/अमर उजाला के पत्रकार प्रदीप अवस्थी पर लडकी बरगलाने का आरोप…

अमर उजाला के पत्रकार प्रदीप अवस्थी पर लडकी बरगलाने का आरोप…

अमर उजाला के इटावा जिला प्रतिनिधि प्रदीप अवस्थी पर गंभीर आरोप लगाते हुए अमर उजाला के पूर्व पत्रकार सुघर सिंह ने अमर उजाला प्रबंधन को एक शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें प्रदीप अवस्थी पर आरोप है कि उसने एक लडकी को बरगला कर पत्रकार बनाने के नाम पर उसका यौन शोषण किया. इस खबर के प्रकाशित होने कुछ दिन बाद फोन पर हुई बातचीत में प्रदीप अवस्थी ने कहा कि यह पत्र सिर्फ व्यवसायिक दुर्भावना के कारण झूठे तथ्यों के आधार पर लिखा गया  है. प्रदीप अवस्थी ने यह भी कहा कि मैं मेरा काम कर रहा हूँ और मेरे बारे में किसी के कुछ भी कहने से सच्चाई नहीं बदल जाती.

सेवा मे
श्री मान राजुल माहेश्वरी
निदेशक
अमर उजाला पत्र समूह नोएडा

विषय- अमर उजाला इटावा जिला प्रतिनिधि प्रदीप अवस्थी द्वारा लोन्डियावाजी, छिनरे वाजी, छिछोरापन की जॉच कराये जाने हेतु निवेदन

महोदय मेरे द्वारा इटावा के अमर उजाला जिला प्रतिनिधि प्रदीप अवस्थी की शिकायत की जाती रही है। लेकिन मेरी शिकायतो को नही सुना गया अव हकीकत आपके सामने आ गयी है अव तो प्रदीप अवस्थी को हटा दीजिये ताकि अमर उजाला की छवि धूमिल ना हो सके दिनॉक 5 नबम्बर को इटावा अमर उजाला आफिस मे एक लडकी भावना तिवारी दाखिल हुयी जिसने आते हर प्रदीप अवस्थी का जमकर फटकार लगायी और गन्दी- गन्दी गाली मॉ वहिन की गाली दी कही मेरा राज ना खुल जाये इसलिये अवस्थी ने उस महिला का मोवाइल भी छीन लिया जिसे वाद मे वापस कर दिया। और कहा कि तुम मुझे घोखा दे रहे हो मे यह वरदास्त नही करूॅगी उसने यह भी कहा कि कई वार कानपुर मे भी अवस्थी ने मुझे वुलाया है। मुझे अन्देशा है कि प्रदीप अवस्थी ने उस महिला के साथ योनशोषण किया है जिसकी वजह से वह महिला शराव पीकर आयी थी ताकि अपनी वात कह सके। इस घटना को करीव 200 लोगो ने देखा इटावा की गली- गली मे प्रदीप अवस्थी की छिनरेवाजी और छिछोरेपन की चर्चा है। अमरउजाला की अवस्थी छवि धूमिल कर रहे है।
अगर मेरे पत्र आपको झूठा लग रहा है तो इटावा के अवस्थी के नम्बर की कॉल डिटेल निकलवा लीजिये पता चल जायेगा क्यो कि अवस्थी के फोन की कॉल डिटेल मे उस लडकी से सैकडो वार वात हुयी है। वो लडकी अपने आप को अमर उजाला का पत्रकार वताती है और सेफई मे डाक्टरो के प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम मे कुछ दिन पूर्व कवरेज को आयी थी जिसमे उसने कई पत्रकारोे को वताया था कि मे इण्डिया न्यूज मुम्बई मे काम करती थी अव अमर उजाला इटावा मे स्टाफ रिपोर्टर हूॅ। और फिर एक वात और है कि अगर प्रदीप अवस्थी सही थे तो उस महिला के विरूद्व कोई कार्यवाही क्यो नही करायी। जब पुलिस उसे शान्ति भंग मे चालान कर रही थी तो क्यो नही होने दिया, अमर उजाला के एक कर्मचारी को को कम्बल लेकर 9ः25 वजे कोतवाली इटावा क्यो भेजा, क्यो विशाल प्रेम होटल से उसके लिये खाना अमर उजाला का कर्मचारी कमल जैन लेकर गया। इटावा के सभी पत्रकारो के पैरो पर गिरकर अवस्थी ने अपनी नाक क्यो रगड़ी कि भाई गलती हो गयी ये नही पता था कि ये आफिस तक आ जायेगी एक वार बचा लो जिन्दगी भर अहसान मानूॅगा। क्यो इटावा के 6 पत्रकारो को लेकर एसएसपी से रात को 11ः10 वजे मिलने गये कि साहव मामला ना वढने दो आज के वाद अमर उजाला पुलिस के विरूद्व एक लाइन नही लिखेगा अगर लिखे तो वो लडकी कही भागी नही जा रही जव चाहे मुकदद्मा लिख देना लेकिन इस वार अवस्थी को मॉफ कर दो। इस वात पर एसएसपी ने प्रभारी कोतवाली को फोन कर उस महिला को समझा वुझाकर भेजने को कह दिया। एक पत्रकार ने तो यह तक वताया कि एसएसपी ने अवस्थी से तो मिलने से इंकार कर दिया लेकिन और पत्रकारो के कहने पर एसएसपी मिले और वाहर निकलकर अवस्थी से वोले कि अव आया ऊॅट पहाड़ के नीचे। तूने हमारी पुलिस की बदनामी करने मे कोई कसर नही छोडी तूने खूव खाली पुलिस चौकी की कुर्सी मेज की फोटो छापी है अव तो महिला के ब्यान के आधार पर तुम जेल जाओगे सारी पत्रकारिता तेरे चूतड़ो मे घुसेड़ दूॅगा। ये शव्द थे एसएसपी के अमर उजाला के प्रदीप अवस्थी के लिये।

अव निर्णय आपको लेना है कि क्यो अमर उजाला की छवि धूमिल करने वाले को आप इटावा मे रखे है।
सुघर सिहॅ पूर्व पत्रकार अमर उजाला
सैफई इटावा
09457262323

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.