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अंधेर नगरी, चौपट राजा…

By   /  October 15, 2012  /  No Comments

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सलमान खुर्शीद दम्पति के एनजीओ पर अपाहिजों को मिलने वाले उपकरणों की राशि के गबन के आरोपों ने देश के हर नागरिक को शर्मसार कर दिया है. आजतक द्वारा ऑपरेशन “धृतराष्‍ट्र” के तहत खोले गए पूर्व राष्ट्रपति स्व.  जाकिर हुसैन के नाम पर चल रहे इस एनजीओ के इस घपले ने हालाँकि कई बड़े घोटालों को परदे के पीछे भेज दिया है मगर देश में चरों तरफ सलमान खुर्शीद की मिटटी पलित कर के रख दी  है. फेसबुक पर भी सिर्फ खुर्शीद और ऑपरेशन धृतराष्‍ट्र ही छाया हुआ है. एक फेसबुकीयन संदीप गर्ग ने अपनी वाल पर टिपण्णी की है उसे हम आपके सामने जस का तस रख रहे हैं.

 

देश को लूटने की खुली छूट दे कर मनमोहन ने आम आदमी का बजा दिया बाजा, कल जो देखा आंखे

झुक गयी ,डूब मरने का मन किया , सरकारी दामाद को बचाए मनमोहन सरकार कोई दुःख नहीं मगर आम आदमी वो भी ऐसा आम आदमी जो चल नहीं सकता, बोल नहीं सकता, देख नहीं सकता ,सुन नहीं सकता ,जिस के हाथ नहीं ,पैर नहीं उस इन्सान के साथ जुलम जीने देख कर ही आँखों में पानी आ जाता है ,उनकी थाली से रोटी उठा कर खा जाये कोई ये तो शायद कोई कुत्ता भी न करे , देश के लोगो ने कुछ सालो में बहुत बड़े बड़े घुटाले देखे हैं इन घुटालो ने आम आदमी के दिमाग पर चोट की मगर जो कल देख उसने सीधे दिल पर चोट की है.

व्यंग्यचित्र: मनोज कुरील

कल ‘आज तक’ पर विकलांगो के पैसे से नेताओ को अपने महल खड़े करते देख मुझे किरण दीदी की याद आई जिन्होंने हवाई यात्रा में कुछ पैसे बचाए थे वो भी जेल में बंद कैदियो के बच्चो के लिए यही सरकार यही मंत्री क्या कुछ नहीं बोले आज सब की माँ मर गयी क्या, सब को सांप सूंघ गया, क्या यही है PM जी की चुप्पी, जिस से लाखो चेहरे बेनकाब होने से बच जाये, सरकार चलाने को पैसे पेड़ पर नहीं उगते मगर सरकार दमाद का घर हो सरकारी नेताओ मंत्रियो और सरकारी अधकारी के लिए तो पैसे पेड़ पर ही उगते है मनमोहन जी ,आप बेशर्म हो चुके हैं ये तो हम पहले ही जान चुके हैं, अब आप भी जान लो आप बेकार हो चुके हैं , देश को बेकार बनाने पर तुले हैं , अगर अब भी देश की जनता इनका साथ देगी , अपने हाथ से अपना गला घोटना होगा ,दिल में बहुत दर्द है गुसा है अगर कुछ लफ्ज काडबे और सख्त लिखे गए हों तो माफ़ कर देना , …..

दिल में दर्द हो तो लफ्जो में झलक जाता है ,
दर्द जब हद से बढ जाये आँखों में पानी आता है.
ज़ुल्म जब हद से बढ जाये तो आम आदमी हथियार उठाता है,
देश जब खतरे में हो हर इन्सान क्रांतिकारी बन जाता है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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