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जयललिता उभरी, कांग्रेस निखरी, ममता उमड़ी

By   /  May 14, 2011  /  No Comments

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कर्ज का जाल हटाना प्राथमिकता:- कानून-व्यवस्था बहाल करना मेरी सरकार का शीर्ष एजेंडा होगा। तमिलनाडु इस समय कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है। राज्य पर एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। प्रदेश का पुनर्निर्माण मेरी प्राथमिकता होगी। बीते पांच सालों में तमिलनाडु पूरी तरह बर्बाद हो गया है। यहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है… श्रीलंका में तमिलों की हत्या के लिए केंद्र सरकार को श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को ‘युद्ध अपराधी’ घोषित करना चाहिए।  -सुश्री जयललिता, अन्नाद्रमुक प्रमुख एवं तमिलनाडु की भावी मुख्यमंत्री

आर्थिक विकास की जीत:- यह आर्थिक विकास की जीत है। लोगों ने हमें हमारे काम का इनाम दिया है। हमारी लड़ाई भ्रष्टाचार से भी है। देश में हमारी एकमात्र सरकार है जिसने भ्रष्टाचार के दस मामले सीबीआई को सौंपे हैं।    -तरुण गोगोई, मुख्यमंत्री, असम

मां, माटी, मानुष की जीत:- तृणमूल कांग्रेस को मिली यह जीत मां, माटी और मानुष की जीत है। हम राज्य के लोगों को अच्छी सरकार देंगे। तानाशाही और शोषण खत्म होगा। यह वर्षों से दमन के शिकार लोगों की जीत है। मैं कांग्रेस और एसयूसीआई को सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित करती हूं।

मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का धन्यवाद अदा करती हूं। दोनों नेताओं ने मेरी जीत पर खुशी जाहिर की है। मैं उनकी शुक्रगुजार हूं।    -ममता बनर्जी  तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की भावी मुख्यमंत्री

कांग्रेस को जवाब:-
यह प्रदेश के लोगों की जीत है। लोगों ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। -एन. रंगास्वामी, एनआर कांग्रेस प्रमुख और पुदुचेरी के भावी मुख्यमंत्री

जीत उम्मीद के अनुरूप नहीं:-
यह जीत उम्मीद के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस नीत फ्रंट विचार करेगी कि कमी कहां रही। मुख्यमंत्री अच्युतानंदन और सीपीएम नेताओं ने जो झूठे आरोप लगाए, उनका चुनावी नतीजों पर असर पड़ा है।   -ओमन चांडी कांग्रेस नेता

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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