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तो युवराज की ताजपोशी हो ही गयी…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

तो युवराज की ताजपोशी हो ही गयी, अब नीतियों की निरंतरता के बारे में कोई शक  की गुंजाइश नहीं है! यह वोट बैंक साधने की कवायद कम, कारपोरेट इंडिया और निवेशकों को राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों  को तेज करते जाने की गारंटी ज्यादा है. अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू करने के साथ ही कांग्रेस ने चुनावी रथ की बागडोर अब राहुल गांधी को सौंप दी है. 42 वर्षीय राहुल गांधी को चुनाव समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया जाना 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में उनके बढ़ते कद का परिचायक है और इसे आगामी चुनावी जंग में उन्हें पार्टी के चेहरे के तौर पर पेश करने की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.युवराज के सामने जरूर चुनावी महाभारत के कुरुक्षेत्र को जीतने की भारी चुनौती है. भ्रष्टाचार की कालिख और जनविरोधी कांग्रेसी छवि के मद्देनजर , हिंदुत्व की तेज हवा के मुकाबले कांग्रेस ने आपस में मारकाट करते भाजपाइयों के मुकाबले निर्विरोध युवा नेतृत्व और नेहरु गांधी वंश की विरासत  पेश करने का दांव खेल दिया .पार्टी में राहुल गांधी की बड़ी भूमिका का संकेत देते हुए गुरुवार को उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया गया. वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह, मधुसूदन मिस्त्री और जयराम रमेश को राहुल गांधी के नेतृत्व वाली चुनाव समन्वय समिति का सदस्य बनाया गया है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने यह ऐलान किया. उन्होंने तीन उप-समूह बनाने की भी घोषणा की, जिनमें एक चुनाव पूर्व गठबंधन के महत्वपूर्ण मामले पर फैसला करेगा. वरिष्ठ नेता एके एंटनी इसके अध्यक्ष होंगे.इसतरह आखिरकार औपचारिक रूप से राहुल गांधी को कांग्रेस में नंबर दो का स्थान मिल गया.

राहुल गांधी (जन्म: 19 जून 1970) एक भारतीय नेता और भारत की संसद के सदस्य हैं, और भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में उत्तर प्रदेश में स्थित अमेठी चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.राहुल गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबद्ध हैं. राहुल उस नेहरू-गांधी परिवार से हैं, जो भारत का सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवार है. राहुल को 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत का श्रेय दिया गया है. उनकी राजनैतिक रणनीतियों में जमीनी स्तर की सक्रियता को बल देना, ग्रामीण भारत के साथ गहरे संबंध स्थापित करना और कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने की कोशिश करना, प्रमुख हैं.अनुभवहीनता के चलते राहुल ने मनमोहन सिंह की सरकार में मन्त्रीपद लेने से इंकार किया है. आजकल राहुल अपना सारा ध्यान राजनीतिक अनुभव प्राप्त करने और पार्टी को जड़ से मजबूत बनाने पर केंद्रित कर रहे हैं.राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नयी दिल्ली में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और वर्तमान काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी के यहां हुआ था. वह अपने माता पिता की दो संतानों में बड़े हैं और प्रियंका गांधी वढेरा के बड़े भाई हैं. राहुल की दादी भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं. राहुल की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में हुई थी, इसके बाद वो प्रसिद्ध दून स्कूल में पढ़ने चले गये जहां उनके पिता ने भी विद्यार्जन किया था. सन 1981-83 तक सुरक्षा कारणों के कारण राहुल को अपनी पढ़ाई घर से ही करनी पड़ी. राहुल ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से सन 1994 में अपनी कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की.इसके बाद सन 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की.

