/सुहागरात को पति के सात दोस्तों ने किया गैंगरेप….

सुहागरात को पति के सात दोस्तों ने किया गैंगरेप….

यूपी के औरंगाबाद क्षेत्र के अशरफपुर गांव के मोनू ने पहले तो गाँव की एक लडकी को अपने प्रेमजाल में फंसाया और बाद में उसे भगाकर गाज़ियाबाद ले गया ठाठ मंदिर में शादी कर ली. युवती बहुत प्रसन्न थी कि जिससे उसने प्यार किया उसीसे शादी भी हो गयी. मगर सुहागरात को न केवल उसके सारे सपने ही चकनाचूर हो गए बल्कि असहनीय मानसिक और शारीरिक पीड़ा और अपमान भरी काली रात बना दिया गया. उसके पति ने उसको सुहागरात के दिन दोस्तों के हवाले कर दिया. दोस्तों ने उससे सामूहिक बलात्कार किया. पीडिता अशरफपुर गांव की रहने वाली है. वह पिछले 4 साल से गांव के युवक मोनू से प्यार करती थी. 18 अक्टूबर की रात वह घर से ढाई लाख कीमत के सोने-चांदी के गहने लेकर मोनू के साथ भाग गई. मोनू ने गाजियाबाद में किराए पर कमरा ले रखा था.

20 अक्टूबर को दोनों ने एक मंदिर में जाकर शादी कर ली. शादी के बाद जब वह अपने कमरे पर पहुंची तो उसका प्रेमी उसे छोड़कर दोस्तों के साथ शराब पीने चला गया. देर रात वह अपने सात दोस्तों के साथ आया और उसे दोस्तों के हवाले कर दिया. पीडिता को एक महीने तक बंधक बनाकर रखा गया.

पीडिता के पिता ने 18 अक्टूबर को औरंगाबाद थाने में तहरीर देकर गांव के ही एक युवक पर बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाया था. पुलिस तभी से इस प्रेमी जोडे की तलाश कर रही थी. पांच दिन पहले बुलंदशहर पुलिस ने परिजनों की मदद से युवती को गाजियाबाद के बस स्टैंड चौराहा से बरामद कर लिया.

एसपी सिटी श्रीकांत यादव ने बताया कि लड़की अपने बयान कई बार बदल चुकी है. शुरूआती पूछताछ में उसने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की. दो दिन पहले लड़की ने मैजिस्ट्रेट के सामने अपने साथ हुए गैंगरेप का खुलासा किया. पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराया है. पुलिस लड़की के बयानों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.