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त्यौहारों के मौसम में क्या होगा किंगफिशर एयरलाइंस कर्मियों का…

By   /  October 21, 2012  /  No Comments

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भारी कर्ज में डूबी किंगफिशर पिछले 21 दिन से जारी गतिरोध को सुलझा पाने में विफल रही है। उसके पायलट और इंजीनियर सात माह से वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल पर हैं।इसके अलावा किंगफिशर एयरलाइंस ने कर्मचारियों को मार्च से सैलरी नहीं दी है। नतीजन कर्मचारी बिना सैलरी मिले किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों के नहीं रहने से एयरलाइन की सभी उड़ानें रद्द पड़ी हैं।साथ ही डीजीसीए किंगफिशर एयरलाइंस की सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। कोई भी बैंक किंगफिशर एयरलाइंस को लोन देने के लिए तैयार नहीं है। सभी बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज को एनपीए घोषित कर दिया है। दूसरी ओर जून तिमाही में कंपनी का घाटा पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया है। यानि कंपनी की हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है।

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

दशहरा दिवाली के जश्न के बीच किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस रद्द करके पहले से भुखमरी से जूझ रहे कर्मचारियों के पेट पर लात मार दी भारत सरकर ने! नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने किंगफिश को चेतावनी दी है कि अगर विमानन कम्पनी किंगफिशर अपना संचालन फिर से शुरू करने के संबंध में वाजिब योजना प्रस्तुत करने में असफल रहती है, तो उसका लाइसेंस रद्द हो सकता है। मालूम हो, भारत की प्रीमियम एयरलाइंस में से एक किंगफिशर एयरलाइंस के लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया गया है।भारी कर्ज में डूबी किंगफिशर पिछले 21 दिन से जारी गतिरोध को सुलझा पाने में विफल रही है। उसके पायलट और इंजीनियर सात माह से वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल पर हैं। इसके अलावा किंगफिशर एयरलाइंस ने कर्मचारियों को मार्च से सैलरी नहीं दी है। नतीजन कर्मचारी बिना सैलरी मिले किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों के नहीं रहने से एयरलाइन की सभी उड़ानें रद्द पड़ी हैं।साथ ही डीजीसीए किंगफिशर एयरलाइंस की सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। कोई भी बैंक किंगफिशर एयरलाइंस को लोन देने के लिए तैयार नहीं है। सभी बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज को एनपीए घोषित कर दिया है।

दूसरी ओर जून तिमाही में कंपनी का घाटा पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो गया है। यानि कंपनी की हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है। नागर विमानन मंत्री अजीत सिंह ने शनिवार को कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस को अपनी सेवा फिर से शुरू करने से पहले विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए को सुरक्षित उड़ान परिचालन के संबंध में आश्वस्त करना होगा।सिहं ने संवाददाताओं से कहा, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सुरक्षा कारणों से किंगफिशर एयरलाइन का उड़ान लाइसेंस निलंबित कर दिया। सिंह ने कहा विमानन कंपनी के विमानों का रख-रखाव ठीक से नहीं हो रहा था क्योंकि उसके इंजीनियर हड़ताल पर थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि किंगफिशर को डीजीसीए को उड़ानों के सुरक्षा पहलुओं के बारे में संतुष्ट करना होगा और दोबारा उड़ान शुरू करने से पहले अपने कर्मचारियों की नाराजगी दूर करनी होगी।

भारतीय स्टेट बैंक सहित विभिन्न बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस का उड़ान लाइसेंस निलंबित होने पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि कर्ज की वसूली के लिए कंपनी की संपत्तियों की बिक्री ही अंतिम विकल्प होगा।

कर्मचारियों को तनख्वाह देने के पैसे नहीं। विमानों में ईंधन भरवाने के भी पैसे नहीं। किंगफिशर एयरलाइंस के बारे में जब ये खबर आई, तब सबको लगा था कि विजय माल्या को भला पैसों की क्या कमी?

