Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

वेब मीडिया के वेश्यालय…

By   /  October 19, 2012  /  11 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

आवेश तिवारी||

हिंदी में न्यूज पोर्टल शुरू करने का काम अपने आप में बेहद जोखिम भरा है, शुरूआती खर्चों की बात दीगर है, अगर आप किसी बड़े अखबार के न्यूज पोर्टल के सापेक्ष अपने पोर्टल को स्थापित करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको अपना घर-बार बेंचना पड़ेगा, या खुलेआम भीख मांगने की नौबत आन पड़ेगी. निश्चित तौर पर तमाम आर्थिक अभाव के बावजूद हिंदी के न्यूज पोर्टलों ने अब तक सम्मान और साहस के साथ काम किया है. बहुत कुछ जो कभी बाजार से जुडी जरूरतों की वजह से चैनलों और अखबारों की सुर्खियाँ नहीं बनता, वेब मीडिया ने उसे जम कर छापा है,  लेकिन अब वक्त बदल रहा है, वेब के उन्नत स्वरुप को देखते हुए तमाम किस्म के बनिए, दलाल और अपराधी इस माध्यम में भी घुस आये हैं, जो वेब मीडिया को तो बदनाम कर ही रहे हैं, समूची पत्रकारिता को शर्मसार कर रहे हैं. इनकी वजह से वेब उस बाजार में तब्दील हो गया है जहां सब कुछ ख़रीदा और बेचा जा सकता है.

अब से थोड़ी देर पहले मेरे एक मित्र ने बनारस के एक अखबार “फास्टन्यूज इंडिया” और उसके पोर्टल के बारे में जानकारी दी, अखबार ठीक –ठाक था लेकिन जब उन्होंने बताया कि उनकी वेबसाईट www.fastnewsindia.net पर पत्रकार बनने के लिए 725 रूपए देकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा तो मेरा माथा ठनका. मैंने पोर्टल देखा तो ख़बरों के स्तर, सरकारी गैर सरकारी विज्ञापनों को देखकर (जो कि आम खबरिया पोर्टलों पर नजर नहीं आता) मैं समझ गया कि इसे चलाने वाले इससे जमकर नोट पीट रहे हैं. इस अखबार और पोर्टल की सम्पादक कोई श्रीमती विजेता द्विवेदी हैं, मैंने पोर्टल पर दिए गए नंबर पर 8542859201 पर काल किया तो किन्ही प्रभाकर द्विवेदी ने फोन उठाया, जो खुद को अखबार का सह सम्पादक बता रहे थे, मैंने खुद को मोनू पांडे बनाकर प्रस्तुत किया जो कक्षा १२ पास है. आप इस पूरी बातचीत को यहाँ सुन भी सकते हैं. इस बातचीत में जो राज खुला वो हैरत में डाल देने वाला है, इस बातचीत से उत्तर प्रदेश की मान्यता समिति, पत्र सूचना पंजीयन कार्यालय भी संदेह के घेरे में आ जाते हैं.

प्रभाकर द्विवेदी से जब मैंने पूछा कि आपके पोर्टल से कैसे जुड़ा जा सकता है तो उन्होंने बताया कि सात बड़े राज्यों में फैले मेरे अखबार से जुड़ने के लिए आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा, इसके लिए आपको एक निःशुल्क फ़ार्म भरना होगा, लेकिन आपको 725 रूपए जमा करने होंगे, जो एक तरह से अखबार का शुल्क होगा, जिसके बदले में हम आपको प्रेस की आईडी और ब्रोशर वगैरह भेजेंगे. उसके बाद आपको अगर प्रदेश सरकार से मान्यता लेनी है तो अपने नीचे 125 लोगों को सदस्य बनाना होगा, और अगर आप राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त पत्रकार बनना चाहते हैं तो आपको 625 लोगों को सदस्य बनाना होगा. सह-सम्पादक द्वारा ये भी बताया गया कि मान्यता के बाद आपको ट्रेन, बस और हवाई जहाज में रियायती दर पर यात्रा करने का लाभ मिलने लगेगा, सिर्फ इतना ही नहीं ये भी जानकार दी गयी कि कई लोग इस अखबार के माध्यम से मान्यता ले चुके हैं.

