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रंगरेलियां मनाते धरे गए तीन पत्रकार..

By   /  November 12, 2012  /  22 Comments

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-कुमार सौवीर||

लखनऊ: तीन पत्रकारों ने एक कॉलगर्ल के साथ रंगरेलियां मनायीं। अचानक खबर मिलने पर पुलिस ने छापा मारा। सारे लोग पकड़े गये। रंगेहाथों। पुलिस की मौजूदगी में लोगों ने इन पत्रकारों को जमकर पीटा लेकिन इसी बीच एमएलए से लेकर लखनऊ के बड़े पत्रकारों की सिफारिशें पहुंची। और नतीजातन मामला हमेशा-हमेशा के लिए खत्‍म कर दिया गया।

यह मामला है उप्र के सोनांचल क्षेत्र का। नवंबर की नौ तारीख  दिन का। यह इलाका ऊर्जांचल के तौर पर पहचाना जाता है। लेकिन इस कृत्रिम बिजली के झटकों ने इस पूरे इलाके में पत्रकारों के नजरिये को लेकर जोरदार शॉक दिया है। इस घटना को लेकर लोगों में खासा गुस्‍सा है। उन लोगों में ऐसे पतित पत्रकारों से लेकर उनके समर्थक विधायक से लेकर ऐसे ऐयाश पत्रकारों के खिलाफ भी प्रति। गुस्‍सा तो पुलिस के खिलाफ भी है, लेकिन उससे भी ज्‍यादा नाराजगी पर है, जो अपनी मर्दानगी और हौसले के नाम पर लोगों में सख्‍त प्रशासन लागू करने के दावे करते हैं।

बात है ओबरा की। यहां के एक आभिजात्‍य वीआईपी गेस्‍टहाउस में तीन दिन पहले यहां के तीन बडे पत्रकारों ने यहां अपना गंदा चेहरा दिखाया। यह वही गेस्‍ट हाउस वह है जहां कभी देश की बड़ी हस्तियां और शख्सियतें टिक चुकी हैं और प्रदेश-देश के नामचीन अफसरों ने भी यहां कई बार कुछ दिन व्‍यतीत किया है। ताजा घटना में शामिल यह तीनों पत्रकार हैसियत के तौर पर करोड़ों रूपयों के मालिक हैं। इनमें से वे लोग भी हैं जो कई क्रशर और खनन व्‍यवसाय से जुड़े हैं। एक पत्रकार एक पत्रिका में संयुक्‍त संपादक हैं तो बाकी लोग खनन माफिया बताये जाते हैं। इनमें और उनके सहयोगियों के नाम यहां पत्रकारों के क्‍लब और बड़े होटल मे बुक कराये जाते हैं। लखनऊ में इनकी आमद-रफ्त नियमित होती हैं। इनके खा‍स दोस्‍तों में वे लोग बताये जाते हैं जो कभी लखनऊ में सरे आम घोड़ों पर चढ़ कर कानून और व्‍यवस्‍था चलाने में मशहूर हैं। ऐसे एक अन्‍य अफसर ऐसे हैं जो सीडीओ की अपनी तैनाती के दौरान मनरेगा में खासे बदनाम हो चुके हैं।

बताते हैं कि इस गेस्‍टहाउस में एक राष्‍ट्रीय दैनिक के एक पत्रकार ने एक आलीशान कमरा बुक कराया था। इन लोगों ने लखनऊ से एक कॉलगर्ल को बुलाया था कि वे अपने दोस्‍तों के साथ मनोरंजन कर सकें। खबर के मुताबिक इन तीनों नामख्‍यात पत्रकारों ने अपनी रंगरेलियां शुरू कर दीं। कि अचानक ही गेस्‍ट हाउस के कर्मचारियों ने पुलिस को घटना की खबर दे डाली। इन लोगों की हरकतों से आजिज पुलिस इनकी करतूतों से पहले से  परेशान थी। पता चलते ही पुलिस ने छापा मार दिया। तीनों लोग मौके से ही नंगे पकड़़े गये। पूछताछ के बाद इन लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लेकिन इसी बीच स्‍थानीय लोगों ने हस्‍तक्षेप किया और पुलिस थाने में ही इन लोगों को जमकर पीटा।