जाने माने उद्योगपति विजय माल्या के स्वामित्व वाली किंगफिशर का गठन 2005 में हुआ था। अपने गठन के बाद से यह कंपनी लगातार घाटे में चल रही है और आज की तारीख में इसका घाटा बढकर 8 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच चुका है। इसमें 420 करोड़ रूपए का बकाया कर भुगतान भी शामिल था।विमानन कम्पनी किंगफिशर का उड़ान लाइसेंस सस्पेंड होने की खबर पाकर कम्पनी के कर्मचारी सन्न रह गए। कम्पनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह दुखद और आश्चर्यजनक है। हमें उम्मीद है कि प्रबंधन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के साथ मुद्दे को सुलझाएगा और लाइसेंस की पुनर्बहाली कराएगा।

दरअसल किंगफिशर एयरलाइंस को 6 नवंबर तक अपना कारोबार शुरू करने की उम्मीद नहीं है। वहीं किंगफिशर एयरलाइंस ने लॉकआउट 23 अक्टूबर तक बढ़ाया था। किंगफिशर एयरलाइंस में 1 अक्टूबर से लॉकआउट जारी है।एविएशन एक्सपर्ट जिंतेद्र भार्गव का कहना है कि लाइसेंस सस्पेंड होना किंगफिशर एयरलाइंस के लिए राहत की खबर है। किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस रद्द होना खराब खबर होती। डीजीसीए के फैसले से किंगफिशर एयरलाइंस को नोटिस का जवाब देने के लिए और समय मिलेगा।एविएशन सेक्टर एक्सपर्ट हर्षवर्द्धन के मुताबिक, इस साल जनवरी-फरवरी में ही एविएशन सेक्टर इस एयरलाइंस से नाउम्मीद हो गया था और उस वक्त हवाई किरायों में बढ़ोतरी भी हुई थी। लेकिन बीच की अवधि में किंगफिशर की कमी को दूर करने के लिए कई अन्य विमानन कंपनियों की पैसेंजर क्षमता में बढ़ोतरी हुई। इंडिगो ने हाल के महीनों में बड़ी संख्या में नए विमान अपने बेड़े में जोड़े हैं। इसी तरह स्पाइसजेट के विमान भी बढ़े हैं इसीलिए अब डिमांड-सप्लाई के आधार पर तो किराए बढ़ने की गुंजाइश कम है। हर्षवर्द्धन का कहना है कि इसका असर बैंकों पर पड़ेगा। किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंकों का साढ़े सात हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन है और लगभग इतनी ही राशि का घाटा भी है। ऐसे में अगर किंगफिशर डिफॉल्ट करती है तो यह हाल के सालों का सबसे बड़ा डिफॉल्ट का मामला होगा। चूंकि, लोन बैंकों से लिया गया है, इसलिए इस एयरलाइंस की वजह से कई बैंकों की हालत खराब हो सकती है। किंगफिशर को पैसा देने वालों में सरकारी बैंक भी हैं। उनका पैसा डूबने की आशंका पैदा हो गई है। बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की रकम को कैसे वापस लिया जाए।

