Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

कहीं नहीं जा रही ‘दागी’ बरखा दत्त: ‘बेशर्म’ NDTV ने बदले सिर्फ मैनेजर

By   /  July 29, 2011  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

एनडीटीवी ग्रुप में कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों विवादों के केंद्र में रही बरखा दत्त की ‘कुर्सी’ पर कोई खतरा नहीं है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अभी बरखा अंग्रेजी न्यूज़ की ग्रुप एडिटर के तौर पर काम करती ही रहेंगी। ग्रुप के बोर्ड मीटिंग में शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण पदों पर कंपनी के ही पुराने लोगों को बिठाया गया है।

गौरतलब है कि 2G स्पेक्ट्रम घोटाले में बरखा का नाम खासा विवादों में आ गया था जब उनकी कॉर्पोरेट लॉबीस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत के टेप जारी हुए थे। मीडिया में बरखा दत्त की भारी आलोचना हुई थी और इंडिया गेट पर तो एक बार उन्हें आम लोगों ने हूट कर भगा दिया था। इतना ही नहीं, हाल ही में उनके ही शो में ही स्वामी अग्निवेश ने मीडिया करप्शन पर एक सवाल पूछकर उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया था।

लेकिन कहा जा रहा है कि ग्रुप ने इतनी शर्मिंदगी उठाने के बावजूद बरखा की ही तरफदारी करने का फैसला किया है। सूत्रों की मानें तो प्रणॉय रॉय ने माना है कि बरखा को अभी हटाना ग्रुप की बची-खुची साख भी खत्म कर देगा क्योंकि वह इस मुद्दे पर अब तक अपना बचाव करते आए हैं। अगर अभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तो इसका संकेत यह जाएगा कि अब तक बरखा के किए पर पर्दा डाला जा रहा था।

बरखा दत्त के कुछ बड़े कॉरपोरेट घरानों से अच्छे संबंध हैं जिनके करोड़ों के विज्ञापन ग्रुप के चैनलों पर चल रहे हैं। कहा ये भी जा रहा है कि बरखा ने इन कॉरपोरेट घरानों से अपने लिए मैनेजमेंट पर दबाव तो डलवाया ही, साथ ही यह भी संकेत दिए कि अगर उसे हटाया गया तो वह ये विज्ञापन रुकवा देगी। ऐसे में एनडीटीवी बरखा को छेड़ कर नुकसान करने के लिए तैयार नहीं था।

इसके अलावा एनडीटीवी में कई और परिवर्तन हुए हैं। एनडीटीवी के ग्रुप सीईओ केवीएल नारायण राव को एक्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया जा गया है जबकि विक्रम चंद्रा को ग्रुप सीईओ का पद दिया गया है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: