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अजीत पवार को पटखनी दे ही डाली शरद पवार ने…

By   /  September 28, 2012  /  1 Comment

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लोमड़ी से भी ज्यादा चालाक शरद पवार ने पावर गेम में अपने भतीजे अजीत पंवार को भी नहीं बख्शा और उसे ज़बरदस्त पटखनी देते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद से चलता कर दिया.

ताज़ा खबरों के अनुसार राकांपा विधायक दल की बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. गौरतलब है कि सिंचाई घोटाले में आरोप लगने के बाद अजीत ने इस्तीफा दिया था. अजीत को लेकर राकांपा के सदस्यों के बीच कई दिनों से टकराव जारी था.

राकांपा प्रेजिडेंट शरद पवार ने कहा कि सिंचाई घोटाले की सच्चाई श्वेत पत्र के जरिए सामने आएगी. उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द श्वेत पत्र आना चाहिए.

वही राकांपा एमपी सुप्रिया सुले ने बड़े नाटकीय अंदाज़ में कहा कि पार्टी में कहीं कोई मतभेद नहीं है. उन्होंने कहा कि ऑल इज वेल.

इससे पहले शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष शरद पंवार ने अपने भतीजे अजीत पंवार से मुलाकात की थी. यह मुलाकात राकांपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल के निवास पर हुई.

माना जा रहा है कि अजीत पवार के इस्तीफे की वजह से जो राजनीतिक संकट पैदा हुई है शरद पवार के इसमें दखल देने के बाद इसका सर्वमान्य समाधान निकल आएगा. पार्टी पहले ही अजीत पंवार से इस्तीफा वापस लेने को कह चुकी है.

गौरतलब है कि अजीत पवार ने मंगलवार को अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौह्वाण को सौंप दिया था. सिंचाई घोटाले में नाम आने और मीडिया में इस मुद्दे को जोरशोर से उछाले जाने के बाद अजीत पवार ने यह कदम उठाया था.

पार्टी ने इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार पार्टी प्रमुख शरद पवार पर छोड़ दिया था. अजीत पंवार के इस्तीफा देने के बाद उनके समर्थन में पार्टी के सभी 19 मंत्रियों ने भी अपना इस्तीफा प्रदेश पार्टी अध्यक्ष को सौंप दिया था.

उधर, अजीत पंवार ने अपने चाचा शरद पवार से किसी विवाद से इन्कार किया है. राकांपा ने आशंका जताई है कि सिंचाई विभाग संबंधी सूचनाएं मुख्यमंत्री द्वारा लीक की गई है लेकिन कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. पार्टी का कहना है कि आरटीआइ कानून बनने के बाद कोई चीज छुपी नहीं रह सकती.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahendra gupta says:

    महारास्ट्र में चाचा भतीजा की लड़ाई राजनितिक उत्तराधिकार के लिया नई नहीं है. अब हालत दिलचस्प बन गएँ हैं,कब कौन किसको पटखनी देगा , हर बार इसका इंतजार रहा करेगा.

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