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रूमालों वाली मातारानी तनोट माता

By   /  October 17, 2012  /  3 Comments

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रूमालों वाला मन्दिर, हजारों रूमालों में झलकती आस्था 

-चन्दन सिंह भाटी||

जैसलमेर भारत पाकिस्तान सीमा पर स्थित माता तनोटराय के मन्दिर से भला कौन परिचित नही हैं. भारत पाकिस्तान के मध्य 1965 तथा 1971 के युद्ध के दौरान सरहदी क्षेत्र की रक्षा करने वाली तनोट माता का मन्दिर विख्यात हैं. तनोट माता के प्रति आम लोगों के साथ साथ सैनिकों में जबरदस्त आस्था हैं,श्रदालु अपनी मनोकामना लेकर दार्न करने आते हैं. इस मूल मन्दिर के पास में ही श्रदालुओं नें  रूमालों का शानदार मंदिर बना रखा हैं जो देखतें ही बनता हैं.

तनोट माता के मन्दिर की देखरेख ,सेवा तथा पूजा पाठ सीमा सुरक्षा बल के जवान ही करते हैं.इस मन्दिर में आने वाला हर श्रदालु मन्दिर परिसर के पास अपनी मनोकामना लेकर एक रूमाल अवय बांधता है. प्रतिदिन आने वाले सैकडो रदालुओं द्घारा इस परिसर में अतने रूमाल बान्ध दिऐ कि रूमालों का एक भव्य मन्दिर ही बन गया.श्रआलु मनोकामना पूर्ण होने पर अपना रूमाल खोलने जरूर आतें हैं. मन्दिर की व्यवस्था सम्भालने वाले सीमा सुरक्षा बल के एस चौहान नें बताया कि माता के दरबार में आने वाला हर श्रदालु अपनी मनोकामना के साथ एक रूमाल जरूर बांधता हैं40 हजार से अधिक रूमाल बनधे हैं.

व्यवस्थित रूप से रूमाल बान्धने के कारण एक मन्दिर का स्वरूप बन गया है. तनोट माता मन्दिर की ख्याति पिछले पॉच सालों में जबरदस्त बी हैं. तनोट माता के बारे में जग विख्यात हैं कि भारत पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के दौरान सैकडों बम मंदिर परिसर में पाक सेना द्घारा गिराए गये. मगर एक भी बम फूटा नही. जिसके कारण ग्रामीणों के साथ साथ सेना और अर्ध सैनिक बलों के जवान पूर्ण रूप से सुरक्षित रह गये.मन्दिर को भी खरोंच तक नही आई. भारत पाक युद्ध 1965 के बाद तो भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल की भी यह आराध्य देवी हो गई व उनके द्वारा नवीन मंदिर बनाकर मंदिर का संचालन भी सीमा सुरक्षा बल के आधीन है. देवी को शक्ति रूप में इस क्षेत्र में प्राचीन समय से पूजते आये हैं.बहरहाल आस्था के प्रतीक तनोट माता के मन्दिर परिसर में रूमालों का परिसर वाकई दशर्नीय व आकर्षक हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Dhanraj Mali says:

    जय हो माँ तनोटराय जय हो माँ घंटायनि माँ

  2. SALUTE TO CHANDAN SINGH JI FOR GOOD NEWS COVER ABOUT MAA TANOT RAI. JAI HO MAA TANOT RAI.

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