विमानन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सरकार ऐसी मनमानी स्थिति नहीं चाहती, जिसमें किंगफिशर जब चाहे उड़ानें शुरू करे और जब चाहे बंद करे। उड़ानों का एक सुनिश्चित शिड्यूल होना चाहिए। पिछले 10 महीनों से किंगफिशर की उड़ानें अक्सर अनियमित रही हैं। लाइसेंस निलंबन का मतलब हुआ कि किंगफिशर को तत्काल प्रभाव से उड़ानों की बुकिंग बंद करनी पड़ेगी। निलंबन के दौरान न तो कंपनी के कार्यालय और न बुकिंग एजेंट टिकटों की बिक्री कर सकेंगे। नतीजतन उड़ानें भी नहीं हो सकेंगी।कर्मचारियों, खासकर पायलटों ने स्पष्ट कर दिया कि चार महीने से कम वेतन पर वह उड़ानें नहीं शुरू करेंगे। इसी बीच एयरलाइन प्रबंधन ने डीजीसीए से नोटिस का जवाब देने के लिए और समय मांगा। इसे डीजीसीए ने अस्वीकार कर दिया और लाइसेंस निलंबित करने का निर्णय किया। नियामक ने कहा है कि यदि किंगफिशर प्रबंधन जल्द अपना शिड्यूल नियमित नहीं करता तो लाइसेंस स्थायी रूप से भी रद किया जा सकता है।जून महीने तक करीब 80 इंजीनियर विजय माल्या के नेतृत्व वाली इस एयरलाइन से पल्ला झाड़ चुके थे। वेतन न मिलने के कारण उन्होंने यह फैसला लिया। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि करीब एक हजार करोड़ रुपये के किराए [लीज रेंटल] के भुगतान में चूक के कारण पट्टेदारों ने मार्च और जून के बीच कंपनी से 34 विमान वापस ले लिए हैं। फजीहत से बचने के लिए कंपनी ने कहा है कि उसने यह फैसला खुद से लिया है।एयरलाइन के सूत्रों के मुताबिक, पिछले 4-5 माह के दौरान करीब 60 से 80 इंजीनियरों ने वेतन न मिलने की वजह से कंपनी से इस्तीफा दिया है। कुछ और इंजीनियर भी ऐसा ही करने की तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी ओर किंगफिशर एयरलाइंस की ओर से शुक्रवार को एक बयान में कहा गया कि कर्मचारियों के काम पर नहीं आने के कारण उसे पांच नवंबर तक के लिए आंशिक तालाबंदी का फैसला लेना पड़ा था। लेकिन अब वेतन भुगतान समेत सभी मुद्दों पर कर्मचारियों के साथ हुई सकारात्मक बैठक के बाद ऐसी संभावनाएं बन रही है कि तालाबंदी जल्दी खत्म करके उड़ानें छह नवंबर को बहाल कर दी जाएं।किंगफिशर ने कहा है कि ऐसा तभी संभव है जब डीजीसीए इस संबंध में कंपनी की ओर से मांगी गई योजना रिपोर्ट को मंजूरी दे देता है। वेतन भुगतान नहीं होने की स्थिति में कर्मचारियों और पायलटों के हड़ताल पर चले जाने के कारण कंपनी को एक अक्टूबर से आशिंक तालाबंदी की घोषणा करनी पड़ी थी।

गौरतलब है कि जब सरकार ने प्राइवेट एयरलाइंस को आसमान में उड़ने की मंजूरी दी थी , तो भारतीय मध्य वर्गसे ताल्लुक रखने वाले लाखों चेहरों पर मुस्कान खिल गई थी। उस समय घरेलू उड़ानों पर इंडियन एयरलाइंस की और विदेशी उड़ानों पर एयर इंडिया की मोनोपॉली थी। कई दिनों की अडवांस बुकिंग , भारी – भरकम फेयर और अधेड़ एयरहोस्टेस से पाला पड़ता था। प्राइवेट सेक्टर को मंजूरी मिलते ही एक के बाद एक एयरलाइंस ने इस सनराइज इंडस्ट्री में प्रवेश किया। इस इंडस्ट्री के डिवेलपमेंट की काफी गुंजाइश थी। जेट एयरवेज , सहारा एयरवेज , किंगफिशर , डेक्कन एयरलाइंस , मोदीलुफ्त , स्पाइसजेट आदि के आने से यह इंडस्ट्री न केवल कंज्यूमर फ्रेंडली बन गई , बल्कि इसमें ग्लैमर भी नजर आने लगा।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक उन दिनों एयर होस्टेसों की संख्या कम थी। इसलिए मुंबई ही नहीं , जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में एयरहोस्टेससिलेक्शन सेंटर और अकैडमी खुल गईं। उन्हें आकर्षक सेलरी मिलने लगी। यह प्रफेशन हाई – प्रोफाइल होता गया। किंगफिशर के विजय माल्या खुद एयरहोस्टेस की नियुक्ति करने लगे। पायलटों की डिमांड तेजी से बढ़ी। उनकी पगार कई गुना हो गई। इस इंडस्ट्री में जोरदार तरक्की हुई। किराए कम होने लगे। जो मिडिल क्लास पहले हवाई जहाज से सफर अफोर्ड नहीं कर सकता था , वह अब ट्रेन में चलने के बजाए उड़ने लगा। कई दिन पहले तक बुकिंग करने पर जो टिकिट नहीं मिलता था , वह उड़ान से घंटा भर पहले तक विंडो पर मिलने लगा।

