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जैसलमेर की एसबीआई बैंक से 83 लाख 29 हजार 765 की चोरी का सुराग तक नहीं…

By   /  October 7, 2012  /  1 Comment

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जैसलमेर की एसबीआई बैंक मे सुरंग खोदकर 83 लाख 29 हजार 765 रूपए चोरी होने के मामले मे पुलिस की ओर से आज  भी पूछताछ का सिलसिला बना रहा. शनिवार  रात तक पुलिस अधीक्षक ममता राहुल, पुलिस उप अधीक्षक सायरसिंह व शहर कोतवाल वीरेन्द्रसिंह जोधा की मौजूदगी मे संदेह के आधार पर पूछताछ का सिलसिला चलता रहा. करीब एक हज़ार से अधिक लोगो से पूछताछ हो चुकी हें, पुलिस अधीक्षक ममता राहुल जल्द से जल्द इस काण्ड का पर्दाफास करने में जुटी हें ,इससे पूर्व पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व मे पुलिस अधिकारी सुबह एक बार फिर बैंक पहुंचे और बैंककर्मियो व एलआईसी कर्मचारियो से पूछताछ की.

पुलिस की आठ टीमें अब तक करीब एक हजार लोगों से पूछताछ कर चुकी है. इस बीच चोरी की वारदात के बाद जैसलमेर मे पड़ताल करने पहुंचे बैंक के दिल्ली व जयपुर से आए आला अधिकारी रवाना हो गए. पुलिस का मानना है कि चोरी की वारदात मे कम से कम पांच लोग शामिल थे. उनके अनुसार चुराई गई 83 लाख रूपए की राशि मे 50-50 रूपए के बंडलो का वजन करीब डेढ़ क्विंटल था. ऎसे मे सुरंग से एक साथ यह राशि निकालना एक या दो व्यक्तियो का काम नहीं हो सकता. इसमें कम से कम पांच लोगों का सहयोग रहा है.

सुराग ढूंढने की मशक्कत
जैसलमेर मे सीसीटीवी के विशेषज्ञ जयपुर से बुलाए गए है. बैंक प्रबंधक एसएस राजपुरोहित ने शुक्रवार को कुछ क्लिप्स पुलिस को उपलब्ध करवाई. विशेषज्ञो ने फुटेज की तस्वीरे निकालकर कुछ सुराग ढूंढने की मशक्कत की. दिनभर ये विशेषज्ञ फुटेज में से आरोपियों की तस्वीरों व चोरी के तरीकों की तस्वीरें ढूँढने में जुटे रहे.

छोकरवाड़ा में भी हुई थी ऎसी वारदात
जैसलमेर के एसबीआई बैंक में सेंधमारी की जिस तरह से सुरंग खोदकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया, ठीक वैसे ही घटना भरतपुर के छोकरवाड़ा में कुछ अरसे पहले एक बैंक में हुई थी. उस दौरान भी सुरंग खोदकर कुछ लोग बैंक में घुसे थे. लेकिन वहां उस दौरान बैंक में रखे परीक्षा के प्रश्न पत्रों को देखने जब सुरक्षाकर्मी अंदर पहुंचे तो उनकी आहट से आरोपी वहां से भाग गए.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. vk says:

    यह मामला खुल चुका है. चोर पकड़ा जा चुका है.

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