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पत्रकार देवेश शास्त्री को ठिकाने लगाने की धमकी..

By   /  September 26, 2012  /  No Comments

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शराब पीकर चौक में किया उपद्रव, व्यापार मंडल की चेतावनी- कुछ हुआ तो खैर नहीं..

इटावा। रविवार की रात लालपुरा चौक में मंजूकांड का आरोपी कैंका पुत्र धर्मेन्द्र शराब पीकर सरेआम व्यापारी नेता सुनील जैन और पत्रकार देवेश शास्त्री को मां बहन की गालियों के साथ ठिकाने लगाने (जान से मारने) की धमकी देते हुए उपद्रव मचाता रहा। सोमवार की सुबह व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनंत अग्रवाल, डा. आशीष दीक्षित आदि करीब आधा दर्जन लोग एकत्र हुए। सभी ने एफआईआर करने पर जोर दिया, इस बीच रामबाबू बाकर लेकर आ गये, और अनुनय विनय करने लगे। अंततः इस चेतावनी के साथ एफआरआई न करने का निश्चय हुआ कि भविष्य में ऐसी दबंगई या उपद्रव हुआ तो खैर नहीं। जैसे ही व्यापारी नेता अपने अपने घर चले गये। थोड़ी देर में देवेश शास्त्री ड्यूटी पर देशधर्म प्रेस जाने को निकल रहे थे। सुनील जैन भी अपनी दूसरी मंजिल की बालकनी से गली की ओर देख रहा थे इतने में धर्मेन्द्र का वही बेटा कैंका चेहरे पर रूमाल लपेटे श्री शास्त्री व श्री जैन को घूरते हुए गालियां देता हुआ निकला।
बीतीरात के उपद्रव की सूचना सुनील जैन ने तत्काल अपने व्यापार मंडल के पदाधिकारियों की, रात में कोई नहीं पहुंचा मगर सोमवार की पौ फटते ही समूचा व्यापार मंडल श्री शास्त्री व श्री जैन की हिमायत में लालपुरा चौक में आ गये। वे हालचाल ले ही रहे थे, और एफआईआर की लिखापढी की भूमिका बना ही रहे थे, आरोपी कैंका के ताऊ तथाकथित वकील व्यापारी नेता अनंत को अकेले में ले जाकर वातचीत करने लगे। इसके बाद नगर के संभ्रान्तजन प्रतिमाशंकर दीक्षित की बैठक में चाय पी रहे थे तभी बुजुर्ग बर्तन व्यापारी रामबाबू बाकर लेकर लड़खड़ाते हुए आ घमके और नाती के खिलाफ रिपोर्ट न लिखाने की प्रार्थना करने लगे, ‘‘मेरी पत्नी हार्ट रोग से पीड़ित हैं। यदि रपट हुई, पुलिस आई तो वे मर जायेंगी।’’ इस वाक्य को सुनकर संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तय हुआ कि फिलहाल इस अशिष्टता को माफ किया जाये मगर आगे ऐसी खुराफात नहीं होनी चाहिए। ये सारी वार्ता मौखिक रही।

अभी कुछ ही मिनट हुए थे, तथाकथित वकील अपने वृद्ध पिता को लेकर कोतवाली गया और इधर आरोपी कैंका उसी अंदाज में श्री शास्त्री व श्री जैन को गरियाता हुआ निकला। उल्लेखनीय है उस वक्त उसका तथाकथित वकील और वृद्ध बाबा कोतवाली में बैठे थे, सबाल उठता है कि आखिर क्यों? ज्ञात हो कि होली पर जब घरों में ईंट पत्थर फैंके गये थे और श्री शास्त्री ने वरिष्ट पुलिस कप्तान को प्रार्थना पत्र दिया तो अस्तल चौकी पुलिस को रकम देकर उल्टे शास्त्री को ही 107/116 में पाबंद करा दिया गया था। आज भी इसी तरह के भेलगुंजे में कोतवाली में जाकर पेशबंदी निश्चित की गई होगी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब स्वयं रामबाबू ने व्यापारी नेताओं के सामने कहा ‘‘हम तो बर्वाद हो चुके हैं 28 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।’’
मंजूकांड के गवाह पत्रकार देवेश शास्त्री सीधे आरोपियों के निशाने पर हैं। चूंकि मुहल्ले के बहुसंख्यक जैन परिवारों द्वारा मजबूरी अथवा स्वार्थवश उक्त आरोपी बर्तन व्यवसाई परिवार की हां में हां मिलाकर सत्यनिष्ठ श्री शास्त्री के खिलाफ वातावरण बनाने के कुत्सित मनोभाव के उत्साह को बढ़ाते रहते हैं। जबकि व्यापारी नेता सुनील जैन तटस्थ रहकर उनसे दूरी बनाकर जीवन यापन करता है, उसपर मनोवैधानिक दबाव बनाने के लिए दबंगई दिखाई जा रही है।

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