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राजस्थान में वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के भाई की हत्‍या…

By   /  October 16, 2012  /  3 Comments

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-कुमार सौवीर||

राजस्‍थान के पाली-मारवाड़ में हुए एक ट्रेन हादसे में मेरे छोटे भाई की हत्‍या हो गयी. 40 वर्षीय सूर्यकांत त्रिपाठी उर्फ अनिल नामक यह मेरा चचेरा भाई था. वह अहमदाबाद से लखनऊ लौट रहा था. सूर्यकांत का अंतिम संस्‍कार कल बुधवार को कानपुर के गंगा नदी के किनारे गंगाघाट में होगा.

खबर के मुताबिक सूर्यकांत एक निजी कम्पनी में काम करता था. काम के सिलेसिले में वह पिछले पांच दिनों से अहमदाबाद में था. 13 तारीख को उसे वापस लौटना था. लौटते समय आरक्षण न मिलने के कारण वह अहमदाबाद-भुज एक्‍सप्रेस से जनरल डिब्‍बे में सवार हुआ. रास्‍ते में उसने लखनऊ, बस्‍ती और गोरखपुर समेत कई रिश्‍तेदारों से बातचीत भी की.

बताते हैं कि जोधपुर के निकट पाली जिले के मारवाड़ जंक्‍शन से आगे बढ़ने के बाद ही इस ट्रेन के जनरल डिब्‍बे में कुछ बदमाशों ने लूटपाट शुरू की थी. उस समय सुबह का तीन बज गया था. अनिल ने लखनऊ रेल में काम करने वाले अपने बहनोई को फोन करते बताया था कि ट्रेन में बदमाश सवार हो गये हैं और लूटपाट कर रहे हैं. अनिल ने अपने बहनोई से आग्रह किया था कि वे फौरन रेलवे पुलिस को इसकी खबर कर दें.

हैरत की बात है कि ट्रेन लूट के इस हादसे की खबर पुलिस को तब ही पता चल सकी, जब अनिल का शव रेल पटरी पर बरामद हुआ. लेकिन इससे पहले कि अनिल पूरी बात कर पाता, उसका फोन अचानक शांत हो गया. लगता है कि शायद बदमाशों ने उसे फोन पर बात करते हुए उसे पीटा और फोन काट दिया. बाद में सुबह अनिल की लाश मारवाड़ जंक्‍शन के आगे जवाली स्‍टेशन के पास रेल पटरी के किनारे बरामद हुई. रक्‍त-रंजित अनिल के शव पर पीटने के निशान थे. बाद में शव की तलाशी में मिले कागजों से अनिल के घरवालों को खबर दी गयी और पोस्‍टमार्टम के लिए शव को भिजवा दिया गया. खबर मिलने पर अनिल के भाई चंद्रकांत त्रिपाठी उर्फ चंदू पाली पहुंचे और शव पुलिस से हासिल किया.

हमारे चाचा ओंकारनाथ त्रिपाठी मूलत बहराइच के प्रयागपुर में वैनी-खुरथुआ के निवासी हैं और बस्‍ती के गौर के कृषक इंटर कालेज में 25 साल पहले सेवानिवृत होकर लखनऊ में रह रहे हैं. मेरे पिता के बाद मेरे परिवार का मुखिया चाचा ही हैं.

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. komal k says:

    it is really a heart breaking news. any sensible person will do the same as ur brother was doing.this incident shows the status of society also. i am pained and my condolences for the departed soul.kk

  2. santosh kumar says:

    पता नहीं इस देश मेंसे कब पापी लोगो का अंत होगा
    भगवन आपके भाई की आत्मा को शांति दे

  3. ashok sharma says:

    आपके दुःख में हम भी शामिल हे भग बान दिब्न्गत आत्मा को शांति प्रदान करे

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