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बकाया भुगतान नहीं करने पर सुजलॉन के जैसलमेर स्थित कार्यालयों पर लगाये ताले…

By   /  October 5, 2012  /  7 Comments

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40 करोड से भी अधिक के बकाया भुगतान को लेकर आक्रोशित ठेकेदारों ने बंद करवाया कंपनी का काम, कार्यालयों सहित कंपनी के गेस्ट हाउस भी किये बंद, सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को किया सडक पर, अब उर्जा उत्पादन को रोकने के लिये जी एस एस को भी करवा रहे हैं बंद…

-जैसलमेर से मनीष रामदेव||

जैसलमेर, पवन उर्जा के क्षेत्र की बडी कंपनी सुजलॉन के जैसलमेर स्थित कार्यालयों व गेस्ट हाउसों पर आज कंपनी के ही ठेकेदारों ने बकाया भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हुए ताले लगा दिये गये और सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को कार्यालयों व गेस्ट हाउसों से बाहर निकाल दिया गया। करीब 40 करोड रूपये से भी अधिक के बकाया भुगतान को लेकर ये ठेकेदार पिछले कई दिनों से आन्दोलन पर थे लेकिन कंपनी द्वारा कोई जवाब नहीं दिये जाने के कारण आज इन ठेकेदारों ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए यह कदम उठाया है।
जैसलमेर में काम कर रही विभिन्न पवन उर्जा कंपनियों के साथ इन ठेकेदारों का भुगतान पिछले लम्बे समय से बकाया चल रहा था जिसमें एनरकॉन, लेंन्को सहित कई बडी बडी कंपनियां शामिल थी। ठेकेदारों द्वारा इस संबंध में जिला प्रशासन व पुलिस को भी शिकायतें की गई थी जिसमें जिला कलक्टर शुचि त्यागी व पुलिस अधीक्षक ममता विश्नोई ने इन कंपनियों के अधिकारियों को बुला कर इनके साथ वार्ता करना तय किया था। आज जिला प्रशासन व पुलिस के साथ हुई कंपनियों की बैठक में जहां शेष कंपनियों ने बकाया भुगतान करने की बात कही वहीं सुजलॉन कंपनी की ओर से न तो प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुआ और न ही कोई अधिकृत रूप से बकाया भुगतान के बारे में बताने को तैयार है ऐसे में सुजलॉन कंपनी के अडियल रवैये से नाराज ठेकेदारों ने कंपनी कार्यालयों व गेस्ट हाउसों पर ताले लगा कर सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को बाहर निकाल दिया है और इनके उत्पादन को रोकने की तैयारी कर रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा की गई तालाबंदी की कार्यवाही के दौरान कंपनी के अधिकारियों द्वारा पुलिस को भी सूचना दी गई जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन कंपनी का कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी पूर्वक ठेकेदारों को आश्वासन देने को तैयार नहीं दिखा। गौरतलब है कि सुजलॉन कंपनी पवन उर्जा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर बहुत बडा नाम है लेकिन पिछले कुछ समय से आर्थिक मंदी के चलते संभवतः ये कंपनी अपने ठेकेदारों को भुगतान नहीं कर पा रही है। इतना ही नहीं नाम न बताने की शर्त पर कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी कंपनी की भर्तस्ना करते हुए कहा कि उन्हें भी पिछले लम्बे समय से वेतन समय पर नहीं दिया जा रहा है।

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About the author

मनीष रामदेव बरसों से जैसलमेर से पत्रकारिता कर रहे हैं. वर्तमान एल्क्ट्रोनिक मीडिया के साथ साथ वैकल्पिक मीडिया के लिए भी अपना समय दे रहे हैं. मनीष रामदेव से 09352591777 पर सम्पर्क किया जा सकता है.

7 Comments

  1. Sudeepto Mehta says:

    This reminds me strike that was held in Mumbai by employees of cotton mills, if you turn on your company which provides you bread and butter this will only damage you.

    I am following Suzlon from many months and I understand that this may not be the best time of Suzlon but best is definitely coming. Have some patience and vendor will definitely get paid so does investors like me who have invested in Suzlon shares.

    Remember, if you want good returns you should learn to wait for sometime, best wishes to Suzlon.

    • मनीष रामदेव says:

      पिछले कई दिनों से आन्दोलन पर थे लेकिन कंपनी द्वारा कोई जवाब नहीं दिये जाने के कारण इन ठेकेदारों ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए यह कदम उठाया है।

  2. prince malli says:

    This is a problem of the entire industry; every renewable company present is facing problems which are beyond their capacity. Singling out one company is sad.

    When the grid failed some time ago it’s the wind companies which came to the rescue of the state and powered essential services for days till the grid was completely रेस्तोरेड

    Last year agitation against wind and solar companies delayed the projects badly, entire cost and planning going haywire.

    Arm twisting by powerful and politically connected contractors are going to hurt the industry badly in Rajasthan, this will chase the potential investors out of the state.

    After the incident, regular vendors innerved and restored the office functioning.

    • मनीष रामदेव says:

      जिला प्रशासन व पुलिस के साथ हुई कंपनियों की बैठक में जहां शेष कंपनियों ने बकाया भुगतान करने की बात कही वहीं सुजलॉन कंपनी की ओर से न तो प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुआ और न ही कोई अधिकृत रूप से बकाया भुगतान के बारे में बताने को तैयार है ऐसे में सुजलॉन कंपनी के अडियल रवैये से नाराज ठेकेदारों ने कंपनी कार्यालयों व गेस्ट हाउसों पर ताले लगा कर सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को बाहर निकाल दिया

  3. Amol Chavan says:

    Being an analyst in finance sector I am aware that there is some problem going with Suzlon at this time but this is definitely not this big that people should react in this manner.

    The rough period for sure will get over in next 40-45 days and company will have a good cash flow again, these vendors should understand this and stop taking any such harmful actions.

    My suggestions to these vendors: have patients you are dealing with a Giant in wind industry, your money is safe.

  4. संग्राम राणे says:

    भलेहि यह कंपनीने इसबार पैसा देने मे देरि कि हो लेकिन इन्हि लोगोंको यह नहि भुलना चाहिए कि सुजलॉन से पैसे ले ले कर हि यह लोग इतने बडे हुए है, अगर कंपनी कि हालत ठिक नहि है तो इन्हि लोगोंको कंपनी के पिछे खडे होना चाहिएक नाकि ऐसा बर्ताव करना चाहिए था. सुजलॉन एक बहुत हि अश्वासक नाम है और इस कंपनी कि अवस्था अगले एक से देड महिने मे अच्छी होने कि उम्मीद है, उसके बाद क्या यहि लोग कंपनीके पैसेसे रहिस नहि बनेंगे?

    • मनीष रामदेव says:

      नाम न बताने की शर्त पर कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी कंपनी की भर्तस्ना करते हुए कहा कि उन्हें भी पिछले लम्बे समय से वेतन समय पर नहीं दिया जा रहा है।

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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