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अंजलि दमानिया खुद जमीन घोटाला विशेषज्ञ…

By   /  October 19, 2012  /  2 Comments

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बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर किसानों की जमीन ‘हड़पने’ का कथित राज फाश  करने वालीं अंजलि दमानिया खुद भी इसी तरह के विवाद में घिर गई हैं. इंडिया अंगेस्ट करप्शन (आईएसी) की दमानिया पर आरोप लगा है कि उन्होंने खेती की जमीन खरीदने के लिए खुद को गलत तरीके से किसान साबित किया और बाद में जमीन का लैंड यूज बदलवाकर उसे प्लॉट में तब्दील कर बेच दिया
दरअसल, आईएसी की नई पोस्टर गर्ल अंजली दमानिया का एक परिचय और भी है. वह एसवीवी डिवेलपर्स की डायरेक्टर भी हैं. जिस जगह उन्होंने गडकरी पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है उसी के आसपास दमानिया की भी 30 एकड़ जमीन है. दमानिया ने 2007 में करजत तालुका के कोंडिवाडे गांव में आदिवासी किसानों से उल्हास नदी के पास जमीनें खरीदीं. आदिवासियों से जमीन खरीदने की शर्त पूरी करने के लिए उन्होंने नजदीक के कलसे गांव में पहले से किसानी करने का सर्टिफिकेट जमा किया.

इंडियन एक्सप्रेस में आई रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी 30 एकड़ की जमीन के पास ही दमानिया ने 2007 में खेती की 7 एकड़ जमीन और खरीदी थी, जिसका लैंड यूज बदलकर उन्होंने बेच दिया. करजत के दो किसानों से उन्होंने जमीन लेते वक्त खेती करने का वादा किया था लेकिन बाद में उस जमीन पर प्लॉट काटकर बेच दिए. दस्तावेजों के मुताबिक, रायगढ़ के कलेक्टर ने जमीन का लैंड यूज बदलने की इजाजत दी थी.

इस बारे में प्रतिक्रिया मांगे जाने दमानिया ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘ मैंने 2007 में खेती की जमीन खरीदी थी और इसके बाद रायगढ़ के कलेक्टर ऑफिस में लैंड यूज बदलने के लिए आवेदन किया था. 2011 में इसे स्वीकार कर लिया गया और इसके बाद 37 प्लॉट बेचे गए. मैं इस बारे में सारे दस्तावेज दिखाने को तैयार है. अगर कोई सोचता है कि मैंने कुछ गलत किया है तो फिर लैंड यूज बदलने का सरकार का नियम गलत है.’

यह भी कहा जा रहा है कि पहले दमानिया और गडकरी के बीच अच्छे ताल्लुकात थे, लेकिन प्रस्तावित कोंधवाने डैम में पड़ रही 30 एकड़ जमीन बचाने में गडकरी से ‘भरपूर मदद’ न मिलने की वजह से वह बीजेपी अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल बैठीं. दमानिया ने सिंचाई विभाग को प्रस्तावित डैम को 500 से 700 मीटर स्थानांतरित करने का आग्रह किया ताकि उनकी जमीन बच सके. उन्होंने 10 जून 2011 को लिखी चिट्ठी में कहा, ‘सरकार सर्वे के जरिए जान सकती है कि यहां 700 मीटर के आसपास कोई निजी जमीन नहीं है, केवल आदिवासियों की जमीनें हैं. हमें पूरा विश्वास है वे पर्याप्त मुआवजा देकर अधिग्रहीत की जा सकते हैं.’ उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि यदि उनकी जमीन बच गई तो उनका जीवन बच जाएगा.

आरोप है कि इससे बात न बनने पर दमानिया ने गडकरी से भी पैरवी की चिट्ठी सिंचाई विभाग को लिखवाई, लेकिन यह भी काम न आया. गडकरी की चिट्ठी से भी बात न बनने के बाद दमानिया ने सिंचाई विभाग के घोटाले को उजागर करने की ठान ली लेकिन इसमें गडकरी ने कोई मदद करने से इनकार कर दिया. यहीं से दमानिया की गडकरी से दुश्मनी शुरू हो गई. नए खुलासों से यह सवाल उठने लगे हैं कि दमानिया सरकार की मदद से गडकरी पर किसानों की जमीन हड़पने का आरोप लगा रही हैं, लेकिन उनकी नैतिकता उस समय कहां थी जब उन्होंने अपनी जमीन बचाने के लिए आदिवासियों की जमीनें अधिग्रहीत करने की मांग की.

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. komal k says:

    your report is eye opener. it is not simple but layers are there of part players. thank u. i have seen other reports also . they are also very good. kk

  2. tejwani girdhar says:

    धोटाला विशेषज्ञ हुए बिना कठिन ही होता है घोटाले उजागगर करना, आप जानते हैं कि बडी क्राइम स्टोरीज वे ही क्राइम रिपोर्टर्स कर पाते हैं, जो क्रिमिनल्स के साथ कनैक्शन रखते हैं

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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