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गूगल ने लांच किया प्लस, घबराए फेसबुक ने भी किए कई बदलाव

By   /  August 3, 2011  /  No Comments

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इंटरनेट के अदृश्य संसार में फिर एक जंग छिड़ने वाली है। दरअसल, गूगल की नई पेशकश ‘गूगल प्लस’ सोशल नेटवर्किंग के क्षेत्र में तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही है। अब तक इस क्षेत्र में केवल फेसबुक का ही दबदबा कायम था।

इस सोशल नेटवर्किंग साइट के ट्रायल वर्जन ने शुरू होने के 3 हफ्ते के भीतर ही लगभग दो करोड़ लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। इनमें से लगभग आधे लोग अमेरिका और भारत से हैं। शोध फर्म कॉमस्कोर के आंकलन के मुताबिक, 29 जून से 19 जुलाई के बीच गूगल प्लस को लगभग दो करोड़ लोगों ने देखा। इनमें से लगभग 50 लाख अमेरिका से और लगभग 30 लाख भारत से थे।

इसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी का नंबर आता है। फर्म के विश्लेषण मामलों के उपाध्यक्ष एंड्रू लिप्समैन ने कहा, “मैंने इसके पहले इतनी तेजी से किसी साइट को प्रगति करते हुए नहीं देखा।”  28 जून को लांच हुआ गूगल प्लस प्रतिद्वंद्वी फेसबुक को गूगल का जवाब है। इसमें इस्तेमालकर्ता अपने दोस्तों के समूह के बीच फोटो पेस्ट करना, संदेश भेजना और टिप्पणियां करना जैसी गतिविधियों को अंजाम दे सकता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि कितने लोग होंगे जो फेसबुक को छोड़कर गूगल के प्रयोग के साथ होंगे? फेसबुक के समर्थकों का मानना है कि यदि कोई प्रयोग के लिए गूगल प्लस पर चला भी गया तो जरूरी नहीं है कि वह उसके साथ हो ले। कॉमस्कोर के ही आंकड़े इस बात को भी दर्शाते हैं कि 5 जुलाई से 12 जुलाई तक पहले सप्ताह में गूगल प्लस के विजिटर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसके बाद लगातार घट रही है। 12 से 14 जुलाई तक गूगल प्लस पर रोजाना विजिट करने वालों की संख्या मात्र 3 लाख रही है।

गूगल इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष विक गुंदोतरा ने कहा, “मेरा मानना है कि लोग बहुत जीवंत तरीके से सम्पर्क करते हैं. लेकिन उपलब्ध आनलाइन साधन हमें बहुत कठोर सेवाएं उपलब्ध कराते हैं.” उन्होंने कहा, “उपलब्ध सोशल नेटवर्किंग साधनों के जरिये छोटे समूहों के बीच चुनिंदा सूचनाएं साझा करने में मुश्किल होती है. वर्तमान सोशल नेटवर्किंग साइट बारीकियों की इजाजत नहीं देते. लोग अपनी सोशल नेटवर्किंग में ऐसी बारीकियां चाहते हैं क्योंकि इंटरनेट के जरिये सम्पर्क कायम करने वाले इसके जरिये अपने तमाम मित्रों से सम्पर्क में रहते हैं.”

उदाहरण के लिए फेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी स्थिति अपडेट को अपने मि़त्रों के छोटे समूह तक ही सीमित रखना चाहते हैं ताकि उनके सहकर्मी उनके अकाउंट पर लगी पार्टी फोटो न देख सकें या उनके अभिभावक उस पर की गई इश्कबाजी वाली टिप्पणियां न देख पाएं.

यह पहली बार नहीं है जब गूगल ने कोई सोशल नेटवर्किंग साइट शुरु की हो. गूगल ने पिछले साल फरवरी में बज़ नाम से एक सोशल नेटवर्किंग साइट की शुरुआत की थी जिसे कोई खास लोकप्रियता नहीं मिली. 2004 में गूगल ने ऑरकुट लांच किया था जो काफ़ी लोकप्रिय हुआ लेकिन बाद में फेसबुक से उसे कड़ी चुनौती मिली.

उधर शायद गूगल से मिल रही इसी चुनौती को देखते हुए पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने भी वीडियो चैट पेश करने की घोषणा की है। फेसबुक का दावा है कि यह नया फीचर सोशल नेटवर्किंग साइट्स में क्रांति ला देगा। गूगल प्लस को टक्कर देने के लिए फेसबुक लगातार नए प्रयोग कर रहा है और उसकी यह नई सर्विस है- वीडियो चैट सर्विस। फेसबुक यह नई सर्विस स्काइप के साथ मिलकर शुरु कर रही है जिसके दुनिया भर में 17 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इसमें यूजर्स आमने-सामने किसी से भी बात कर पाएंगे।

हालांकि गूगल में वीडियो चैट की सुविधा पहले से ही है, और इसे  प्लस से भी जोड़ा जा सकता है। अब दोनों ही कंपनियों में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन देखना है कि यूजर को कौन अधिक भाता है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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