/जागरण के ब्यूरो चीफ को चाहिए गनर और पिस्तौल: पत्रकार पर लगाया सुपारी देने का आरोप

जागरण के ब्यूरो चीफ को चाहिए गनर और पिस्तौल: पत्रकार पर लगाया सुपारी देने का आरोप

रत्नाकर दीक्षित

इन दिनों पूर्वांचल के चंदौली जिले में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ की जान को खतरा हो गया है। चंदौली के ब्यूरोचीफ रत्नाकर दीक्षित ने एसपी को पत्र देकर अपनी हत्या की सुपारी दिए जाने का आरोप लगाया है। इसके बाद एसपी ने उन्हें एक गनर मुहैया करा दिया है। दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि यह मामला पिस्तौल के लाइसेंस लेने से जुड़ा हुआ है। प्रभारी महोदय दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।

रत्नादकर दीक्षित ने एसपी को जो पत्र दिया है, उसमें तो उन्होंने किसी का नाम नहीं लिखा है, परन्तु मौखिक रूप से आरोप लगाया है कि उनकी हत्या की सुपारी पूर्व ब्यूरो चीफ मदन चौरसिया ने दी है। अंदरखाने से जो खबर आ रही है वह यह है कि रत्नाकर दीक्षित एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश में हैं। एक तरफ वे जागरण, वाराणसी के संपादकीय प्रभारी राघवेंद्र चड्ढा की राह का रोड़ा बने मदन चौरसिया को उनकी औकात दिखाना चाहते हैं तथा दूसरी तरफ पिस्टल का लाइसेंस भी लेना चाहते हैं।

बताया जा रहा है कि रत्नाकर को चंदौली का ब्यूरोचीफ बनाए जाने के बाद मदन चौरसिया तथा उनके बीच काफी तनाव था। राघवेंद्र चड्ढा अपने आदमी को सेट करना चाहते थे परन्तु  मदन बार-बार आड़े आ रहे थे। जिसके बाद रत्नाकर ने न सिर्फ मदन के साथ हाथापाई की बल्कि उन्हें एक साजिश के तहत अखबार से निकलवा भी दिया।

इसके पीछे मामला यह था कि राघवेंद्र चड्ढा की अनुपस्थिति में मदन चौ‍रसिया कार्यालय जाकर डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार को अपनी आपबीती सुना दी थी, तभी से चड्ढा खार खाए हुए थे। इसके बाद उन्होंने न सिर्फ मदन चौरसिया को जागरण से बाहर का रास्ता दिखलाया बल्कि अब उसे सबक सिखाने की तैयारी भी कर रहे हैं। जान पर खतरा होने का अंदेशा वाली बात इसलिए भी झूठी लग रही है कि रत्नाकर ने मामला चंदौली कोतवाली में दर्ज कराने की बजाए सीधे एसपी को दिया है।

खबर है कि सपा के युवा नेता और बिजनेस मैन मनोज सिंह की रत्नाकर दीक्षित से खूब छनती है। अभी हाल ही में रत्नाबकर ने एक कार खरीदी है, जिसको लेने में कहा जा रहा है कि मनोज सिंह ने आर्थिक मदद की थी। कर्नाटक में व्यवसाय करने वाले मनोज सिंह वहां से चुनाव भी लड़ चुके हैं। अब वो अपने गृह जनपद से चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। इसके लिए नए परसीमन के बाद बने सकलडीहा या सैयदराजा विधानसभा से भाग्य  आजमाने की कोशिश में हैं।

इसके लिए वो रत्नाकर दीक्षित का सहारा ले रहे हैं, जिनकी सपा अध्यक्ष प्रभुनारायण सिंह यादव और सपा सांसद रामकिशुन से काफी गहरी छनती है। हालांकि सैयदराजा से सपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिया है, परन्तु उसका विरोध हो रहा है। विरोध की छोटी खबरों को भी जागरण बड़ा करके प्रकाशित करता है ताकि मनोज को टिकट दिलाने का खेल को फैलाया जा सके। इसके लिए पीछे जागरण संस्कररणों को देखा जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि एक हाथ दो दूसरे हाथ लो की रणनीति के सहारे रत्नाकर ने मनोज सिंह से टिकट दिलाने और विरोध की खबर छापने के एवज में पिस्टाल दिलाने की मांग की है, जिसके लिए यह बिजनेसमैन नेता सहर्ष तैयार है। बताया जा रहा है कि अब जान पर खतरे की जो बात कही जा रही है, वो बस पिस्टल का लाइसेंस कराने के लिए कही जा रही है।

लोगों में चर्चा है कि इसमें चंदौली के पुलिस अधीक्षक की भी मौन सहभागिता है, नहीं तो अब तक मुकदमा दर्ज कर लिया गया होता। यह खेल रत्नाकर और एसपी शलभ माथुर केवल अपनी अपनी गोटी मजबूत करने के लिए खेल रहे हैं ताकि फंसने की नौबत ना आए। क्योंकि पुलिस ने अब तक मदन से इस मामले में पूछताछ भी नहीं की है। वैसे भी चंदौली के सूत्र बताते हैं कि जागरण में ढाई-तीन हजार पाने वाले मदन चौरसिया खुद इस समय अपने खाने की चिंता में परेशान हैं वो क्या किसी की हत्यां की सुपारी देंगे। सारा खेल सबक सिखाने और पिस्टल का लाइसेंस लेने के लिए है।

(खबर चंदौली के एक पत्रकार के मेल पर आधारित)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.