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2014 के लिए तैयारियों की आधिकारिक शुरुआत कर दी है लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती यह है कि प्रधानमंत्रित्व के सबसे बड़े दावेदार नरेंद्र मोदी के कब्जे से गुजरात को मुक्त कराया जाये. मीडिया में अगला चुनाव मोदी और राहुल के बीच बताया जा रहा है. गुजरात में राहुल का करिश्मा फेल हो गया तो हिंदू राष्ट्रवाद की आंधी के बाकी देश में कांग्रेस और युवराज दोनों के लिे सबसे बड़ी आपदा बन जाने के आसार हैं.दिसंबर में होने जा रहे गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से अगले महीने की एक और दो तारीख को ‘प्रचार बमबारी’ होगी जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली सहित पार्टी के सभी प्रमुख नेता और मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे. बीजेपी के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि एक और दो दिसंबर को बीजेपी के तमाम वरिष्ठ नेता गुजरात के 95 विधानसभा क्षेत्रों में सुशासन और विकास के संकल्प और संदेश के साथ जनता के बीच जाएंगे और नरेंद्र मोदी शासन को फिर से सत्ता में लाने की जोरदार अपील करेंगे.
ताजपोशी के इस रस्म के मौके पर ही भारी चर्चा में रहे 2जी स्पेक्ट्रम नीलामी के फिसड्डी साबित होने के एक दिन बाद गुरुवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार और कांग्रेस दोनों ने नियंत्रक और महालेखापरीक्षक विनोद राय के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें 2008 में हुए स्पेक्ट्रम से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात कही गई थी. तो  दूसरी  ओर,जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने काग्रेस और गाधी परिवार पर एक बार फिर हमला बोला है. स्वामी ने राहुल गांधी के स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख के पिक्टेट बैंक में खाता होने का सनसनीखेज खुलासा करने के साथ ही आरोप लगाया है कि गांधी खानदान ने विभिन्न देशों में दर्जनों फर्जी कंपनियों बनाई. अरबों का धन बटोरा फिर कंपनी बंद कर दी. कांग्रेस के धन से दिल्ली का हेराल्ड हाउस कौड़ियों के भाव खरीदा जिसकी बाजार कीमत 6 हजार करोड़ से अधिक है. सोनिया और राहुल आरोपों का जवाब देने की खुली चुनौती देते हुए स्वामी ने कहा, मां-बेटे अपने पदों से इस्तीफा दें. ऐसा न किया तो अदालत का दरवाजा खटखटाउंगा.

चुनाव से पहले गठबंधन की प्रमुख जिम्मेदारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को सौंपी गई है. चुनाव पूर्व गठबंधन उपसमूह का अध्यक्ष एंटनी को बनाकर छह सदस्यीय समिति में वीरप्पा मोइली, मुकुल वासनिक, सुरेश पचौरी और मोहन प्रकाश के साथ-साथ राहुल के करीबी मंत्री जितेंद्र सिंह को रखा गया है. इसी तरह एंटनी की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय घोषणापत्र और सरकारी कार्यक्रम उपसमूह भी गठित किया गया है. इसमें संगठन और सरकार के लोग शामिल किए गए हैं. घोषणापत्र पर अमल और सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी वाली इस कमेटी में एंटनी के अलावा पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, आनंद शर्मा, सलमान खुर्शीद, संदीप दीक्षित, अजीत जोगी, रेणुका चौधरी, पीएल पूनिया के साथ विशेष आमंत्रित सदस्य मोहन गोपाल भी होंगे.इसी तरह संवाद और प्रचार उप समूह का जिम्मा कांग्रेस में सबसे मुखर नेता दिग्विजय सिंह को सौंपा गया है. दिग्विजय के अलावा इस सात सदस्यीय उप समूह में पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, मौजूदा सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला के साथ-साथ दीपेंद्र हुड्डा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और भक्त चरणदास को जगह दी गई है. जनार्दन द्विवेदी के मुताबिक, संवाद बैठक में हुए विमर्श के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने ये फैसले लिए हैं.

राहुल की बड़ी भूमिका का एलान करने के साथ ही कांग्रेस ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए भी सरकार व संगठन को सक्रिय कर दिया है. कांग्रेस महासचिव व मीडिया विभाग के चेयरमैन जनार्दन द्विवेदी ने राहुल की अध्यक्षता वाली चुनाव समन्वय समिति के साथ-साथ तीन अन्य समितियों की घोषणा की. समन्वय समिति के अलावा अन्य समितियों में युवा नेताओं को भी जगह दी गई है, लेकिन वास्तव में बागडोर कांग्रेस के पुराने दिग्गजों के हाथ ही होगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.