/नरेन्द्र मोदी को जैसलमेर से चुनाव लड़ने की चुनौती….

नरेन्द्र मोदी को जैसलमेर से चुनाव लड़ने की चुनौती….

अपनी बेबाकी के लिए कुख्यात राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अशोक बैरवा ने नरेन्द्र मोदी के राहुल गाँधी को अंतर्राष्ट्रीय नेता कहने पर दी चुनौती..
-जैसलमेर से सिकंदर शेख
नरेन्द्र मोदी जैसलमेर से चुनाव लड़कर बताये तो माने, राहुल गाँधी तो वाकई अन्तराष्ट्रीय नेता ही है क्योंकि पूरी दुनिया उन्हें मानती है , ये बात आज जैसलमेर में अपनी एक दिवसीय यात्रा पर आये  राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अशोक बैरवा ने स्थानीय सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात चीत में कही, अपनी एक दिवसीय यात्रा पर जैसलमेर आये बैरवा कल  रामदेवरा मेला देखने गए  थे वहां से शाम को तनोत माता मंदिर गए थे और आज सुबह स्थानीय सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात कर वापिस जयपुर प्रस्थान कर गए…
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राहुल गाँधी पर अन्तराष्ट्रीय नेता की टिपण्णी पर बौखलाए  राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अशोक बैरवा ने उन्हें जैसलमेर से चुनाव लड़ने की चेतावनी दे डाली और कहा की नरेंद्र मोदी को जैसलमेर से चुनाव लड़ना चाहिए तो हम उनकी नेत्रत्व वाली बात को माने वरण राहुल गाँधी और सोनिया गांधी तो है ही अन्तराष्ट्रीय नेता उनकी पूरी दुनिया मानती है , और रहा सवाल उनके इटली से चुनाव लड़ने वाली बात का तो जहां संविधान इजाजत देगा वहां से वो चुनाव लड़ेंगे..
गुजरात के मुख्यमंत्री को ये चेतावनी  राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अशोक बैरवा ने आज स्थानीय सर्किट हाउस में  एक सवांददाता के सवाल पर दी…वे अपनी एक दिवसीय निजी यात्रा पर कल शाम को जैसलमेर आये थे,, वे पहले रामदेवरा गए थे जहां से बाबा रामदेव की समाधी केदर्शन के पश्चात वो कल शाम यहाँ जैसलमेर पहुंचे ..जहाँ वो भारत पाक सीमा पर स्थित तनोत माता मंदिर हेतु निकल गए..और आज सुबह स्थानीय सर्किट हाउस में रुके और पत्रकारों से बात चीत करी…
गौरतलब है की  राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अशोक बैरवा  अपनी बेबाकी के लिए खासे कुख्यात है और वो अपने दबंग लहजे में बहुत कुछ कह देते हैं ….अब भाजपा इसका क्या जवाब देगी ये तो वोही जाने मगर नरेन्द्र मोदी को चुनोती मिल चुकी है…
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.