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कांग्रेसी नेताओं के बयान ट्रेंड कर रहे हैं ट्विटर पर…

By   /  October 16, 2012  /  No Comments

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सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयान ट्रेंड कर रहे हैं। अलग-अलग मौके पर दिए गए इन बयानों को ट्विटर और फेसबुक पर खूब साझा किया जा रहा है। यही नहीं यूजर इन पर मजेदार टिप्पणियां भी कर रहे हैं।

आप भी पढ़िए यह चुनिंदा बयान और साझा कीजिए अपनी प्रतिक्रिया…

मैं सोनिया जी के लिए जान तक दे दूंगा- सलमान खुर्शीद, केंद्रीय कानून मंत्री

केजरीवाल को तो मैं ‘देख लूंगा’ –सलमान खुर्शीद, केंद्रीय कानून मंत्री

पैसे पेड़ पर नही उगते– मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

पूरे देश मे बलात्कार हो रहे हैं- सोनिया गांधी, अध्यक्ष यूपीए

भारत ‘बनाना रिपब्लिक’ है- रॉबर्ट वाड्रा

यूपी के लोग भिखारी होते है- राहुल गांधी

पंजाब के 70% युवा नशेड़ी है- राहुल गांधी

90% बलात्कार तो लड़की की मर्जी से होते है.- धरम वीर गोयत, प्रवक्ता, हरियाणा कांग्रेस

पुरानी पत्नी में वो मजा नहीं रहता- श्रीप्रकाश जयसवाल, केंद्रीय कोयला मंत्री

आर.एस.एस आतंकी संगठन है इसमें लोगो को आतंकवादी और देशद्रोही बनाया जाता है –दिग्विजय सिंह

बलात्कार तो हर जगह होता है – रेणुका चौधरी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता

मंदिर से ज्यादा अहम है शौचालय – जयराम रमेश, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री

बोफोर्स की ही तरह कोयला घोटाला को भी जनता भूल जाएगी –सुशिल कुमार शिंदे, केंद्रीय गृहमंत्री

सूचना का अधिकार का दुरुपयोग रोका जाए- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

(अभिषेक कुमार गुप्ता की फेसबुक वाल से )

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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