अर्श से फर्श तक
इससे देश में एयरपोर्ट पर भीड़ बढ़ी और उनका विस्तार और ब्यूटीफिकेशन होने लगा। दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट सिंगापुर और शंघाई एयरपोर्ट से टक्कर ले रहा है। सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों को वित्तीय सुविधा मुहैया कराने के लिए विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाकर 49 पर्सेंट तक कर दिया। विमान सप्लाई करने वाली बोइंग और एयरबस कंपनियों को ऑर्डर मिलने लगे। इंडस्ट्री के पोंटेशियल को देखते हुए कई बैंक और वित्तीय संस्थायें लोन देने में आगे आईं। जेट और किंगफिशर ने आईपीओ से धन जुटाया। उनके आईपीओ कई गुना सब्सक्राइब हुए। तमाम एयरलाइंस जमकर पैसा कमाने लगीं।

मगर फिर वक्त ने पलटा खाया। यह बुलबुला अब फूट गया है। भारतीय एयरलाइंस एक के बाद एक भारी – भरकम नुकसान दिखा रही हैं। नुकसान से बचने के लिए वे अपनी फ्लाइट्स को रद्द कर रही हैं , किराए बढ़ा रही हैं और एक ही रूट पर पहले से कम उड़ानें भर रही हैं। लोगों को यह तक नहीं मालूम कि वे जिस फ्लाइट के लिए घर या ऑफिस से निकल रहे हैं , वह उड़ेगी भी या नहीं। केवल किंगफिशर की ही नहीं , जेट एयरवेज की भी यही हालत है। सरकारी क्षेत्र की एयर इंडिया कब बैठ जाए , कहा नहीं जा सकता। वह केवल सरकारी खैरात के सहारे चल रही है।

आखिर यह आफत आई क्यों ? कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में देशभर में ईंधन की कीमतें जिस तेजी से बढ़ी हैं , उसके अनुपात में वे अपना किराया नहीं बढ़ा सकी हैं। इंडिया में एयर फ्यूल चार्ज सबसे ज्यादा है। लैंडिंग चार्ज भी अन्य देशों की तुलना में ऊंचा है। एनालिस्टों के मुताबिक , यही कारण है कि एयर इंडिया सहित सभी कंपनियां नुकसान में चल रही हैं। उनका नुकसान 15 हजार करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें से आधा नुकसान अकेले एयर इंडिया का है।

पिछले साल जेट एयरवेज मुनाफे में थी , लेकिन वह फिर घाटे में आ गई है। इस नुकसान का एक कारण ओवरहैड्स बहुत ज्यादा होना भी है। पायलटों और एयरहोस्टेसों को अनाप – शनाप वेतन और भत्ते दिए गए हैं , जिन्हें कंपनियां अफोर्ड नहीं कर पा रही हैं। मंदी को देखते हुए लग रहा है कि एविएशन सेक्टर का नुकसान 2.5 अरब डॉलर और बढ़ जाएगा। सेन्टर फॉर एशिया – पैसिफिक एविएशन ‘ कापा ‘ के अनुसार , यह नुकसान इस समय 9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस सेक्टर की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि कैप्टन गोपीनाथ द्वारा डेक्कन एयरलाइंस को बेचने के बाद शुरू की गई कार्गो एयरलाइंस एक भी उड़ान भरने से पहले ही बंद हो गई है।

नुकसान का एक बड़ा कारण यह है कि इस सेक्टर में ए 350 जैसे बड़े – बड़े विमान खरीद लिए गए। वर्ष 2004 से 2008 के बीच एयरलाइंस कंपनियों ने अग्रेसिव ढंग से अपनी क्षमता बढ़ाई। इस दौरान जहाजों की संख्या दोगुनी हो गई। ‘ दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर लो ‘ के अंदाज में इंटरनैशनल रूटों पर एयरलाइंस शुरू करने के लिए माल्या ने घाटे में चल रही एयर डेक्कन को 1000 करोड़ रुपये में खरीद लिया , जो काफी ज्यादा राशि थी। बड़े जहाजों की कीमत ज्यादा थी और इनकी लीज राशि भी करोड़ों डॉलर में होती थी।

आप इन्हें उड़ाओ या नहीं , किश्त तो आपको देनी ही पड़ेगी। इसी दौरान लीमन ब्रदर्स ‘ स्कैम ‘ हुआ और पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ गई। जहाज खाली उड़ने लगे , लेकिन उनके खर्च ज्यों के त्यों थे।

