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मनोज भावुक अंजन टीवी से जुड़े

हमार टीवी के क्रिएटिव हेड मनोज भावुक ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहाँ प्रोग्रामिंग कंटेंट और स्पेशल प्रोजेक्ट्स एंकरिंग का जिम्मा संभाल रहे थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी अंजन टीवी के साथ शुरू की है. मनोज ने अंजन टीवी में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर ज्‍वाइन किया है. वे लगभग चार सालों से हमार टीवी को अपनी सेवाएं दे रहे थे . वे फिल्म, साहित्य, संगीत , कवि सम्मलेन के साथ सेक्सुअल प्रोब्लमस जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जोरदार तरीके से एंकरिंग करते रहे हैं. भोजपुरिया दर्शकों के बीच उनकी एक अच्‍छी पहचान है.
16 वर्ष पूर्व पटना दूरदर्शन पर भोजपुरी साहित्यकारों और कलाकारों के साक्षात्कार से मनोज ने अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत की थी . फिर 1998 में भोजपुरी के प्रथम टीवी सीरियल “सांची पिरितिया” में बतौर अभिनेता और 1999 में “तहरे से घर बसाएब” टीवी सीरियल में बतौर कथा-पटकथा, संवाद व गीत लेखक जुड़े . हाल ही में मनोज ने दो भोजपुरी फिल्मों ” सौगंध गंगा मईया के ” और  ” रखवाला ” में अभिनय भी किया. महुआ के लोकप्रिय रियलिटी शो ” भौजी नo 1” में बतौर जज और अधिकारी ब्रदर्स के दबंग चैनल के ” बहुत ख़ूब ” में बतौर कवि भी मनोज ने अपनी सेवाएं दीं . हमार टीवी में मनोज भावुक ने फिल्म विशेष (an on-line discussion program with 6 -7 film personalities at Noida, Mumbai, Patna studio ), वाह जी वाह (कवि सम्मलेन ), दिल के बात हमार के साथ (a chat show with doctors on sexual problems) और भोजपुरी सिनेमा के 50 साल (A series of interviews based on famous film personalities) जैसे लोकप्रिय शो को होस्ट किया . बात संभाल के ( a weekly half an hour serial on domestic violence) की कथा-पटकथा व संवाद लेखन के साथ हीं चैनल का टायटल सांग , ”लेके आईल बाटे पूर्वी बयार टीवी ”  और समसामयिक विषयों पर गीत जैसे की ” भईया संगे मूछ वाली भउजी घरे आई ”   लिखते रहे मनोज .

. मनोज भोजपुरी कवि सम्मेलनों के अनिवार्य कवि और भोजपुरी के राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय मंचों के चहेते एंकर रहे हैं . अफ्रीका और इंग्लैंड में भी भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति का  प्रचार-प्रसार किया है मनोज ने। तस्वीर जिंदगी के( ग़ज़ल-संग्रह) एवं चलनी में पानी ( गीत- संग्रह) मनोज की चर्चित पुस्तके हैं। मनोज भारतीय भाषा परिषद सम्मान, भाऊराव देवरस सेवा सम्‍मान , भिखारी ठाकुर सम्मान, राही मासूम रजा सम्मान , बेस्ट एंकर अवार्ड समेत दर्जनों सम्मानों से नवाजे गए हैं.  भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर मनोज ने अनोखा काम किया है . भोजपुरी फिल्मों के महानायक कुणाल सिंह इन्हें ” भोजपुरी फिल्मों का इनसाइक्लोपीडिया” कहते हैं . मनोज भावुक विश्व भोजपुरी सम्मलेन, दिल्ली के अध्यक्ष हैं और इसके पूर्व विश्व भोजपुरी सम्मलेन के ग्रेट ब्रिटेन इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं .

मनोज के अंजन टीवी से जुड़ने को बड़ी सफलता माना जा रहा है. मनोज भावुक के रूप में चैनल को एक ऐसा चेहरा मिल गया है जिसकी भोजपुरिया लोगों में अच्‍छी पहचान है. अपने पूर्व और वर्तमान चैनल के बारे में पूछने पर मनोज भावुक बड़ी बेबाकी से कहते हैं , मै चैनल से अधिक भोजपुरी का हूँ ..अब चैनल मुझसे जो लेले . यह चैनल पर निर्भर करता है कि  वह मेरी राइटिंग और एंकरिंग एक्सपर्टीज का कितना फ़ायदा उठा पाता है .. और फिर अपने चिर परिचित अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहते हैं  – चरागों का कोई अपना मकाँ  नहीं होता / ये जहां रहते हैं वही रोशनी लुटाते हैं   …..

प्रस्तुति – अनूप पाण्डेय

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.