/धूमधाम से मनेगी दीपावली पाकिस्तान सिंध के सरहदी इलाको में

धूमधाम से मनेगी दीपावली पाकिस्तान सिंध के सरहदी इलाको में

-चन्दन भाटी||

बाड़मेर भारत पाकिस्तान की सरहद पर बसे पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के सरहदी गाँवो में दिवाली की जोर शोर से तयारियो में हिन्दू परिवार जुटे है. सिंध प्रान्त में रह रहे लाखो अल्पसंख्यक हिन्दू परिवार दीपावली बड़ी धूमधाम से मानते है. दीपावली से पूर्व ही कराची में स्वामीनारायण मंदिर. सिंध के खेबर स्थित गोरखनाथ मंदिर और पेशावर के कृष्णा मंदिर, अमरकोट मीठी, गदर सिटी,  नगर्परकर के हिन्दू मंदिरों में आकर्षक रोशनी व्यवस्थाएं की गई है. हिन्दू परिवार दीवाली मानाने अधिकांशतः मंदिरों में जाते है तो कई परिवार अपने कुटुंब कबीले के साथ दीवाली मानते है. अमरकोट में दिवाली के दुसरे दिन रामा हमीर सिंह की हवेली में रियान होती है जिसमे आस पास के गाँवो के हज़ारो की तादाद में लोग दीवाली के इस स्नेह मिलन में शिरकत करते है. पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में दिवाली बड़े ही उत्साह के साथ मनाई जाती है जिसकी तयारिया स पन्द्र दिन पूर्व शुरू हो जाती है दिवाली पर कई मंदिरों में सत्संग और भजनों के कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है.

पकिस्तान में कट्टरपंथियों का भय अवश्य लोगो को सताता है. मगर दिवाली जैसे पर्व को मानाने के लिए यह खौफ नगण्य हो जाता है. पाकिस्तान के वरिष्ट पत्रकार ने बताया की हिन्दू परिवार अपने अपने तीज त्यौहार परम्परागत रूप से पूरी आज़ादी के साथ मानते है. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर हौवा खड़ा किया गया हे की हिन्दुओ को त्यौहार मानाने की आज़ादी नहीं है. कुछ बन्दीशो को छोड़ दिया जाये तो हिन्दू परिवारों को त्यौहार मानाने में कोई दिक्कते नहीं. आती सिंध सहित पुरे सिंध प्रान्त में दीवाली की बाजारों में अछि खासी रौनक रहती है. दीपावली को हर हिन्दू परिवार अपने घर और प्रतिष्ठान में लक्ष्मी पूजन करते है दुसरे दिन रामा सामा के दिन रियानो का दौर चलता है. जमकर आतिशबाजी होती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.