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सेना के 6 कमांडरों ने सौ करोड़ का नुकसान पहुँचाया…

By   /  October 25, 2012  /  1 Comment

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रक्षा मंत्रालय की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट के ज़रिये राज फाश हुआ है कि दो हज़ार नौ से लेकर दो हज़ार ग्यारह के बीच सेना के छह कमांडरों ने खरीददारी में सेना को 100 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा दिया.

ऑडिट 2009-11 के बीच की अवधि के लिए किया गया है. इसके बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सेना के खर्च पर सख्ती से निगरानी के निर्देश दिए हैं. इस बीच सेना ने दावा किया है कि 100 करोड़ रुपए का नुकसान खरीदी में हुआ है. इसमें किसी भी तरह के नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है. रक्षा मंत्रालय ने कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (सीडीए) को सेना के कमांडरों द्वारा खर्च की गई राशि का ऑडिट करने करने के निर्देश दिए थे. कमांडरों को सैन्य सामान की फौरी खरीद के लिए 125 करोड़ रुपए तक की राशि खर्च करने का अधिकार होता है. शेष पेजत्न४

मंत्रालय ने इसी मद की ऑडिट कराई है.

ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2009 से 2011 के बीच विभिन्न कमान द्वारा किए गए ऐसे 55 खर्च की पड़ताल का ब्योरा है. इस दौरान मौजूदा सेना प्रमुख जनरल बिक्रम कोलकाता की इस्टर्न कमान के मुखिया थे. इस बीच रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सेना के सभी विभागों में खर्च के मामले में निगरानी पर जोर दिया जा रहा है. उन विभागों में ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है जहां ऑडिट की व्यवस्था नहीं रही है. इसके लिए कुछ ऑडिटरों की भी नियुक्ति की जा रही है.

कैसी-कैसी गड़बड़ी 

– रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ उपकरण ग्रे मार्केट से खरीदे गए हैं. इनमें चीनी संचार उपकरण भी शामिल है.

– उत्तरी कमान में दूध खरीदी में गड़बड़ी उजागर हुई है.

– पूर्वी कमान ने विदेश से दूरबीन खरीदने में अधिक पैसे खर्च किए गए. जबकि वही सामान भारतीय बाजार में सस्ते में उपलब्ध था.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Bas Inhi par to bharosa tha inhone bhi lut liya.

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