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निकाह के नाम पर सेक्स स्लेव्स बनाने का धंधा…

By   /  November 3, 2012  /  4 Comments

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आईबीएन7 के आशीष पाण्डेय ने हैदराबाद में ऐसे गिरोह का राज फाश किया है, जो गरीब और मासूम लड़कियों को फंसा कर निकाह के नाम सेक्स स्लेव बना रहें हैं. जानिए पूरा माज़रा खुद आशीष पाण्डेय के ज़रिये..

 

निजाम के जमाने में अपनी शान-शौकत और तहजीब के लिए मशहूर पुराना हैदराबाद. एक अरसे से सऊदी अरब के शेखों की आरामगाह के बतौर बदनाम हैदराबाद जहां शेख आते और ग़ुरबत में जीती नाबालिग लड़कियों को साथ ले जाते, कानून ने सख्ती की, तो शेखों के दौरे घटने लगे, लेकिन पैदा हो गए नए दलाल, शिकार वही था. सिर्फ जाल बदल गया. पाक रिश्तों पर मोहर लगाने वाला शब्द ‘निकाह’ यानि शादी का कानूनन तरीका, लेकिन उसे इस मंडी ने नया नाम दिया ‘कॉन्ट्रेक्ट मैरिज’ यानि ग्राहकों की जरूरत और मर्जी तक चलने वाली शादी.

खास बात ये कि अपनी जिंदगी के सुनहरे तार बुन रही कुंवारी लड़की को अक्सर भनक तक नहीं लगती कि कुछ महीने या शायद साल तक बेगम बनने के बाद उसे तलाक देकर गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया जाएगा.

ये हकीकत नर्क से भी बदतर है, जहां गढ़े जाते हैं, बुने जाते हैं कागजी निकाह और निकाह के कानूनी रास्ते से पेश किए जाते हैं सेक्स स्लेव. पुराने हैदराबाद इलाके में काजी मोहम्मद अजमतुल्लाह शाह सूफी जाफरी मिले. उनको हमने मकसद बताया तो उन्होंने फौरन कॉन्ट्रेक्ट मैरिज के लिए हामी भर दी. काजी के मुताबिक वो शादी करवा देगा. काजी के राजी होते ही जब लड़कियों और उनके घर वालों से मिलने की इच्छा जताई गई तो वो इसके लिए भी तैयार हो गया.

जब कॉन्ट्रेक्ट मैरिज पर आने वाले खर्च की बात की तो काजी ने धंधे का रिवाज बताया. काजी ने मेहर की रकम की बात बताई. अनमैरिड बच्ची रही तो 4 लाख- 5 लाख. काजी ने बताया कि असल में घरवालों को कभी पता नहीं चलता कि उनकी बेटी की शादी सिर्फ 6 से 8 महीने की मेहमान है यही नहीं तलाक के बाद भी उन्हें ये कभी पता नहीं चलेगा. इसका इंतजाम किया जाता है. इसके बाद काजी ने लड़कियों की रेटलिस्ट पेश की.

काजी ने बताया कि अनमैरिड के लिए 5 लाख, अगर शादीशुदा हो तो रेट 3 लाख हो जाएगा. बच्चे वाली एक लाख में मिल जाएगी. फिर उसी शाम काजी ने पुराने हैदराबाद के एक घर में बुलाया. 9 मासूम लड़कियों की नुमाइश की गई. ये इस मंडी का सबसे खौफनाक पल था-मंडी में बिक रही थीं वो लड़कियां जिन्हें ये तक पता नहीं था कि निकाह के कुछ वक्त बाद उन्हें दूध की मख्खी की तरह निकाल फेंका जाएगा. दलाल उन्हें लेकर आया था. हमने कोई भी लड़की पसंद न आने का बहाना बनाया ताकि हम इस मंडी से बाहर निकल कर खुली हवा में सांस ले सकें. दलालों ने एक और लड़की दिखाने की बात कही और दावा किया कि वो हमें जरूर पसंद आएगी. हम उससे भी मिले और जल्द जवाब देने की बात कह कर बाहर निकल गए.

काजी ने हमारे सामने करीब 10 लड़कियों की नुमाइश कराई. मगर हमारे कहने के बावजूद किसी भी लड़की के घरवालों से नहीं मिलवाया. काजी ने कहा कि घरवालों को बस ये बताया जाता है कि उनकी लाडली का ब्याह मुल्क से बाहर करवाया जा रहा है.

विस्तृत खबर के लिए वीडियो देखें…

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(सौजन्य:  IBN7)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. MIM & MBT SEY PUCHO KYA HAI TUMHARI ZINDAGI KA MAQSAD? KYA BACHA PAOGE TUM MASOOM LADKIYON KO.
    YEH NAHI KAHNA KE TUM KUCH NAHI JAANTE HO……

  2. kaise bachenge ladkiyan shaitaan sey.. bikti hai ladkiyan "NIKAH" ke naam per Bazaar mein.. Kahan gaye woh Quam ke thekedaar jo kahte hai, ke hum hai tumhare madadgaar… Mai naam nahi leta kisi ka bhi… pata unko hai jo hai samajhdaar…. YA ALLAH BACHA MASOOM LADKIYON KO ZALIMON SEY….. (AMEEN)

  3. yah sharm ki baat hai hamare desh me aisa v hota hai dharm ke naam par.

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