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आइडेंटिटी कार्ड और अड्रेस प्रूफ का झंझट नहीं रहेगा…

By   /  October 20, 2012  /  1 Comment

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बैंक अकाउंट खुलवाने, मोबाइल कनेक्शन लेने और इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने में दस्तावेज जमा करने के झंझट से जल्द ही मुक्ति मिलने जा रही है. इन सबके लिए आइडेंटिटी कार्ड और अड्रेस प्रूफ की फोटो कॉपी देने की जरूरत नहीं होगी, बस आपको फिंगरप्रिंट्स देने होंगे.

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने इलेक्ट्रॉनिक केवीईसी तैयार कर लिया है. इसकी वजह से फिंगरप्रिंट्स भर से आइडेंटिटी और अड्रेस प्रूफ का काम हो जाएगा. दरअसल, यह सब कुछ बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए चुटकी बजाते ही संभव हो पाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि अगले महीने सरकार और आरबीआई की ओर से आधार को आइडेंटिटी प्रूफ मानने का नॉटिफिकेशन जारी होने के बाद ई-केवाईसी शुरू हो सकती है. इसलिए आने वाले दिनों में जब बैंक आईडी प्रूफ मांगेंगे तो आपको एक मशीन पर अपना पंजा रखना होगा और इनक्रिप्टेड फॉर्म में सारी जानकारियां खुद-ब-खुद ट्रांसफर हो जाएंगी. एक अधिकारी ने बताया कि इसके बाद फ्रंट डेस्ट को मेसेज आएगा कि सूचनाएं मिल गई हैं और डेटा का मिलान हो गया है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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