Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

बिहार का आइना इन दिनों फूट गया है…

By   /  September 19, 2012  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-श्रीकृष्ण प्रसाद||
मुंगेर।बिहार। 19सितम्बर।बिहार सरकार की अच्छाई और बुराई को उजागर करने की भूमिका निभाने वाला बिहार का हिन्दी और अंग्रेजी भाषाई आइना इन दिनों फूट गया है। बिहार के हिन्दी और अंग्रेजी भाषा के दैनिक अखबारों में बिहार सरकार के समक्ष गलत तस्वीर पेश की जा रहीहै। बिहार की राजधानी पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को खुश करनेके लिए प्रथम पृष्ठ पर कुछ उत्साहवर्द्धक और जीवंत खबरें छप जरूर  रही हैं जो बिहार जैसे पिछड़े राज्य के विकास के लिए जरूरी है। परन्तु बिहार के 38 जिलों में जिलाबार छपनेवाले हिन्दी अखबारों में जो खबरें इन दिनों छप रहीं हैं, वह खबरें सरकार के प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारियों के मनोबल को तोड़ने के लिए छापी जा रही है ।
बिहार के जिलों-जिलों में वितरित हो रहे जिलावार हिन्दी अखबारों के संस्करणों के कार्यालयों के प्रमुख और जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के संवाददाताओं को माहवार विज्ञापन संग्रह करनेका टारगेट सौंप दिया गया है विज्ञापन संग्रह का काम पत्रकारों का नियमतः नहीं है, परन्तु कंपनीनियुक्ति पत्र देने का प्रलोभन देकर नाजायज काम पत्रकारों से करा रही है और पत्रकारिता के पेशेको बदनाम कर रही है । और तो और,  विज्ञापन टारगेट न पूरा करनेवाले संवाददाताओं को अखबार से अलग करने की धमकी दे दी गई है। अपराध की खबरों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की खबरोंके प्रकाशन को विज्ञापन से जोड़ दिया गयाहै। स्थिति यह है कि पूरे दिन संवाददाता खबरों की तलाश से ज्यादा विज्ञापन की तलाश में व्यतीत कर रहे हैं। मजे की बात यह है कि जिला स्तर पर सरकारी पदाधिकारियों और अखबार के माध्यम से अपनी बात कहने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर प्रतिमाह विज्ञापन देने का दवाब बनाया जा रहा है। परिणाम यह है कि बिहार के 38 जिलों में प्रकाशित जिलावार संस्करणों में छपनेवाली खबरों की विश्वसनीयता अब नहीं रह गई है। अखबार के आतंक के कारण जिला स्तर के सरकारी पदाधिकारी, कर्मचारी और राजनीतिक कार्यकर्ता खामोशी से सब कुछ सह रहे हैं।
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार काशी प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से पूरे मामले की छानबीन राज्य की खुफिया एजेंसी से कराने की मांग की है ।
उन्होंने सरकार को कहा है कि पेड न्यूज के प्रचलन की जांच आसानी से की जा सकती है। हिन्दी अखबारों में छपने वाली खबरों से जुड़ी संस्थाओं के प्रमुख से पूछताछ कर सच्चाई की पुष्टि की जा सकतीहै।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि यदि बिहार में पेड न्यूज की बढ़ती प्रवृत्ति पर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती है, तो सबसे अधिक नुकसान सरकार को होगा क्योंकि खबरें कुछ बयां करेंगी और सच्चाई कुछ और ही होगी। जमीनी सच्चाई से रूबरू न होने से आगामी चुनाव में सरकार को काफी नुकसान भी हो सकता है ।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahendra gupta says:

    Nitish ka jadoo ab khatam hone lag gaya hae,sgayad nitish ki nitian bhi ab woh asardar nahin rahin hae,jitni pracharit ki jati rahi haen,janta ab kuch sachhaie chahti hae jo unki samasyaon ko door kar sake.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

ये इमरजेन्सी नहीं, लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र की हत्या का खेल है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: