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केजरीवाल ने दी मनमोहन सिंह, सोनिया गाधी और राहुल गाधी को बहस के लिए चुनौती

By   /  October 21, 2012  /  1 Comment

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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अरविंद केजरीवाल से  पूछे 27 सवालों पर केजरीवाल ने उन्ही को घेरने की कोशिश करते हुए पहले अपने सवालों के जवाब मांगे हैं. केजरीवाल ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा है कि पहले दिग्विजय उनके सवालों का जवाब दें, उसके बाद वह जवाब देंगे. केजरीवाल ने ट्विट कर कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रॉबर्ट वाड्रा से भी पूछे गए सवालों जवाब चाहिए. केजरीवाल ने दिग्विजय को जनता के सामने तमाम सवालों पर बहस की चुनौती दी है. साथ ही, केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गाधी और राहुल गाधी को भी बहस के लिए चुनौती दी है.

इससे पूर्व केजरीवाल ने कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद [एनएसी] में शामिल होने की न तो कभी उनकी इच्छा रही और न ही उसके लिए उन्होंने कभी किसी से कोई मुलाकात की. उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय की उनको भेजी चिट्ठी ऐसी नहीं है, जिसका जवाब दिया जाए.

केजरीवाल ने कहा, ‘यह पूरी तरह गलत है कि वह एनएसी में शामिल होना चाहते थे. उसमें शामिल लोगों के पास कोई अधिकार नहीं होते और न ही उसमें रहकर सामाजिक कार्य करने का कोई अवसर होता है. यह जरूर है कि एनएसी के सदस्य सोनिया गांधी के साथ चाय पीते हैं, लेकिन मेरी ऐसी इच्छा नहीं है.’ दिग्विजय ने शुक्रवार को केजरीवाल को अहंकार में चूर महत्वाकांक्षी व्यक्ति कहते हुए पत्र लिखा था. इस पर केजरीवाल ने कहा कि वह पत्र इस लायक ही नहीं कि उसका जवाब दिया जाए. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि एनएसी में शामिल होने के लिए केजरीवाल ने सिफारिश के लिए उनसे मुलाकात की थी और उन्होंने इस मामले को आगे भी बढ़ाया था. हालाकि, सोनिया गांधी उसके लिए राजी नहीं हुई थीं.

 

अरविंद पर दिग्गी के सवालों की झड़ी – प्रमुख सवाल 

  • क्या यह सच है कि भारतीय राजस्व सेवा [आइआरएस] में 20 साल की नौकरी में आप कभी दिल्ली से बाहर तैनात नहीं हुए, जबकि इस सेवा में एक जगह तीन साल तैनाती का नियम है?
  • क्या यह सही है कि आपकी आइआरएस पत्नी भी कभी दिल्ली से बाहर नियुक्त नहीं हुई?
  • क्या यह सच है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी पूरा वेतन लेते हुए दो साल के अध्ययन अवकाश पर जाता है, तो वापस आने पर वह भारत सरकार को अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट सौंपता है और आपने अंतरिम रिपोर्ट देते हुए बाद में पूरी रिपोर्ट देने का वादा किया, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है?
  • क्या यह सही नहीं कि सेवा नियमों के मुताबिक एक अधिकारी को अध्ययन अवकाश से लौटने पर तीन साल नौकरी करना जरूरी होता है, जबकि आप डेढ़ साल की नौकरी के बाद बिना स्वीकृत के अनधिकृत अवकाश पर चले गए?
  • क्या यह सही है कि एक बार आपका तबादला चंडीगढ़ हुआ था, लेकिन आप वहां नहीं गए?
  • क्या यह सही है कि आपने स्वैच्छिक सेवानिवृत्त के लिए आवेदन किया था और मंजूरी के बिना अनुपस्थित चल रहे हैं?
  • आइआरएस अधिकारी रहते हुए आपने क्या गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाने के लिए भारत सरकार से स्वीकृत ली थी?
  • क्या यह सही है कि कबीर एनजीओ ने फोर्ड फाउंडेशन से 2005 में 1,72,000 डॉलर व 2008 में 1,97,000 डॉलर प्राप्त किए.
  • क्या यह विदेशी धन भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को लेकर सम्मेलनों, परिचर्चा, सोशल मीडिया अभियान और पर्चो पर खर्च हुआ?
  • क्या आपने नौकरी में रहते हुए इस एनजीओ के लिए विदेशी व निजी चंदा लेने के मामले में अपनी सेवा से जुड़े मंत्रालय से इजाजत ली थी?
  • निजी और कॉरपोरेट कंपनियों से मिले चंदे का ब्योरा आपके एनजीओ के वेबसाइट पर क्यों नहीं है?
  • क्या यह सच है कि आप दो करोड़ का चेक लेकर अन्ना हजारे के पास गए थे, लेकिन उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया, क्योंकि उनका मानना था कि चंदे की रकम ज्यादा थी?
  • अपनी कोर कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा आप पर 20 करोड़ रुपये को अनुचित तरीके से खर्च करने के आरोप का आपने अब तक जवाब क्यों नहीं दिया?
  • लीबिया, ट्यूनेशिया, मिस्र और सीरिया में हुए जनविद्रोह को मदद करने वाला अमेरिकी एनजीओ ‘आवाज’ किस तरह आपके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की मदद कर रहा है?
  • क्या यह सही है कि आपने दिल्ली में तहरीर स्क्वायर जैसे आंदोलन की अगुआई का एलान किया है?
  • क्या यह सही है कि आपने इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नाम पर इकट्ठा किए धन को एनजीओ ‘परिवर्तन’ व ‘पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन’ में ट्रांसफर कर दिया?
  • आपने ‘पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन’ व ‘परिवर्तन’ के लिए धन जुटाने में इंडिया अगेंस्ट करप्शन का सहारा क्यों लिया?
  • क्या यह सही है कि आइएसी के मुंबई समन्वयक मयंक गांधी दक्षिण मुंबई के पुनर्विकास प्रस्ताव में खुद भी शामिल रहे हैं?
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Ak Jain says:

    why kejriwal should reply to corrupt pliticians….

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