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डीएलएफ़ और वाड्रा के बीच मानेसर डील रद्द करने वाले अफसर अशोक खेमका की जान सांसत में..

By   /  October 16, 2012  /  1 Comment

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा एवं डीएलएफ के बीच हुए भूमि समझौते की जांच का आदेश देने के कुछ घटों के भीतर ही हरियाणा सरकार ने आईजी रजिस्ट्रेशन आइएएस अधिकारी अशोक खेमका का तबादला कर दिया. उधर, अज्ञात लोगों द्वारा खेमका को फोन पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

अशोक खेमका के नजदीकी दोस्त एवं वरिष्ठ वकील अनुपम गुप्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि खेमका को अज्ञात लोगों के फोन कॉल आ रहे हैं और उन्हें अपनी गतिविधियों पर लगाम लगाने को लेकर धमकी दी जा रही है. बात नहीं मानने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है. फोन के माध्यम से यहां तक कहा जा रहा है कि अंडरव‌र्ल्ड के लोगों को उनके नाम की सुपारी तक दे दी गई है.

गौरतलब है कि खेमका ने डीएलफ-वाड्रा के बीच हरियाणा के चार जिलों गुड़गाव, फरीदाबाद, पलवल और मेवात में हुई जमीनों की खरीद-बिक्री की जाच शुरू करवाई थी. उन्होंने 15 अक्टूबर को ही मानेसर-शिकोहपुर की उस साढ़े तीन एकड़ जमीन का म्यूटेशन रद्द किया था, जिसे वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने डीएलएफ को 58 करोड़ में बेचा था. जाच में इस सौदे में अनियमितता पाई गई थी. जमीन डील को रद्द करने वाले दस्तावेज बताते हैं कि जमीन बिक्री के कागजात पर अनधिकृत ऑफिसर के हस्ताक्षर पाए गए हैं. पिछले 21 सालों में खेमका का 40 बार तबादला हो चुका है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. mahendra gupta says:

    यह बहुत ही गलत बात है कि श्री खेमका ने राष्ट्रीय दामाद , या कांग्रेसी दामाद के बारे में ऐसा कदम उठाया.हमारे सारे नेता भी देश के राष्ट्रीय दामाद हैं, अब इनके भी दामादों के खिलाफ कदम उठाने की हिमाकत सहनीय नहीं हो सकती.वैसे भी कल एक कांग्रेसी नेता का बयान पढने को मिला था जिसमें कहा गया था कि नेताओं के रिश्तेदारों के विषय में कदम उठाना या उनके कियेकी पोल न खोलना दलों का एक पारस्परिक शिस्टाचार है और भा ज पा को इस विषय में नहीं बोलना चाहिए.तब अफसरों को बोलने का या उन संबधियों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने का हक़ नहीं है,और यदि वे ऐसा करते हैं तो उनको सजा मिलनी ही चाहिए.

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