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कहीं दीप जले, कहीं दिल, श्रद्धांजलि के दौरान कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के घर पर मिठाईयां बांटी…

By   /  September 17, 2012  /  No Comments

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-चन्‍द्रशेखर जोशी||

उत्‍तराखण्‍ड में कहीं दीप जले, कहीं दिल, इस पंक्‍ति का सार यह है कि किसी के घर में खुशियां मनायी गयी तो कहीं दिल जल रहे थे, चिंता जल रही थी, खुशियां मनाने वालों को इससे कोई मतलब नहीं था, ऐसा ही नजारा देहरादून में देखने को मिला, जब कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष के घर मिठाइयां बांटी जा रही थी, आतिशबाजी हो रही थी, रेलवे स्‍टेशन पर स्‍वागत हो रहा था, डांस भांगडा हो रहा था, और राज्‍य के कई स्‍थानों में आपदा प्रभावित खून के आंसू रो रहे थे.

समूचे उत्‍तराखण्‍ड में जब रुद्रप्रयाग व अन्य क्षेत्रों में हुई दैवीय आपदाओं में मरने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी साथ ही आपदा में मरने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिये दो मिनट का मौन रखा जा रहा था, उस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के घर पर मिठाईयां बांटी जा रही थी और एक दूसरे का मुंह मीठा कराया जा रहा था, यशपाल आर्य रुद्रप्रयाग व बागेश्‍वर की प्राकृतिक आपदा में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देना भूल कर प्रसन्‍नचित्‍त होकर मिठाई खा रहे थे, उनके द्वारा टिहरी लोकसभा उप चुनाव के लिए काग्रेस प्रत्याशी के रूप में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा के नाम की रविवार को पार्टी ने विधिवत घोषणा की जा रही थी. इसके अलावा वहीं देहरादून में आपदा राहत के लिए जारी हुए चेक बाउंस होने पर आपदा पीडितों में मायूस व दुखी हो रहे थे, देहरादून के क्लेमेंटटाउन क्षेत्र के करीब 100 परिवार ऐसे हैं जिन्हें दैवी आपदा से चेक तो जारी कर दिए गए लेकिन जब उसे बैंक में लगाया गया तो चेक बाउंस हो गए. ऊपर से उनके खाते से टैक्स अलग से काटा गया.  प्रशासन की ओर से रविवार 16 सितम्‍बर 2012 के दिन ही इस मामले में अधिकारियों को तलब किया गया.

इसके उपरांत टिहरी लोकसभा उपचुनाव के लिए घोषित किए गए कांग्रेस प्रत्याशी साकेत बहुगुणा के दून पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर उनका जोरदार स्वागत किया गया तथा मिठाईयां बांटी गयी, आतिशबाजी की गयी. टिहरी लोकसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद साकेत बहुगुणा 16 सितम्‍बर 2012 रविवार को दोपहर साढ़े बारह बजे शताब्दी से दून स्टेशन पहुंचे.

ज्ञात हो कि कांग्रेस का प्रारम्‍भिक सदस्‍य भी नहीं है साकेत बहुगुणा, साकेत के काग्रेस के सदस्य न होने की सफाई देते हुए यशपाल आर्य ने कहा कि साकेत लंबे समय से पार्टी कार्यो में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. साकेत बहुगुणा योग्य व कर्मठ पार्टी कार्यकर्ता हैं.

इस मामले पर पत्रकार राजेन्‍द्र जोशी का कहना है कि साकेत बहुगुणा जिनको अभी तो जनता ने इनको देखा नहीं ,परखा नहीं कैसे हो गए सुयोग्य ,इमानदार,कर्मठ ,जुझारू जहाँ तक शिक्षित का सवाल है उत्तराखंड में और भी बहुत शिक्षित हैं …..ये वो नेता हैं जो न तो पहाड़ी यानि ..गढ़वाली, कुमाउनी ,जौनसारी भाषा बोल पाते हैं और न यहाँ इनकी कोई रिश्तेदारी ही है ..टेहरी लोक सभा के लोग इनको पहले बार देखेंगे ….राजनीती में परिवारवाद कितना उचित है आप लोग बताइए ..क्या और किसी उत्तराखंडी को राजनीती में आगे आने का मौका अब नहीं मिलेगा ……..या नहीं मिलना चाहिए ……..

प्रदेश प्रभारी चौ0 वीरेन्‍द्र सिंह का निर्देश मिलते हुए उत्‍तराखण्‍ड कांग्रेस अध्‍यक्ष यशपाल आर्य द्वारा अपने निवास में विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा के नाम की विधिवत घोषणा कर दी. साकेत बहुगुणा 21 सितंबर को नामाकन करेंगे.

टिहरी लोकसभा उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में साकेत बहुगुणा का नाम घोषित होते ही उत्‍तराखण्‍ड की राजनीति में एक और पुत्रोदय हो गया है. साकेत को मुख्‍यमंत्री के पुत्र होने का लाभ मिला और वह कांग्रेस के कई विजयी उम्‍मीदवारों को पीछे छोडते हुए टिहरी लोकसभा उपचुनाव में टिकट लेने में कामयाब रहे.

उत्‍तराखण्‍ड विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के कई नेता अपने परिवार की बेल लगाने को उत्‍सुक थे परन्‍तु आपसी आपसी प्रतिद्वंद्विता से वह इसमें असफल रहे, अब कांग्रेस सरकार आने पर वह हर कार्य में वरियता अपने परिवार को दे रहे हैं, इसका पहला मामला तब देखने को आया, मण्‍डी परिषद के अध्‍यक्ष व उपाध्‍यक्ष मनोनीत करने पर कांग्रेस के तमाम बडे नेताओं ने इसमें बंदरबांट कर ली, हर नेता ने अपने परिवार को तवज्‍जो दी. अब इसमें विजय बहुगुणा ही क्‍यों पीछे रहते, उन्‍होंने भी समय आने पर टिहरी लोकसभा उपचुनाव हेतु अपने पुत्र को आगे बढाकर परिवारवाद के चलन को जारी रखा. राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान कई कांग्रेसी दिग्गजों के परिजन भी टिकट के दावेदार थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पाया. इनमें केंद्रीय संसदीय राज्य मंत्री हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत व पुत्री अनुपमा रावत और प्रदेश अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य मुख्य हैं. अगर बात भाजपा की करें तो पूर्व स्पीकर हरबंस कपूर के पुत्र अमित कपूर और पूर्व मंत्री मातबर सिंह कंडारी के पुत्र राजीव व भतीजे विनोद कंडारी भी राजनीति में उतर कर चुनाव लड़ने का मौका हासिल होने का इंतजार कर रहे हैं.

उत्तराखंड में भी परिवारवाद की वंश बेल लम्‍बी होती जा रही है. पौड़ी गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज ने अपनी धर्मपत्‍‌नी अमृता रावत को आगे बढाया और विधायक हेंतु उन्‍हें टिकट दिलवाते रहे, फिर तिवारी सरकार के बाद अब बहुगुणा सरकार में भी मंत्री बनवाया. पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री ब्रह्मदत्त की विरासत को उनके पुत्र पूर्व मंत्री व विधायक नवप्रभात ने आगे बढ़ाया जबकि स्व. गुलाब के पुत्र प्रीतम सिंह ने परिवारवाद की बेल को आगे बढाया. राजपरिवार में देखें तो टिहरी के राजपरिवार में महारानी कमलेंदुमति शाह के बाद स्व. महाराजा मानवेंद्र शाह, फिर उनके पुत्र महाराजा मनुजयेंद्र शाह ने परंपरा को आगे बढ़ाया. अब टिहरी उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी बनाई गई महाराजा मनुजयेंद्र शाह की पत्‍‌नी महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह भी अब टिहरी लोकसभा उपचुनाव हेतु मैदान में उतरी है. वहीं जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा उत्तराखंड की अंतरिम भाजपा सरकार में मंत्री रहे हैं जबकि जसपाल वर्ष 2009 में टिहरी सीट से भाजपा टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा के पुत्र विजय बहुगुणा के बाद उनके पुत्र साकेत साकेत इस तरह अपनी पारिवारिक राजनैतिक मैदान में उतरे हैं.

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  • Published: 6 years ago on September 17, 2012
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  • Last Modified: September 17, 2012 @ 6:43 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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