लेकिन इसी बीच शुरू हो गया दबावों का दौर। बड़े अफसर, बड़बोले पुलिस के बड़े अफसरों और दिग्‍गज पत्रकारों के साथ ही एमएलए के दबाव आने शुरू हो गये। लखनऊ के एक सफेदपोश पत्रकार तो इस मामले में दिन-रात एक करते रहे। उधर ऐसे दबावों के चलते बेहाल छुटभैया पुलिस अफसरों के पसीने छूट गये और बाद में अंतत: पकड़े गये इन पत्रकारों को रिहा करना पड़ा। ब्‍योरे के मुताबिक उर्जा-राजधानी कहा जाने वाले स्थित अतिथि गृह में हुई छापेमारी में पुलिस ने तीन पत्रकारों को एक कालगर्ल के साथ आपत्तिजनक स्थिति में रंगेहाथ धर लिया था। लेकिन यूपी सरकार के बड़े नेताओं के नजदीक माने जाने वाले इन पत्रकारों को सत्ता पक्ष और पुलिस के आला अधिकारियों के दबाव में अंततः छोड़ना पड़ा। बताते हैं कि छापामारी के दौरान वहां मौजूद कॉलगर्ल ने खुद ही पूरा मामला हाथ में ले लिया और पुलिसवालों को जमकर लताड़ लगायी। खबर है कि पुलिस पर दबाव डालने वाले इन पत्रकारों ने उन पत्रकारों को भी मन्‍नत-अरदास और हाथ-जोड़ की, जो स्‍थानीय तौर पर मोबाइल-न्‍यूज से जुड़े हुए हैं। ऐसे पत्रकार चाहते हैं कि इस खबर को फ्लैश नहीं किया जाए।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

22 Comments

  1. Anoop Gupta says:

    lakin emandar patrakar ki charcha koi kyo nahi karta , or us emandar patrakar ko mental case tak ki upadhi se navaja jaata hai. emandar or blakmelar patrakaro ke beech samaj emandari se vishlesaran kyo nahi karta.

  2. Anil Gupta says:

    adhikansh patrakar dalal tatha aiyaas hai..

  3. bagud hi khet khane lage to kya kahenge.

  4. patrakarita ki aad me dalali kar rahe beshrmo ko jo bhi saja di jaye kam hai.

  5. Laxmi Narayan Choudhary says:

    this is not danger but a human needs.

  6. rahul ji mai aap ke sath hu

  7. एसे ही पत्रकारों की देन है जो दिन भर दलाली करने में लिप्त रहते है और समाज के सामने अपना सही चेहरा ले कर आम जनता में रहते ऐसे पत्रकार क्या आम जनता को इंसाफ दिलाएंगे पहले ये अपने अंदर की गलतिया वो भी ऐसे गलती जो की सिर्फ गलती नहीं बल्कि सामाजिक तत्व के नाम पर एक बदनुमा धबा हैं वो हमारी बातो को समाज में लाकर हमे क्या इंसाफ दिलाएंगे जो की खुद सरकारी गेस्ट हाउस जिसमे की देश को चलने वाले अधिकारीयो के लिए बना हैं उसे चकला बनाने के पीछे पड़े हैं.

  8. Khabri Lal says:

    पुलिस की म्हणता तो देखिये जिसने सुचना दी उसके मोबाईल नॉ को ओबरा पुलिस उजागर कर दिया.ऐसे में पुलिस पर कितना भरोसा किया जा सकता है?

  9. krishnasingh says:

    S wala patrkar hindi dainik ka. P wala patrkar magzine ka

  10. krishnasingh says:

    2patrkar ka nam pata chala 1ka nam S se hai dusre ka P se hai

  11. rajesh panika says:

    wah re sonebhadra ki police prashasan 1taraf to naxaliyo ki kamar tor diya dusari taraf in 3patrakaro se police ki phat rahi hai dhany hai sonebhadra ki police

  12. rajesh panika says:

    is tino randibaz patarkaro ko ujagar karne ki jarurat hai in mada.ch..do ki wajah se patrakarita pesha kalankit ho rahi hai

  13. Anoop Gupta says:

    yes to randibaaji karte pakde gaye lakin un longo ka kya jo meera bai gaust house or up bhaban dellhi me randibaaji karte hai.

