/प्रधानमंत्री न बन पाने का कोई मलाल नहीं – आडवाणी

प्रधानमंत्री न बन पाने का कोई मलाल नहीं – आडवाणी

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज अपने जीवन के 85 साल पूरे होने पर साफ़ साफ कह दिया कि अब उनकी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है. पीएम पद की उम्मीदवारी की तमाम अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘पार्टी और देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है, यह पीएम बनने से कहीं ज्यादा है’. लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री ना बन पाने का मलाल नहीं होने का आभास भी दिया और कहा कि उनकी पार्टी ने उन्हें उससे अधिक दिया है जो इस पद से मिलता.

आडवाणी ने अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘पार्टी ने मेरे सारे जीवन में मुझे इतना अधिक दिया है कि जब कोई कहता है कि आपको प्रधानमंत्री बनना है, तो मैं कहता हूं पार्टी से मुझे जो कुछ मिला है, प्रधानमंत्री पद उससे अधिक नहीं दे सकता है.’’ उनसे सवाल किया गया था कि पार्टी की ओर से उन्हें क्या उपहार मिला है. उन्हें बधाई देने आने वालों में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी भी शामिल हैं.

कहा जा रहा है कि गडकरी को अध्यक्ष पद का दूसरा कार्यकाल दिए जाने के आडवाणी खिलाफ हैं. उनका मानना है कि गडकरी को पार्टी अध्यक्ष का दूसरा कार्यकाल दिए जाने से भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा की लडाई कमजोर पडेगी. वह छह नवंबर को पार्टी की कोर ग्रुप की उस बैठक में भी शामिल नहीं हुए जिसमें गडकरी की कंपनी पूर्ती समूह में कथित संदेहास्पद निवेश होने के विवाद पर चर्चा के बाद पार्टी अध्यक्ष के नेतृत्व में पूरी आस्था की घोषणा की गई थी.

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज जन्मदिन की बधाई देने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की जो गडकरी के अध्यक्ष पद पर बने रहने से नाराज नजर आते हैं.

गडकरी ने आडवाणी से उनके घर पर मुलाकात की. दोनों के बीच 15 मिनट तक मुलाकात चली. इस मौके पर मौजूद दिल्ली भाजपा के नेता विजय जौली ने कहा, ‘‘जब गडकरी ने आडवाणी से मुलाकात की थी तो माहौल काफी सौहार्दपूर्ण था. गडकरी ने आडवाणी के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया.’’

मुलाकात ऐस समय हुई जब भाजपा के भीतर गडकरी के अध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर मतभेद चल रहे हैं. मंगलवार को पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में गडकरी का यह कहकर समर्थन किया गया कि उन्होंने अपनी कंपनी के संचालन में ‘‘कानूनी या नैतिक रुप से कुछ भी गलत नहीं किया.’’

हालांकि, आडवाणी कोर ग्रुप और महासचिवों की बैठक से अलग रहे क्योंकि वह गडकरी के पद पर बने रहने से नाराज नजर आते हैं. इस बीच, पार्टी कार्यकर्ता आज आडवाणी को उनके 85वें जन्मदिन की बधाई देने के लिए उनके घर एकत्र हुए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.