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कास्टिंग काउच के आरोप में उलझा रानी मुखर्जी का भाई राजा…

By   /  October 15, 2012  /  No Comments

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‘कास्टिंग काउच’का जिन्न एक बार फिर से बॉलीवुड में अपना ज़हर बिखेरता नज़र आ रहा है. इस बार  ‘कास्टिंग काउच’ के जिन्न का शिकार बनी हैं मॉडल प्रिया मिश्रा. मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी के भाई राजा मुखर्जी  को प्रिया मिश्रा से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

आरोप लगाने वाली मॉडल प्रिया मिश्रा के अनुसार यह घटना उस वक्‍त हुई जब वह अपनी स्क्रिप्‍ट पर चर्चा के लिए राजा मुखर्जी से मिलने गई थी. राजा को वर्सोवा में रविवार  शाम को गिरफ्तार किया गया.

राजा मुखर्जी कई टीवी शो प्रोड्यूस करने वाले हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक राजा मुखर्जी ने प्रिया को ड्राइव के लिए अपनी कार में बैठाया और उन्‍हें अपने शो में रोल देने के बारे में डिस्‍कस करने लगे. लेकिन कुछ देर बाद ही राजा ने प्रिया से बदसलूकी करनी शुरू कर दी. प्रिया ने इसका विरोध किया और वह कार से बाहर आ गईं.

पुलिस का कहना है कि 35 साल के राजा मुखर्जी ने अपनी कार में मॉडल से छेड़छाड़ की है. एसीपी नरसिंह शेरखान ने कहा, ‘मॉडल राजा मुखर्जी को स्क्रिप्‍ट दिखाने गई थी. राजा ने उसे अपनी कार में बिठा लिया और उसके साथ छेड़छाड़ की.’

आरोप लगाने वाली मॉडल टीवी में काम करती है. मॉडल की शिकायत पर राजा को मेडिकल टेस्‍ट के लिए भेजा गया, फिर उसे पुलिस हिरासत में लिया गया.   उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और 363 के तहत मामला दर्ज किया गया है. राजा को सोमवार को अंधेरी मेट्रोपोलिटन कोर्ट में पेश किया गया. जहाँ से उसे दस हज़ार की जमानत और मुचलके पर रिहा कर दिया गया.

राजा मुखर्जी फिल्‍मालय स्‍टूडियो के संस्‍थापक राम मुखर्जी के बेटे हैं. राजा के करीबी सूत्रों का कहना है कि प्रिया ने राजा की इमेज खराब करने के लिए उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं और मॉडल ने रोल नहीं मिलने पर झूठी शिकायत करने की धमकी दी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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