यह स्थिति सिर्फ किंगफिशर के लिए नहीं थी , लेकिन अन्य एयरलाइंस ने समझ से काम लिया। जैसे जेट एयरलाइंस के नरेश गोयल ने अपने विमान थाई एयरवेज और टर्की एयरवेज को लीज पर दे दिए , ताकि कुछ न कुछ कमाई होती रहे। स्पाइस जैट और इंडिगो आदि ने अपने खर्चे बचाने के लिए अपने ओवरहैड्स कम कर दिए। जैसे उड़ान के दौरान पानी और खाना देना बंद कर दिया। उनकी उड़ानों के किराए भी अन्य एयरलाइंस से कम थे। किंगफिशर के माल्या ने इन सबसे कोई सबक नहीं लिया।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शनिवार को ऋण संकट में फंसी निजी विमानन कम्पनी किंगफिशर का लाइसेंस निरस्त कर दिया। डीजीसीए का यह फैसला अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। डीजीसीए ने कारण बताओ नोटिस भेजकर किंगफिशर से जवाब मांगा था लेकिन किंगफिशर अपने जवाब से डीजीसीए को संतुष्ट नहीं कर पाई। इसके पहले, किंगफिशर ने अपनी तालांबदी की अवधि को 20 अक्टूबर से बढ़ाकर 23 अक्टूबर कर दिया। एयरलाइन के जवाब पर आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि डीजीसीए इस बारे में विधि विशेषज्ञों से विचार विमर्श कर रहा है कि किंगफिशर के खिलाफ क्या कार्रवाई हो। उसका उड़ान लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जाए।

किंगफिशर एयरलाइंस की सेवा शुरू करने के संबंध में पूछे गए सवाल पर नागर विमानन मंत्री ने कहा, वे हमेशा वापस आ सकते हैं लेकिन जब तक डीजीसीए संतुष्ट न हो वे परिचालन शुरू नहीं कर सकते और उनके पास परिचालन सुरक्षा से जुड़ी ठोस योजना होनी चाहिए। सिंह ने यह भी कहा कि विमानन कंपनी के प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी असंतुष्ट न हों।

किंगफिशर को मिली उड़ान समयसारणी किसी अन्य विमानन कंपनी को प्रदान करने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि इनका आवंटन अन्य कंपनियों को किया जाएगा। किंगफिशर एयरलाइंस पर 8,000 करोड़ रुपए के नुकसान और 7,524 करोड़ रुपए के ऋण का बोझ है। फिलहाल कंपनी के सिर्फ 10 विमान परिचालन की स्थिति में हैं जबकि साल भर पहले उसके पास 66 विमान थे।

डीजीसीए ने विजय माल्या की अगुवाई वाली कंपनी को 5 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था क्यों न उसका उड़ान लाइसेंस निलंबित या रद्द कर दिया जाए, क्योंकि वह अपनी उड़ान समयसारिणी का पालन नहीं कर रही है और बार-बार मनमाने तरीके से उड़ानें रद्द कर रही है।

किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज देने वालों में स्टेट बैंक सबसे आगे रहा है। बैंक के प्रबंध निदेशक एस विश्वनाथन ने कहा कि हम चिंतित हैं क्योंकि हमारा इन घटनाक्रमों पर कोई नियंत्रण नहीं है, हम इस सबके लिये तैयार हैं। हम यदि यह चाहते हैं कि एयरलाइंस उड़ान कार्य शुरू करे और हमारा पैसा लौटाए तो इसके आखिर में इसके लिए भी तैयार है कि एयरलाइन पूरी तरह बंद हो जाए।

स्टेट बैंक का किंगफिशर एयरलाइंस पर 1,500 करोड़ रुपए का बकाया है। कुल 17 बैंकों के समूह का एयरलाइन पर 7,000 करोड़ रुपए का बकाया है। फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम श्रीनिवासन ने कहा कि मार्च तिमाही के दौरान बैंक ने दिये कर्ज के एवज में गैर-निष्पादित राशि (एनपीए) में पूरा प्रावधान कर दिया। बैंक का किंगफिशर पर 80 करोड़ का बकाया है।

विमानन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शनिवार को किंगफिशर एयरलाइंस का उड़ान लाइसेंस निलंबित कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र के एक अन्य बैंक के अधिकारी ने कहा परिसंपत्तियों की बिक्री से वसूली को हम अंतिम विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। हम इससे 15 प्रतिशत तक वसूली हासिल कर सकेंगे। बैंक ने एयरलाइंस को 500 करोड़ रुपया का कर्ज दिया था।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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