दूसरा चाबुक उसी जख्म को हरा कर देता है. पिछले महीनों में लगातार बढी मंहगाई से तो यही लग रहा है कि सरकार जान- बूझकर जनता को बार-बार दर्द दे रही है. अब तो हद ही हो गई. सिलेंडर मंहगे और डीजल मंहगा. अगर अप्रत्यक्ष रूप से देखें तो सारा भार बेचारी जनता की पीठ पर ही पडेगा. दैनिक कार्यों के लिए हम बस का उपयोग करते हैं, तो बस का किराया मंहगा हो ही गया. व्यापारी लोग सामान ट्रांसपोर्ट के द्वारा मंगाते हैं, तो ट्रांसपोर्ट चार्ज बढने से सामान मंहगे होंगे. सब्जियां मंहगी होंगी वो इसलिए क्यों कि खेतों में लगने वाला पानी डीजल इंजन के माध्यम से ही आता है. इस सब के बाद प्रधानमंत्री का बयान तो बेहद निराशाजनक था. प्रधानमंत्री लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को ही हिदायत दे रहे हैं कि मीडिया इस मामले का ज्यादा तूल न दे, देश कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है. अरे पीएम साहब आपका काम क्या है आपको याद नहीं. आपको केवल घोटाले करने का काम नहीं है अल्कि आपका मुख्य काम देश को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालना ही तो है. मुझे जहां तक याद है 22 मई 2004 को जब जनता ने आपको सत्ता सौंपी थी तब देश पर कोई कठिन परिस्थिति नहीं थी. इसका मतलब आप ही देश की इस स्‍थिति के जिम्मेदार हैं.

पहले से ही मंहगाई  की मार झेल रही जनता के लिए यह बेहद चौंकाने वाली बात है. आम आदमी कैसे इतनी मंहगाई में गुजारा करेगा. एक साल में केवल छह सिंलेंडर. एक सामान्य परिवार कैसे दो महीने तक एक ही सलेंडर से गुजारा करेगा. वैसे तो प्रधानमंत्री जी कभी कुछ बोलते नहीं हैं फिर भी मैं पूछता हूं प्रधानमंत्री से क्या वो दो महीने तक एक सिंलेंडर को चला सकते हैं. क्या सोनिया जी एक सिलेडर में दो महीने काट सकती हैं. सत्ता सुख भोग रहे इन लोगो को क्या पता कि आम आदमी कैसे सब मैनेज करेगा. इन्हें तो बस अपने मजे से मतलब है.

बीते कुछ सालों में घोटालों को जो धारावाहिक चला और अभी वर्तमान में तूल पर कोल आवंटन घोटाला है, लगता है सरकार इन सब से ध्यान हटाने के लिए और चाल चल रही है. सरकार जनता को मूर्ख समझकर स्वच्छ छवि प्रदर्शित करना चाहती है. मुझे लगता है कि सरकार को दूरदृष्टि से यह प्रतीत हो गया है कि दोबारा सत्ता हमारे हाथ में आनी नहीं है इसलिए जनता का जितना खून चूस सको चूस लो. शायद इसीलिए कांग्रेस सरकार दोनों हाथों से देश को कंगाल करने में लगी है. सरकार का जनता के प्रति ये उदासीन रवैया कतई ठीक नहीं है. सरकार ने जनता के हितों का पिंड दान कर जो फैसला लिया है वो बेहद शर्मनाक है. इस प्रकार की सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. एसी सरकार को उखाड फेंकने के लिए जनता तैयार रहे. केवल हमारी और आपकी गलती की वजह से ही हमारा खून चूसा जा रहा है. अब भी समय है दोस्तो जाग जाओ. आप लोगों ने जिस सरकार के हाथ में सत्ता की कमान सौंपी अब वही सरकार आपको गीदड़ भभकी दिखा रही है. वास्तव में अब समय आ गया है इस भभकी का जवाब देने का.

आज जनता जिस दर्द को झेल रही है अब उस दर्द की दवा की जरूरत है. कोई तो आगे आए जो देश को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाले अब चाहे वो गुजरात का शेर ही क्यों न हो. उठो जागो ओर एक मत हो जाओ . सोचो ओर विचारो क्या इसलिए आपने यूपीए को सत्ता सौंपी थी. आज देश की स्थिति पर मुझे यह पंक्तियां सहज ही याद आ जाती हैं-

हो गई पीर पर्वत सी अब पिघलनी चाहिए

अब हिमालय के गर्भ से कोई गंगा निकलनी चाहिए

हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं

 मकसद है ये सूरत बदलनी चाहिए

 मेरे दिल में न सही तेरे दिल में सही

पर एक आग जलनी चाहिए, इक आग जलनी चाहिए !

(कुलदीप सिंह राघव, युवा पत्रकार एवं स्वतंत्र लेखक – वर्तमान में अमर उजाला समाचार पत्र से जुडे़ हैं । राजनैतिक, खेल और फीचर मामलों के विशेषज्ञ हैं। विभिन्न बहस और वाद- विवाद का हिस्सा बन चुके हैं। बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्टग्रेजुएट कर रहे हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित।)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. कुलदीप सिंह जी जिस गुजरात के शेर को पुकार लगा रहे हैं वो खुद अभी अपने घर में बिल्ली बने हुए हैं!शेर जंगल का रजा होता है पर राजग में ही उन्हें कोई शेर मानाने को तैयार नहीं तभी तो हमारे TIGER नितीश जी उन्ही के जंगल में प्रवाश करने की तयारी में है.

  2. SHARAD GOEL says:

    मै सन २००३ में अपनी रसोई का खर्च ३००० रुपये घर में दे रहा था आज १०००० में गहर का खर्च मुश्किल हो रहा हे उसपर ये महगाई नजाने क्या होगा हमारा या हमारे बच्चों का केसे पड़ेंगे आगे . खर्चे के लिए क्या अब चोरी डाका डाले या टैक्स देना बंद करदें

    • डीजल और गैस के दाम बढ़ने के बाद सभी कांग्रेस को कोसने में लगे हैं ,लेकिन जो गोवा ,केरल जैसे राज्यों ने टैक्स कम करके जनता को रहत देने की कोशिस की उसका अनुसरण उप,बिहार मप,महारास्ट्र जैसे बड़े राज्यों ने करने की कोशिस नहीं की !अगर केंद्र सारकार ने जनता को महंगाई दी है तो आप भी जनता के ही हिमैती है ,राज्य सरकारों को अपना टैक्स तो कम करना चाहिए था तब ही जनता आपको अपने हिमायती समझती ![यहाँ तो वही कहावत है ‘चलनी दुसे सूप के ‘]

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

क्या कांग्रेस मुग़ल साम्राज्य का अंतिम अध्याय और राहुल गांधी बहादुर शाह ज़फ़र के ताज़ा संस्करण हैं?

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: