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कांग्रेस ने उस थप्पड़ की आवाज़ नहीं सुनी जो कान के नीचे बजाने से पैदा होती है: आदित्य ठाकरे

By   /  September 17, 2012  /  1 Comment

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महाराष्ट्र में शिवसेना से बगावत कर मनसे बनाने वाले राज ठाकरे पर लगाम कसने के लिए शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे की ने अब अपने पोते आदित्य ठाकरे को मैदान में उतार दिया है. इसीके साथ अब आदित्य ठाकरे ने अपने दादा की जहर उगलने की परंपरा को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया.

22 साल के आदित्य ठाकरे ने सार्वजनिक तौर पर दिए अपने पहले राजनीतिक भाषण में कांग्रेस के खिलाफ जहर ज़हर उगलते हुए कहा कि “आज काग्रेस ने लोगों की आवाज सुनी है, लेकिन थप्पड़ की वह आवाज नहीं सुनी है, जो कान के नीचे बजाने से पैदा होती है.”

यह माना जा रहा है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बढ़ते कद को देखते हुए शिवसेना अब आदित्य को तेजतर्रार नेता के तौर पर पेश करना चाहती है. चूंकि उद्धव ठाकरे की छवि एक शांत नेता की है, इसलिए बाल ठाकरे अपने पोते के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं.

शिवसेना की इकाई युवासेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने रविवार को शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक साइकलों और बैलगाड़ियों के साथ विरोध प्रदर्शन रैली की. यह रैली सब्सिडी वाली रसोई गैस में कटौती और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के विरोध में थी. रैली में करीब 10 हजार लोग शामिल हुए.

आदित्य ने कहा, हम काग्रेस के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे. आम लोगों की आवाज काग्रेस तक पहुंचेगी और हम यह पक्का करेंगे.

आदित्य रैली का नेतृत्व पैदल कर रहे थे. उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और सासद संजय राउत समेत शिवसेना के करीब दर्जन भर बड़े नेता थे. शिवसेना के ज्यादातर आयोजनों और रैलियों में दिखने के बावजूद आदित्य ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से भाषण नहीं दिया था.

युवा सेना के एक कार्यकर्ता ने कहा, भाषण से हम सब हैरान रह गए. हम करीब 2 साल से आदित्य साहेब के बोलने का इंतजार कर रहे थे. यह अहम है कि उन्होंने उद्धव साहेब की गैरमौजूदगी में रैली का नेतृत्व किया और भाषण दिया. उद्धव साहेब और बाला साहेब की खराब तबीयत के मद्देनजर पार्टी में थोड़ा ढीलापन था, लेकिन उनके भाषण से युवा सैनिक जोश में आ गए हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Kunwar Sen says:

    Nya Juta or nya afsar kuchh di kathta h fir sb dheele ho jate h.

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