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हिमाचल के चुनाव नतीजे हो सकते है रोचक…

By   /  October 19, 2012  /  No Comments

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पुनर्सीमांकन के बाद हिमाचल विधानसभा चुनाव में लगभग सभी प्रत्याशी चुनावों में असमंजस की स्थिति में.. कुछ को तो मीलों दूर जा कर लडऩा पड़ रहा है चुनाव…

-धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

पुनर्सीमांकन के बाद हिमाचल विधानसभा की सीटें तो अडसत ही रहीं केवल काँगड़ा जिला ·की एक सीट घटा कर कूल्लू जिला में मनाली की नयी विधान सभा सीट बढ़ा दी गयी परन्तु इस सारी कवायद में लगभग तमाम विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में भारी फेर बदल कर दिया गया लिहाज़ा मौजूदा विधायकों में से नब्बे प्रतिशत के मत भूल क्षेत्र उनके हाथों से निकल गए  जिस कारण इस बार के चुनावों ने उनकी जीत के लाले खड़े कर दिए है,  ऊपर से चुनाव आयोग की इस बार गिद्ध नजऱ इतनी पैनी हो गयी है कि पैसा ओर शराब के बूते पर मत बटोर पाना भी नामुमकिन सा लग रहा है पैसा देकर समाचार पत्रों तथा टीवी चैनलों में समाचार लगा कर मतदाता को ठगना भीअब स भब नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग ने बड़ी बड़ी टीमे केवल पेड़ न्यूज़ के लिए रात दिन काम पर नियुक्त कर रखी है इसी तरह उम्मीदवारों द्वारा दी जा रही पार्टियों तथा उनका जनता के समारोहों में जाना भी आयोग ने बंद कर दिया है यहाँ तक कि दशहरा एवं नवरात्री समारोहों में भी उम्मीदवार घुस नहीं सकते  पुनर्सीमांकन के बाद नए इलाकों के नए मतदाताओं कों पटाना तथा आयोग की पाबंदियों में रहना राजनेताओं के लिए रातों की नींद ओर दिन का चैन हराम किये हुए है इस सब पर कुछ बागियों का मैदान में उत्तर कर भाजपा तथा कांग्रेस को घायल कर रहा है.

इन दोनों प्रमुख राष्ट्रिय पार्टियों भाजपा तथा कांग्रेस जो आज़ादी के बाद से हिमाचल में बारी बारी राज़ करती रहीं हैं के लिए बसपा के बाद तृणमूल व एनसीपी का प्रदेश में कदमताल बेचैन करने वाला है कम्युनिस्ट, सपा एवं लोजपा इत्यादि तो पहले से ही यहाँ सत्ता पर काबिज होने के लिए ख्वाब सजाए हुए है

सबसे अधि मुश्किल तो उन नेताओं कों हो रही है जो वर्षों से अपने अपने इलाकों में कद्दावर तो बने हुए है परन्तु पुनर्सीमांकन ने उनसे उनके इलाके ही छीन लिए और उन्हें मीलों दूर जा कर नए तम्बू गाडऩे पड़ रहे है इनमे मौजूदा मुख्यमंत्री धूमल व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र  भी शामिल है धूमल को बमसन क्षेत्र के ख़त्म होने पर हमीरपुर आना पड़ा तो सिंह को रामपुर व रोहरू के आरक्षित होने पर शिमला ग्रामीण में आना पड़ा, धूमल के कारण उर्मिल ठाकुर को हमीरपुर से सुजानपुर जाना पड़ा विद्या स्टोक्स को कुमारसेन की समाप्ति पर फिर थेओग आना पड़ा है  काँगड़ा की थुरल सीट समाप्त होने के काारण रविंदर रवि कों देहरा जाना पड़ा है इसी तरह कांग्रेस के सुधीर शर्मा कों बैजनाथ क्षेत्र के आरक्षित होने पर धर्मशाला से उतरना पड़ा है परागपुर के योग राज तथा कुसु पटी के सोहनलाल कों तो इस सारी कवायद में टिकट से हाथ धोना पड़ा है

ऐसी स्थित में यदि इस बार चुनावों के नतीजे हैरान करने वाले हों तो अचरज नहीं होगा हिमाचल में चुनाव चार नवम्बर को होंगे जबकि नतीजे बीस दिसम्बर को निकलेंगे फिलहाल मतदाता खामोश है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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