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इन सवालों से मुंह क्यों चुरा रहे हैं जिंदल और चैनल…

By   /  October 26, 2012  /  3 Comments

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-सतीश मिश्रा||
25 अक्टूबर की शाम से देर रात तक जिंदल ग्रुप का स्टिंग आपरेशन खबरिया चैनलों पर ‘दिमागी बुखार’ की तरह हावी रहा. कुछ खबरिया चैनलों पर तो बाकायदा निष्पक्ष और निष्कलंक पत्रकारिता का
सबसे ऊंचा झंडा लेकर पत्रकारिता के महान मानदंडों के भजन जोर-शोर से गाये गए. खबरिया चैनलों की ऐसी भजन मंडली उस IBN7 पर भी डटी दिखाई दी जिस IBN7 ने जुलाई 2008 में कैश फार वोट का स्टिंग आपरेशन करने के बाद और बावजूद उसे दिखाने से इनकार कर दिया था. बाद में पूरे देश में हुई थू-थू के बाद उसे कांट छांट के दिखाया था.  1.76 लाख करोड़ के 2G घोटाले की सुपर दलाल नीरा राडिया के साथ जिस NDTV की बरखा दत्त के सियासी सौदागरी वाले प्रेमालाप उजागर करने वाली दर्जनों वार्ताओं के टेप पूरे देश ने सुने उस NDTV पर भी निष्पक्ष और निष्कलंक पत्रकारिता के महान मानदंडों के भजन जोर-शोर से गाये गए.
दरअसल इन खबरिया चैनलों पर वृहस्पतिवार की शाम को सजी इन पत्रकारीय “भजन संध्याओं” का उद्देश्य देश का ध्यान उन सवालों से हटाना था जिन सवालों को खुद नवीन जिंदल की मूर्खतापूर्ण सफाई ने ही जन्म दे दिया है. अब नवीन जिंदल चाहे जो सफाई दे रहे हों लेकिन खुद उनके द्वारा किये गए स्टिंग आपरेशन से ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि जिंदल ग्रुप Zee News को 20 या 25 करोड़ तक देने को तैयार था जबकि चैनल के दलाल 100 करोड़ पर अड़े थे.
आखिर जिंदल की कम्पनी 25 करोड़ देने के लिए क्यों तैयार थी…?
क्या कारण है कि 17 सितम्बर को स्टिंग आपरेशन करने के बाद पुलिस में रिपोर्ट लिखाने में जिंदल को 15 दिन लग गए…? और मीडिया को उस स्टिंग की जानकारी देने में सवा महीने क्यों लग गए?
इस दौरान नवीन जिंदल क्या कर रहे थे? क्या उन 15 दिनों और सवा महीनों में जिंदल महाशय अपने ‘रेट’ पर सौदा पटाने की कोशिशें नहीं कर रहे थे?
क्योंकि कोई भी पाक-साफ़ शरीफ और ईमानदार व्यवसायी-उद्योगपति खुद को मिल रही ऎसी किसी धमकी के बाद जब ऐसा कोई स्टिंग आपरेशन करता तो तत्काल उसको लेकर पुलिस और मीडिया के पास जाता लेकिन नवीन जिंदल ने ऐसा कुछ नहीं किया था और चुप्पी साधे रहे थे. आखिर क्यों…?
लेकिन आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि आज लगभग सभी प्रमुख चैनलों ने नवीन जिंदल से सवाल-जवाब के अपने पत्रकारीय पाखंड के दौरान नवीन जिंदल से ऐसे कठिन-कठोर सवाल नहीं पूछे और पत्रकारिता के महान मानदंडों के सबसे बड़े उपदेशक की तरह जिंदल के प्रवचनों को दिखाते रहे.

दरअसल वास्तविकता यह है कि, Zee News के खिलाफ जिंदल के इस स्टिंग आपरेशन से Zee News के बहाने  खबरिया चैनलों की कार्यशैली और करतूतें तो उजागर हुई ही साथ ही साथ ही खबरिया चैनलों का घृणित चेहरा और घटिया चरित्र भी एक बार फिर बुरी तरह बेनकाब हुआ है. अपने बचाव के लिए कराये गए स्टिंग आपरेशन के सहारे दी गयी जिंदल की सफाई ने खुद उनको और खबरिया चैनलों को भी संगीन संदेहों के कठोर कठघरे में खड़ा कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि जिन तारीखों में स्टिंग आपरेशन करने की बात खुद जिंदल कर रहे हैं, उन तारीखों के बाद से मीडिया से, विशेषकर खबरिया चैनलों से कोयला घोटाला और खासकर उसमें नवीन जिंदल की विशेष भूमिका का मुद्दा बिलकुल गायब हो गया था. अतः क्या यह संभव नहीं है कि, 25 करोड़ का जो सौदा Zee News को नहीं लुभा पाया था वो सौदा औरों को बहुत भा गया था..?
सस्ती फूहड़ सनसनीखेज पीत पत्रकारिता की सारी हदें लांघने को आतुर ऐसे खबरिया अड्डों के चाल-चरित्र और चेहरों पर ये सवाल आज शेषनाग की भांति फन काढकर  खड़ा हो गया है और देश आज इसका जवाब चाह रहा है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. inki jach kon karyga ab chor hay……………../.

  2. jabab day v nahai saktay hay……………../

  3. good news…………../.

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