प्रभाकर द्वारा मुझे बताया गया कि पत्रकार बनने की न्यूनतम योग्यता हाईस्कुल या इंटर पास होना है, लेकिन अगर कोई अच्छी पर्सनालिटी वाला है तो अगर 8 पास क्यों न हो उसे पत्रकार बना दिया जाएगा. जब हमने अखबार के सम्पादक विजेता द्विवेदी से बात कराने का अनुरोध किया तो कहा गया कि अखबार का सारा काम मैं ही देख रहा हूँ मैडम दिल्ली रहती है, 19 को हम लोग एक सेमीनार कर रहे हैं उसमे मैडम से मुलाक़ात की जा सकती है. जब हमने हमने बताया कि मेरे ढेर सारें इतर बेरोजगार हैं तो प्रभाकर द्वारा मुझे ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा, महत्वपूर्ण है कि अखबार के पिछले एक साल के दौरान केवल ५ संस्करण प्रकाशित हुए हैं, जानकारी दी गयी कि जनवरी से वो इसे दैनिक अखबार बना देंगे,तब आपको 1250 रूपए जमा करने होंगे.

प्रभाकर दिवेदी से हुए फोन इन का विडियो..

[yframe url=’http://www.youtube.com/watch?v=AOcm0SACHoo’]

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

11 Comments

  1. Kandi blok k kandi panchayat me shaochaly ka ho rha hai ghathia nirman :-sahiya ka name akhtari bano hai.jisme wo 12000 hajar k jagah 6000 hajar rupay ka hi shochaly bnwa rai hai jise grmin janta khush nahi.!kandi se ugendra singh user id 151042379 fast nesw india

  2. वो अखबार बता दो जो सरकार और सत्ता के खिलाफ लिखने और प्रकाशित करने का माद्दा रखता हो साथ ही संपादक के साथ ही साथ संवाददाताओं की सुरक्षा की गारंटी देता हो. जितनी तनख्वाह उठा रहा हूँ उससे दो हजार रुपये कम पर नौकरी कर लूंगा. मगर शर्त ये होगी की पंद्रह साल की नौकरी की गारंटी होने चाहिए. जेल जाने की गारंटी मेरी और चुनौती उस अखबार के मालिक को की अगर हिम्मत हो तो बचा कर दिखाएँ.

  3. पत्रकार नहीं है यह तो पत्रकार मण्डी का दलाल है.

  4. Punit Shukla says:

    थोड़े दिन बाद शादिया भी चेन सिस्टम से होगी

  5. Punit Shukla says:

    नया घोटाला
    बेरोजगारों के साथ धोखा.

  6. Shekhar Kumar says:

    It is only a chain-mail marketing system which will fail eventually.

  7. TC Chander says:

    भीतर घुसकर देखने पर ही पता चलता है कि छोटे-बड़े तमाम अखबारों में कमोवेश ऐसा ही है, रूप अलग-अलग हैं। राजधानी दिल्ली में भी ‘पत्रकार’ बनाने के कारखाने चल रहे हैं, विभिन्न रूपों में ब्लैक मेलिंग चल रही है। अब आरटीआई नामक हथियार भी हाथ में है…

  8. chai system abhi tak marketing main hoti thi ab journism main bhi?

  9. Ahfaz Rashid says:

    ऐसे ही लुटे पिटे लोगों के कारण पत्रकारिता बदनाम हो रही है. चेन सिस्टम वाली पत्रकारिता का नाम आपके माध्यम से पहली बार जाना.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

राजस्थान के पत्रकार सरकार के समक्ष घुटने टेकने पर विवश हैं..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: