/आर्यन टीवी के मालिक पर इनकम टैक्स का छापा: अधिकारियों और मीडियाकर्मियों में झड़प

आर्यन टीवी के मालिक पर इनकम टैक्स का छापा: अधिकारियों और मीडियाकर्मियों में झड़प

देर से मिली खबर के मुताबिक आर्यन टीवी के मालिक, एमडी अनिल कुमार के पाटलिपुत्रा बिल्‍डर्स प्राइवेट लिमिटेड के कई ठिकानों पर इनकम टैक्‍स ने छापेमारी की है और इस दौरान अधिकारियो व पत्रकारों के बीच जम कर झड़पें हुई।

शुक्रवार से ही चल रही छापेमारी शनिवार तक जारी रही। सुबह साढ़े नौ बजे आईटी टीम ने बिल्‍डर्स के महाराजा कॉम्‍पलेक्‍स, एग्‍जीविशन रोड और आरके भट्टाचार्य रोड के ठिकानों पर छापा मारा।

अपुष्ट खबरों के मुताबिक टीम को सूचना मिली थी कि बिल्‍डर अनिल कुमार सिंह ने करोड़ों रुपये की आयकर चोरी की है। जिसके बाद टीम एक साथ उनके सभी ठिकानों पर छापा मारा। खबर है कि उनके सभी बैंक खातों और लॉकरों को आईटी टीम ने सील कर दिया हैं। अनिल कुमार सिंह का रीयल एस्‍टेट के अलावा दवा का कारोबार भी है। टीम सभी कागजातों की जाचं कर रही है।

बताया जाता है कि इनकम टैक्स की टीम ने चैनल के न्यूज़ रुम में भी घुसने की कोशिश की,लेकिन इनपुट के यू के दुबे तथा रिपोर्टर रुपेश ने विरोध कर उन्‍हें रोक दिया। जब हंगामा बढ़ा तो तकनीशियनों की टीम भी उनके साथ आ गई। मामला बिगड़ता देख इनकम टैक्स के लोग खिसक लिए। असाइनमेंट हेड चंदन झा का कहना है कि इनकम टैक्स के अधिकारियों के पास टीवी चैनल की जांच के लिए कोई सर्च वारंट या कागज नहीं था इसलिए इनकम टैक्य की टीम  को रोका गया।

बताया जा रहा है कि आईटी टीम के हाथों कई महत्‍वपूर्ण कागजात लगे हैं जिनमें 30 करोड़ की बेनामी जमीन के दस्तावेज़ भी हैं। हालांकि आईटी अधिकारियों ने इस बात की पुष्चि नहीं की है कि कितने की संपत्ति का राज खुला है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.