Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

संघ ने मोदी की रेल पटरी से उतारी..

By   /  October 23, 2012  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

जैसा कि कुछ दिनों पहले वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर सिंह ने लिखा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी की बजाय नितिन गडकरी को प्राथमिकता देगें. इसके ठीक तीन दिन के भीतर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को संघ समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [राजग] ने ही करारा झटका दे दिया है. आरएसएस ने उनकी प्रधानमंत्री पद की दावेदारी खारिज कर गडकरी के लिए रास्ता साफ़ कर दिया है.

पार्टी में रायशुमारी के बाद संघ ने यह फैसला किया है. संघ के मुताबिक मोदी का नाम पीएम पद के लिए आगे करने से उसे नुकसान हो सकता है और भ्रष्टाचार और महंगाई का मुद्दा उनके सामने खत्म हो सकता है.

संघ के इस फैसले के पीछे कई वजह बताई जा रही हैं. मोदी के पीएम पद की दावेदारी पर जहां कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां भाजपा को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर घेर सकती हैं, वहीं राजग के कुछ घटक दल उससे दूर भी जा सकते हैं. वैसे भी जदयू पहले ही साफ कर चुका है कि वह नरेंद्र मोदी को बतौर प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं कर सकता है, भले ही उसको राजग का साथ छोड़ना पडे.

इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पिछले कई दिनों से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बात कर रहा था. इसकी कमान संघ के भैयाजी जोशी और सुरेश सोनी के हाथों में थी. इन्होंने भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली से बात की थी.

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी रविवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने नागपुर गए थे.

यहाँ हम एक बार फिर दर्ज करवा देना चाहेंगे कि चंद्रपुर में भागवत परिवार और उनके रिश्तेदारों में कई को गडकरी से मोटा मोल बतौर चढ़ावा हासिल होता रहता है, एक प्रमुख रिश्तेदार गडकरी की कंपनी में बतौर निदेशक भी शामिल है, जाहिर तौर पर भागवत अगर गडकरी के लिए कथा बांच रहे हैं और प्रचारकों को गडकरी प्रसाद बांट रहे हैं तो उसकी अहम वज़ह वही रिश्तेदार हैं, जिनके बग़ैर संघ की भागवत कथा पूरी नहीं होती. तो रहिए तैयार, बेदाग, बहुचर्चित गडकरी देश के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी बनेंगे.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Gyan says:

    द्वेष व लज्जपुरण लेख |

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

भाजपा के लिए चित्रकूट ने किया संकटकाल का आग़ाज़..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: