/अरविंद केजरीवाल की रैली में पत्थरबाजी..कथित सौदेबाजी संबंधी एक सीडी जारी…

अरविंद केजरीवाल की रैली में पत्थरबाजी..कथित सौदेबाजी संबंधी एक सीडी जारी…

केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की रैली के पहले यहां इंडिया अगेंस्ट करप्शन [आइएसी] और कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. इस दौरान न सिर्फ आइएसी एवं कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई बल्कि पत्थरबाजी भी की गई. इस दौरान कई लोग घायल भी हुए. वहीं टीम केजरीवाल की कोशिशों को नाकामयाब करने के लिए सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट ने एक नई चाल चली. जाकिर हुसैन ट्रस्ट द्वारा आइएसी की रैली को रद्द करने की कथित सौदेबाजी संबंधी एक सीडी जारी की गई है. सीडी में खुर्शीद की पत्‍‌नी लुइस और आइएसी के स्थानीय संयोजक के बीच इस बारे में हुई कथित बातचीत का टेप है.

सलमान खुर्शीद के खिलाफ उनके संसदीय क्षेत्र फर्रुखाबाद में ही मोर्चा खोलते हुए आइएसी के वरिष्ठ सदस्यों ने कांग्रेस व खुर्शीद के खिलाफ जमकर हमला बोला. इस दौरान आयोजित रैली में आइएसी के वरिष्ट सदस्य मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, विकलांगों को उनकी जरूरत का उपकरण उपलब्ध कराने को लेकर जो घोटाला किया गया उस बारे में आइएसी के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है. उन्होंने कहा कि वे विकलांगों को उनका हक दिलाकर रहेंगे.

इस अवसर पर आइएसी के सदस्य कुमार विश्वास ने भी कांग्रेस पर हल्ला बोलते हुए कहा, खुर्शीद एवं उनके परिवार के सदस्यों ने जिस तरह के भ्रष्टाचार किए है उसको लेकर आइएसी मोर्चा जारी रखेगा.

इससे पहले फर्रुखाबाद जाते वक्त इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य अरविंद केजरीवाल का जिले में कई जगहों पर जोरदार स्वागत हुआ. लेकिन फर्रुखाबाद के केजरीवाल का कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया. दूसरी ओर कन्नौज में केजरीवाल के काफिले को काले झडे दिखाने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने खदेड़ दिया. गुरसहायगंज और समधन में काग्रेसियों के प्रदर्शन की भनक लगने पर पुलिस ने ऐन वक्त पर केजरीवाल के काफिले का रूट बदल दिया. रूट बदलने की जानकारी होने पर काग्रेसी मलिकपुर पहुंच गए. रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के कारण केजरीवाल के काफिले में शामिल आईएसी कार्यकर्ता और काग्रेसी आमने-सामने आ गए. दोनों ओर से जोरदार नारेबाजी होने लगी.

माहौल ज्यादा तल्ख होता उससे क्रॉसिंग खुलते ही पुलिस केजरीवाल के काफिले को आगे बढ़ा दिया. काग्रेसियों ने पीछा करने की कोशिश की तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करके उन्हें पीछे खदेड़ दिया. इसके लिए अरविंद ने विकलांगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में यहां पहुंचने का आह्वान किया है. वहीं सलमान खुर्शीद और उनके समर्थकों ने भी इस रैली को लेकर अपनी कमर कस ली है. उधर प्रशासन भी किसी अनहोनी की आशंका के बीच पूरी तरह मुस्तैद है. पुलिस ने सुरक्षा के यहां पुख्ता इंतजाम किए हैं. रिलायंस इंडस्ट्री के मुकेश अंबानी पर आरोप लगाने के बाद अब एक बार फिर केजरीवाल के निशाने पर खुर्शीद हैं. सवालों और जवाबों की जंग के बीच आज की यह रैली बेहद अहम मानी जा रही है.

यह पहला मौका है जब अरविंद केजरीवाल अपने समर्थकों के साथ किसी सांसद के खिलाफ उनके ही संसदीय क्षेत्र में रैली कर रहे हैं. अरविंद ने खुर्शीद के ट्रस्ट पर विकलांगों को दिए जाने वाली सुविधाओं के नाम पर सरकारी धन हड़पने का आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि खुर्शीद ने विकलांगों को सुविधाएं देने के नाम पर सत्तर लाख रुपये हड़प लिए, जबकि उनके द्वारा सौंपी गई सूची में कई नाम फर्जी हैं तो कई गांवों के नाम ही जिले की सूची से गायब हैं.

इस इलाके में ‘खुला खेल फर्रुखाबादी’ का जुमला बड़ा पुराना है, लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत गुरुवार को आवास विकास मैदान में होने जा रही इंडिया अगेंस्ट करप्शन आइएसी की रैली के मद्देनजर दोनों पक्ष अपनी रणनीति को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं. विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के चुनौती वाले गढ़ में आइएसी समर्थक किसी भी तरह अरविंद केजरीवाल की जिद पूरी करने में अपनी ताकत लगाये हैं, जबकि कांग्रेसी भी जवाब में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखने देना चाहते. सियासी दांव-पेंच के इस जंग में आम जनता को सिर्फ ‘शो’ का इंतजार है.

रैली की पूर्व संध्या पर जहां केजरीवाल और सलमान समर्थक अपनी रणनीति को अंतिम मुकाम देने में जुटे रहे, वहीं पुलिसिया अमला सुरक्षा की बारीक पड़ताल में जुटा रहा. रोजमर्रा की जरूरतों से जूझ रहे आमजन को रैली के बारे में भले बहुत कुछ पता न हो, लेकिन विकलांगों की बैसाखी का हिसाब मांगने का अंदाज जरूर देखना चाहते हैं. फर्रुखाबाद में हर जुबान पर बस केजरीवाल और सलमान हैं. लोगों ने फर्रुखाबाद में कभी इस तरह का माहौल नहीं देखा. बुधवार को कांग्रेसियों ने केजरीवाल के कर्ताधर्ता लक्ष्मण सिंह के खिलाफ एक सीडी जारी कर भी अपना माहौल बनाने का प्रयास किया.

सलमान खुर्शीद की केजरीवाल को फर्रुखाबाद से वापस न लौटने देने की चुनौती और केजरीवाल की रैली करने की जिद की समीक्षा भी खूब हो रही. बात उठी तो यहां के जाने माने साहित्यकार शिवओम अंबर बोले सलमान साहब का आपा खोना खल गया, लेकिन वह उनकी एक क्षण की कमजोरी थी. पर केजरीवाल की बातें अतिवादी हैं. फर्रुखाबाद के तमाशों में भीड़ जुटती है और हो सकता है कि केजरीवाल का तमाशा देखने लोग जुटें, लेकिन इसे कोई गंभीरता से नहीं लेगा.

आवास विकास के मैदान में रैली के इंतजाम में जुटे केजरीवाल के सहयोगी लक्ष्मण सिंह का तेवर देखने लायक था. लक्ष्मण ने मैदान की ओर इशारा कर कहा, एक भी इंच जगह नहीं बचेगी. और अब यहां की जनता ही भ्रष्टाचार का मजा चखायेगी. अर्थशास्त्री एमएस सिद्दीकी इस संवेदनशील माहौल पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं, लेकिन इतना जरूर कहते कि किसी को भी अति करने की छूट नहीं होनी चाहिए.

(जागरण)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.