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फेसबुक यूजर्स इन दस बातों से रहें दूर…

By   /  October 8, 2012  /  No Comments

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न्यूयॉर्क: फेसबुक के सह-संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि गुरुवार को फेसबुक के यूजर्स की संख्या एक अरब को पार कर गई है. फेसबुक पर आप किसी भी तरह अवैध रूप से मल्टीलेवल मार्केटिंग को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं. हालांकि पोंजी स्कीम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन धोखेबाजी और स्कैंडल से उपयोगकर्ताओं को दूर रहने के लिए कहा गया है. अगर आप यौन मामलों में सजा भुगत चुके हैं तो आपके लिए फेसबुक के दरवाजे बंद हैं. आप इसपर कोई भी अकाउंट नहीं खोल सकते हैं. फेसबुक पर व्यक्तिगत तौर कोई भी गलत जानकारी नहीं दे सकते हैं.
वहीं किसी दूसरे के नाम से और एक ज्यादा अकाउंट पर पाबंदी रखी गई है. फेसबुक आपके कुत्ते, ऑटामैटिक मशीन और दो साल के कम उम्र के बच्चे के लिए तो बिल्कुल नहीं है. एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक से प्रतिदिन 20 हजार अकाउंट बंद किए जाते हैं. आप कभी भी फेसबुक अकाउंट पर अनाधिकृत कमर्शियल जैसे स्पैम, कोई वायरस, कोई दुर्भावनापूर्ण कोड आदि नहीं डाल सकते हैं.
आप कभी भी किसी से जुड़ी खराब बातें, धमकी, पोर्नोग्राफिक, उत्तेजित हिंसा या न्यूडिटी आदि चीजों को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं. कई लोग दुश्मनी के कारण अपने दोस्तों और दुश्मनों का प्राइवेट डाटा इंटरनेट पर डाल देते हैं, लेकिन फेसबुक पर इन सब चीजों के लिए पाबंदी है. खासकर उसके पहचान और आर्थिक संबंधी डाटा पर फेसबुक सबसे ज्यादा सख्त है फेसबुक पर आप किसी को भी सताने, भयभीत करने का काम नहीं कर सकते.

साइबर लॉ के हिसाब से यह आज के सबसे बड़े मुद्दे हैं, जिनपर सबसे जल्दी कार्रवाई की जाती है. अभी हाल में यूके की अदालत में कुछ लोगों को बड़ी सजा दी गई, उन लोगों ने पड़ोस में रहने वाली एक 45 साल की महिला का झूठा अकाउंट बनाया था. फेसबुक के लिए आपको कम से कम 13 साल की उम्र का इंतजार करना होगा. अगर आप पकड़े गए तो इसके लिए भी सजा का प्रावधान है.

आप अपनी व्यक्तिगत टाइमलाइन को अपने कमर्शियल लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. जैसे एडवाइजर बनकर अपने उत्पाद के बारे में जानकारी नहीं दे सकते हैं. किसी दूसरे उपयोगकर्ता के डाटा को बेच नहीं सकते. है. कहने का मतलब यह है कि फेसबुक से आप कुछ भी कमा नहीं सकते हैं. फेसबुक की एक लाइन- फेसबुक पर कुछ भी कहें, अब पूरी दुनिया आपके हाथों में है. फेसबुक कहता है कोई भी उपयोगकर्ता इस बात का दूसरा मतलब न निकाले.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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