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नितिन गडकरी के फंसने पर विपक्ष के जो दांत टूटे तो अब कांग्रेसी सीनाजोरी का आलम देखिये!

By   /  October 29, 2012  /  No Comments

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आम आदमी की ऐसी तैसी करते हुए आर्थिक सुधारों और पूंजीपतियों को राहत देने के एजंडे पर मजबूती से कायम हैं काग्रेस की यह सरकार.न घोटालों की परवाह और न ही राहुल की सलाह, भ्रष्ट चेहरों की वापसी और प्रोमोशन से साफ जाहिर है कि उद्योग जगत और कारपोरेट लाबिंग को साधने के नजरिये से हो गया यह फैरबदल. जब हमाम में सारे के सारे नंगे हो तो शर्म कैसी और लिहाज किसका?

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

नितिन गडकरी के फंसने पर विपक्ष के जो दांत टूटे तो अब कांग्रेसी सीनाजोरी का आलम देखिये! भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे सलमान खुरशीद विदेश मंत्री बना दिये गये गोया कि भारतीय राजनय में नैतिकता किस काम की?आईपीएल कारनामे के लिए बाहर किये गये शशि थरूर ससम्मान वापस आ गये. आंध्र से छह छह मंत्री ले लिये गये.जाहिर है कि जगन मोहन रेड्डी की लोकप्रियता को कमजोर करने की कोशिश की जाएगी बाकी राज्यों की कीमत पर. बंगाल के छह के बदले तीन मंत्री बनाये गये और खास तौर पर ममता विरोधी बतौर चर्चित और विवादास्पद अधीर चौधरी और दीपा दासमुंशी को मंत्री बना दिया गया. अगर युवा चेहरा चाहिए था तो मौसम बेनजीर नूर की जगह डालू मियां  एएच खान चौधरी को क्यों लिया गया? जबकि सबसे युवा अगाथा संगमा की जगह खाली हो गयी. इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में पंचायत चुनाव होने वाले हैं और ममता कांग्रेस को हाशिये पर डालने की कोशिश कर रही है. ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के गठबंधन ने डेढ साल पहले वाम मोर्चा सरकार को उखाड फेंका था. 74 वर्षीय खान चौधरी मालदा दक्षिण क्षेत्र से सांसद हैं. अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर और दीपा रायगंज से सांसद हैं.चार नामों पर चर्चा की गयी थी जिनमें प्रदीप भटटाचार्य का नाम भी शामिल था लेकिन वह पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद का भार संभालेंगे. अब तक पश्चिम बंगाल से एकमात्र कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी सरकार में मंत्री थे जो इस समय देश के राष्ट्रपति हैं. युवा चेहरों का आलम तो यह है कि त्यागपत्र देने वाले मंत्रियों की जगह नये मंत्रियों की औसत आयु महज दो साल कम है. तो यह है राहुल बाबा की युवा टीम जिसकी बदौलत कांग्रेस उग्र हिंदुत्व को सत्ता में आने से रोकना चाहती है. प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री से लेकर सरकारी दामाद तक के आरोपों के दलदल में फंस जाने के बाद घोटालों से निजात पाने की गरज  ही नहीं दिखी. भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं है और नई बोतल में पुरानी शराब पेश करके नशे का इंतजाम किया गया है. बड़ा सवाल यह है कि इस बड़े बदलाव को आप किस-किस रूप में देखते हैं? सरकार की साख बचाने की कवायद के रूप में, कांग्रेस के जनाधार को बढ़ाने की कवायद के रूप में या फिर राहुल गांधी को प्रतिष्ठापित करने की कवायद के रूप में.सरकार पर आम आदमी का भरोसा भी डगमगाया है. चूंकि सरकार कांग्रेस नीत यूपीए की है इसलिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को जो जन समर्थन हासिल था, उसमें भी कमी आई है और ये सब हालात पैदा हुए हैं महंगाई तथा भ्रष्टाचार की वजह से, कांग्रेसी नेताओं के बड़बोलेपन से. तो फिर क्या लगता है, सरकार का चेहरा बदल देने से या फिर कांग्रेस संगठन में बदलाव कर देने से जो साख बीते तीन साल में गिरी है, एक साल में उसकी भरपाई हो जाएगी? इस बदलाव का असली चेहरा सामने आया तो `खोदा पहाड़ निकली चुहिया` वाली कहावत एक बार फिर साबित हो गई. इस बदलाव से कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि मिशन-2014 को लेकर महंगाई, भ्रष्टाचार और गिरती साख को लेकर सरकार गंभीर है या संवेदनशील है.अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की नीति जगजाहिर हो चुकी है. देश की जनता महंगाई कम होने की उम्मीद इनसे नहीं कर सकती.जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो उनको मंत्रिमंडल में शामिल करने या नहीं करने को लेकर खूब अटकलें लगाई जा रही थीं. अंत में कहा गया कि राहुल कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे और केवल अनुभवी परामर्शदाता की भूमिका निभाएंगे.

कांग्रेस ने सोच-समझकर आरोपी मंत्रियों के मंत्रालयों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है. साथ ही ऐसा करके उसने विरोधी दलों को संकेत भी दिया है कि वह भ्रष्टाचार के मुद्दों पर अड़ियल रवैया अपनाएगी. यही वजह है कि तमाम कयासों के बावजूद कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के पास कोयला मंत्रालय बना रहने दिया गया है. कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग की रिपोर्ट आने के बाद जायसवाल पर कई आरोप लगे थे. सलमान खुर्शीद पर भी जाकिर हुसैन ट्रस्ट मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. टीम केजरीवाल ने खुर्शीद की पत्नी के एनजीओ पर कई आरोप लगाए हैं, लेकिन सरकार ने खुर्शीद को हटाने के बजाय उनका कद बढ़ा दिया है. खुर्शीद को देश का नया विदेश मंत्री बनाया गया है. इसी तरह से एक और विवादास्पद मंत्री कपिल सिब्बल से भले ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ले लिया गया है, लेकिन वह संचार मंत्रालय का पदभार संभालते रहेंगे.गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट पर 71 लाख रुपये के घपले का आरोप लगाया था. 71 लाख रुपये का अनुदान लेने के बाद भी बिना कैंप लगाए सामाजिक न्याय मंत्रालय को बताया गया कि सब कुछ ठीक है.

आम आदमी की ऐसी तैसी करते हुए आर्थिक सुधारों और पूंजीपतियों को राहत देने के एजंडे पर मजबूती से कायम हैं काग्रेस की यह सरकार.न घोटालों की परवाह और न ही राहुल की सलाह, भ्रष्ट चेहरों की वापसी और प्रोमोशन से साफ जाहिर है कि उद्योग जगत और कारपोरेट लाबिंग को साधने के नजरिये से हो गया यह फैरबदल. जब हमाम में सारे के सारे नंगे हो तो शर्म कैसी और लिहाज किसका?

सरकार का चेहरा बदलने के बाद अब कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की बारी है. कांग्रेस में राहुल गांधी की बड़ी भूमिका तय होने में अब देर नहीं है. संभावना उनको कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की है. सरकार से बाहर हुए कांग्रेसी नेताओं के नए दायित्व भी तय किए जाने हैं. सब कुछ ठीक रहा तो यह हफ्ते भर के भीतर हो सकता है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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