  14. NAUSHAD ANSARIE says:

    उस तिन पत्रकारों के नाम को सार्वजानिक करने की जरुरत है और जिसमे वो कम करते है उन्हें वह से ऐसे अय्याश पत्रकार को तुरंत हटाया जाय

  15. tiwari b l says:

    आप अखिलेश जी को शिकायत करेंगे हो वो सुपर सी ऍम उ प को भेज देंगे ओर्र वो कहाचुके है यदि महिला के साथ एसा बैसा हो जाये तो मुआबजा दिया जायेगा अब व् इ प गुस्ट वाली महिल पैय्सा थोड़े ही लेंगी यदि लेती है तो ये तैया हो जायेगा की कुछ हूया है ओर्र दूसरी बात सुपर सी ऍम ये भी कहरहे थे की गान्यो की महिला सुन्दर नहीं होती है यदि वो गंयो की हूए तो वो सही पता ही नहीं बताएगी फ़िर आप पैसे किस भिज्वावोये ये तमाम परेसनिया है आप इएक काम कर ही दो उन लोंगो के नाम जिनोहे ये पुरुषार्थ किया है नाम खावर पर दाल दो उनेह बढ़ायी देकर हम तो अपना काम करही ली ओर्र सही पते पर उने भेज भी दे जब लड़की कहा रही है एसा कुछ हूया ही नहीं तो ये बर्दी खा खी मौके का लाभ लेने मई भी नकद लेना मई तो नहीं चुके होंगे चली पुलिस वाले उए पी वालो की लोत्तरी ही लग गयी होगी

  16. tiwari b l says:

    आखिर नैय्तिकता की परिभासा बनाने वाने ये यय्न्त्र बूढी के देवता कलम के कारीगर सर्स्वब्ती पुत्र इएनेह कियो पकड़ा जिनोहे पकड़ा किया बे सब खाकी बर्दी पहने थे ये रास्तिय्भाक लोग इएन देवतायो पर कैसे हाथ दाल रहेथे यदि आप पूरे नाम खावर पर दाल देते तो हम उनेह बधाईया प्रेसे सष्ट कर ही देते फ़िर मई केवल आप की कलम को प्रमाण कर के अपनी तस्सल्ली कर लेंगे जी हो सके तो इएन महान सक्त्शाली विदुयानो ओर्र प्रतिभावान के नामो की चर्चा तो करनी ही चाहिए जी

  17. Anoop Srivastav says:

    kya jamana aa gaya hai pahle reporters ministers ko expose.
    karte the aur ab wo khud expse ho rahe hai aise to ho chuki desh ki taraki…………….

  18. सेवा में माननीय मुख्य मंत्री महोदय जी.

    समाचार सज्ञान में ले / सत्य प्ररक जाच कर जनहित में कारवाही करने की किरपा करे / ओबरा v I p गेस्ट हाउस कमरा बुक कराने की प्रकिरिया की जाच हो एवम घटना की सत्त्यता छिपाने वाले अधिकरियों की भी जाच हो / उक्त कृत समाजिक जन भावनावो को आहत करता है /ओबरा नगर के सामाजिक जनभावना को ध्यान में रख कर जनहित में आप को सादर अवगत करा रहा हु /विजय शंकर यादव राष्टीय सचिव भारतीय छात्र उथान समिति / संयोजक छात्र संघर्स समिति 945161383.

  19. ashok sharma says:

    ठीक किया

  20. Mahender Singh Thakur says:

    Aaj hamre des ki halat tik nahi h kyoki hamre des ki sanskarti nast hone ki kagar par Aa gae h jab des ke jagrok log hi des main Es prkar say karge to des ki Aam janta kya sohegi patrkar ka kaam hai des ki boraeyo ko dor karna magar jab patrkar hi des ki boreyo mai samil ho jaege to des ki Aam janta kis par bharosa karegi kuch log hi to ES DES MAI bache hai jenpar des ki janta bharosa karti hai onme say Ek hai patrkar.

  21. kyo phat rahi hai patrakar ka nam dene me aur kis news paper ke patrakar hai yeh batane me, poora adhura brief lagta hai, nam dijiye inko bhi nanga karo jara duniya bhi jane. indian democracy ka choutha pillar bhi kis kadar barbaad hai duniya bhi dekhe.

  22. Kunwar Sen says:

    Phle to in patrkaro or afcer or Netao ke naam ujagr kro , or isme media darbar ko nispaksh phl krni padegi , Media ka kaam hota h ki nispaksh khabar de , aaj patrkar pkde gye to naam bhi nhi de rhe h , yes kaisa sotela pn h aap ka.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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