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इन्टरनेट पर ममता को समर्थन देने वालों की कमी नहीं…

By   /  September 19, 2012  /  1 Comment

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-पलाश विश्वास||

केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा करने के बाद तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को इंटरनेट पर खूब समर्थन मिल रहा है। वहीं लोगों ने संप्रग सरकार में भ्रष्टाचार पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

ममता के आधिकारिक पृष्ठ पर राजीब मुखर्जी ने पोस्ट किया है, ”दीदी, हम आपको धन्यवाद देते हैं.. आपका निर्णय सही समय पर लिया गया और उचित है।”

अनिरबन बसु ने लिखा, ”दीदी आप महान हैं, हम सभी आपका समर्थन करते हैं।”

उत्पल दत्त ने लिखा, ”दीदी, आम आदमी के हित में निर्णय लेने के लिए धन्यवाद। कांग्रेस को लगता है कि देश उनका है।”
फेसबुक इस्तेमाल करने वालों के एक वर्ग ने हालांकि पिछले तीन वर्षों से संप्रग सरकार में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ममता की चुप्पी को लेकर सवाल भी उठाए।

शम्भू ने पोस्ट किया, ”दीदी, आप संप्रग में भ्रष्टाचार पर क्यों नहीं बोलतीं, जबकि यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से बड़ा मुद्दा है। पिछले तीन वर्ष से आप क्या कर रही थीं?”

मोहम्मद सलिमुल्लाह ने लिखा, ”आपकी सरकार बनने के बाद जब बिजली के शुल्क में पांच गुनी वृद्धि की गई तो प्रदर्शन क्यों नहीं किया गया?”

परोमिता सेन ने लिखा, ”मुकुल राय (रेल मंत्री) कैबिनेट मंत्री बनने के योग्य नहीं हैं.. अन्यथा वह मंत्रिमंडल की बैठक में भी इन निर्णयों (डीजल के दाम में वृद्धि, रसोई गैस का सिलेंडर एक परिवार के लिए साल में छह सीमित करने तथा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को अनुमति देने) का विरोध करते।”

ममता बनर्जी के फेसबुक पर अधिकारिक पेज के लिए यहाँ क्लिक करें..

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Shrawan kumar Akela says:

    इसे भारत देश का दुर्भाग्य कहे,या फिर देश की जनता का जातिवादी व धार्मिक उन्माद जिसके कारन ५ ,१० ,१५,या २० एम् .पी वाली क्षेत्रीय पार्टी भारत की सरकार चलती है या यूँ कहें की केंद्रीय सरकार को अपनी उँगलियों पर नचाती हैं !अब वक़्त आ गया है की जनता फैसला करे की धर्म और जाती के उन्माद में रहकर भारत को पाकिस्तान,बंगलादेश,अफगानिस्तान जैसा देश बनाना चाहती है जो अमेरिका जैसे देसों की रहमो कर्म पर रहे या यूरोपीय देशों की भी भारत भविष्य में अगुआई करे !राज्य स्तर तक तो ये क्षेत्रीय पार्टी कुछ्हद तक ठीक है पर जब ये देश की राजनीती को प्रभावित करने लगे तो ये देश और जनता के लिए दुर्भाग्य कहा जायेगा क्योकि क्षेत्रीय दल की सोच धर्म,जाती और क्षेत्र के अनुसार होती है जिसमे वे सिर्फ-और-सिर्फ अपने राज्य हित को सर्वोपरी समझाते हैं,उनके लिए देश ,राज्य के बाद आता है!

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