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कर्मचारी चयन आयोग की पांच परीक्षाओं में फर्जीवाडा..

By   /  October 21, 2012  /  1 Comment

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बिहार में सरकारी नौकरियों के लिए होनेवाली प्रतियोगिता परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का स्पेशल टास्क फोर्स ने राज फाश किया है. एसटीएफ ने 17 शातिरों को गिरफ्तार किया है, जो राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कर चुके हैं.

एसटीएफ का दावा है कि यह शातिर आयोग के स्ट्रांग रूम का ताला तोड़ कर ओएमआर में छेड़छाड़ करते थे. शनिवार को आइजी (ऑपरेशन) अमित कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पकड़े गये गिरोह के पास से चार लाख चार हजार रुपये नकद के साथ स्कैनर, प्रिंटर व कई परीक्षाओं के प्रमाण पत्र मिले हैं. यह गिरोह पैसे लेकर परीक्षा में सफलता दिलाने का उम्मीदवारों को भरोसा दिलाता था. उन्होंने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर मिली जानकारी के बाद दो दिनों तक एसटीएफ ने कार्रवाई की. गुरुवार की रात दो कारों पर सवार कुछ लोगों को आयोग कार्यालय के पास से गिरफ्तार किया गया था.

पूछताछ के दौरान इन शातिरों ने आयोग द्वारा ली गयी ऑडिटर परीक्षा, जूनियर इंजीनियर परीक्षा, क्लर्क परीक्षा समेत पांच ऐसी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने की बात स्वीकार की है. पूरे मामले को आर्थिक अपराध इकाई थाना को सौंप दिया गया है. प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर उत्तर पुस्तिका को रखनेवाले कमरे के गार्ड पर मिलीभगत होने का संदेह जताया जा रहा है. फिलहाल, आयोग के किसी कर्मचारी या पदाधिकारी को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है.

गड़बड़ी मिली, तो रद्द होगी परीक्षा : अध्यक्ष
पटनाः राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष जेआरके राव ने कहा कि जूनियर इंजीनियर की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षा की सभी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया की वे गहनता से जांच करेंगे. थोड़ी भी गड़बड़ी का संदेह हुआ को परीक्षा को रद कर दिया जायेगा.

एसटीइएफ के पास बरामद नौ  एडमिट कार्ड जिन अभ्यर्थियों के हैं, उनकी कॉपियों की जांच हुई. नौ में चार सफल हुए हैं. 2288 पद के लिए 30 सितंबर, 2012 को हुई परीक्षा में 7800 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. पूजा के बाद रिजल्ट प्रकाशन होना था. उन्होंने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि मूल्यांकन के पहले सभी कॉपियों की स्कैनिंग की गयी थी.

सभी कॉपियों का स्कैन की गयी कॉपी से मिलान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि ऑडिटर की परीक्षा के एडमिट कार्ड बरामद होने की सूचना एसटीएफ ने दी है. हालांकि अभी इसका एडमिट कार्ड आयोग को नहीं दिया गया है. आडिटर की परीक्षा की कॉपी जिस स्ट्रांग रूम में रखी गयी है, उसे अभी तक नहीं खोला गया है. यह स्ट्रांग रूम पुलिस की मौजूदगी में खोला जायेगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. tiwari b l says:

    देश का नैतिक पतन इएस सीमा तक हो चूका है की विश्वाश नाम की ची ही समाप्त हो गए हे कारन देश के राज नेतायो की चरित्क्य चर्ह्चा लूट मार ये सब इएसी गतिविधियों को सहाश देती है ओर्र प्रथिक्मिक शिक्छा मई से चरित्क्य पथाय्क्रिम हतादिये गए है नैतिक शिक्छा का आधार ही समाप्त कर दिया है पारिवारिक परिवेश भी दूषित हो चूका है हर किसी को जल्ल्दी है पैसा वाला बने की परिअर टूट रहे है बड़े परिवार संयुक्त परिवार का आधार ही समाप्त हो चूका है पीडिया भटक गयी है हमें अपनी जेड फ़िर से तलाश नि पड़ेंगी नैतिकता पुरुषार्थ के आधार पर बापस जाना ही पड़ेगा उसी मई से सब ठीक हो कर निकल सकता है

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