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रेल किराया होगा महंगा…

By   /  September 28, 2012  /  1 Comment

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पहली अक्टूबर से रेलवे का किराया और भाड़ा दोनों बढ़ जाएंगे. ममता बनर्जी के संप्रग सरकार से समर्थन वापस लेने के साथ ही रेल सेवाओं को लंबे अरसे से मिल रही सर्विस टैक्स की छूट 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगी. इससे एसी और फ‌र्स्ट क्लास के रेल किरायों के अलावा ज्यादातर वस्तुओं के माल भाड़े में भी 3.7 फीसद की वृद्धि हो जाएगी. इसके अलावा कैटरिंग सेवाओं पर सर्विस टैक्स के बोझ से ट्रेन और रेलवे प्लेटफॉर्म पर खाना-पीना भी महंगा हो जाएगा.

रेल मंत्रालय ने इस संबंध में विज्ञप्तियां जारी कर दी हैं. इनके मुताबिक एसी फ‌र्स्ट क्लास, एक्जीक्यूटिव क्लास, एसी 2 टियर, एसी 3 टियर, एसी चेयर कार, एसी इकोनॉमी क्लास और सामान्य फ‌र्स्ट क्लास के यात्री टिकटों पर सर्विस टैक्स लागू होगा. माल भाड़े में यह नमक, अनाज जैसी छूट वाली चुनिंदा वस्तुओं को छोड़कर बाकी सभी पर लागू होगा.

सामान्यत: सेवाओं पर 12 प्रतिशत की दर से सर्विस टैक्स (दो फीसद शिक्षा उपकर व एक फीसद उच्च्च शिक्षा उपकर मिलाकर प्रभावी दर 12.36 फीसद) लागू होता है. मगर रेलवे को विशेष छूट दी गई है. लिहाजा यहां किराये-मालभाड़े के केवल 30 फीसदी हिस्से पर ही सर्विस टैक्स लगेगा. इस तरह यह 3.6 फीसद बनता है. इस पर दो फीसद की दर से शिक्षा उपकर और एक प्रतिशत की दर से उच्च्च शिक्षा उपकर को मिलाकर किराये-मालभाड़े में कुल प्रभावी बढ़ोतरी 3.708 फीसद की होगी.

यात्री किराये के मामले में सेवा कर उन अग्रिम टिकटों पर भी लागू होगा जो पहले बुक किए गए हैं, लेकिन जिन पर यात्रा एक अक्टूबर या इसके बाद होनी है. इसकी वसूली यात्रा के दौरान टीटीई यात्री से करेगा और रसीद देगा. रियायती टिकटों पर भी सर्विस टैक्स कुल किराये के 30 फीसद हिस्से पर लागू होगा. इसके अलावा रेलवे में दी जाने वाली कैटरिंग सेवाओं और पार्किंग आदि सेवाओं की पूरी कीमत पर 12 फीसद के हिसाब से सर्विस टैक्स लगेगा.

टिकट रद्द कराने की स्थिति में सर्विस टैक्स वापस हो जाएगा. सर्विस टैक्स की वसूली में रेलवे को जहां अतिरिक्त संसाधन झोंकने होंगे, वहीं उसे इसका धेला भर लाभ नहीं मिलेगा. यह पूरी रकम वित्त मंत्रालय के खाते में जाएगी.

-जब मेरे कार्यकाल में ऐसा प्रस्ताव लाया गया था तो मैंने उसे रोक दिया था. अब उन लोगों (संप्रग सरकार) ने ऐसा किया है, क्योंकि हम लोग वहां नहीं हैं. इसी को कहते हैं विनाश काले विपरीत बुद्धि. -ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahgendra gupta says:

    यह तो होना ही था,अभी तो आम आदमी को भी इसे भुगतना होगा क्योंकि पिछले कितने ही सालों से इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है.वैसे भी अमेरिका से निर्देशित सरकार को नवम्बर से पहले यह सब निर्णय लेने ही होंगें.अभी तो आर्थिक सुधारों के नाम पर कई और चोंकाने वाले सुधार देखने को मिलेंगें,इतने सालों से चुप बनी सरकार को ममता के जाते ही न जाने क्या क्या यद् आ गया है.सोनिया की स्वास्थ्य यात्रा न जाने देश के कितने लोगों के स्वास्थ्य को बिगड़ेगी,यह देखना दिलचस्प होगा.

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