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पत्रकार हैं या मवाली जो रिवाल्वर चाहिए…

By   /  November 17, 2012  /  2 Comments

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एक मेल द्वारा प्राप्त इस खबर की सच्चाई जानने के लिए जब मीडिया दरबार ने अमर उजाला के इस कथित पत्रकार से फोन पर यह जानना चाहा कि उसे किससे जान का खतरा है जो अखिलेश यादव से रिवाल्वर का लाइसेंस मांग रहे हो तो इसका कहना था का कि आग्नेय शस्त्र रखना इटावा की संस्कृति है इसलिए मुझे भी रिवाल्वर रखना है. अब इसे कौन समझाए कि कलम के सिपाही का हथियार रिवाल्वर तो कत्तई नहीं हो सकता और जो रिवाल्वर के बूते पत्रकारिता करना चाहे वो कलम का सिपाही नहीं हो सकता…

सैफई मे अमर उजाला के नये पत्रकार अन्नू शुक्ला उर्फ अश्वनी शुक्ला को सैफई के पत्रकार होने का सबूत भी नही मिला और उन्हे जान का खतरा भी उत्पन्न हो गया है. अपनी जान को खतरा बताकर उन्होने मुख्यमंत्री से रिवाल्वर/पिस्टल का लाइसेंस तत्काल दिलाये जाने की मॉग कर डाली.  मुख्यमंत्री को दिया गया यह पत्र मीडिया जगत मे चर्चा का विषय बना हुआ है.

कुछ दिन पूर्व ही अमर उजाला ने अपनी शर्तो पर काम करने के लिये सैफई तहसील क्षेत्र से काम करने के लिये नये पत्रकार को ढूढॅ लिया है. ये नये पत्रकार जसवन्तनगर के अन्नू शुक्ला है जो सैफई से 14 किलोमीटर दूर जसवन्तनगर क्षेत्र के गॉव कोठी कैस्त मे रहते है.

12 नवम्बर को सैफई मे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जनता दर्शन के दौरान दिये गये पत्र मे अन्नू शुक्ला ने बताया कि मै सैफई से अमर उजाला का पत्रकार हूँ तथा समाचार कवरेज के लिये सैफई मे रात्रि मे आना जाना रहता है इसलिये मुझे तत्काल शस्त्र लाइसेस दिया जाये. क्यो कि परिवार मे मेरी 3 वहिने है जिनकी सारी जिम्मेदारी मेरे कन्धे पर है. इसलिये मुझे तत्काल शस्त्र लाइसेस दिया जाये. जब कि सच्चाई यह है कि अमर उजाला ने अन्नू शुक्ला को अभी ना ही कोई कार्ड बनाकर दिया है और ना ही अथेारिटी लेटर जारी किया है. और ना ही अमर उजाला इनको अपना पत्रकार मानता है.

सूत्रो द्वारा जानकारी मिली हैं कि सैफई मे अभी सिर्फ 70 अमर उजाला आ रहा है जब कि डेढ माह पहले लगभग 400 आता था. अमर उजाला ने स्पष्ट कह दिया है कि जब तक सेफई मे 500 अमर उजाला नही बिकेगा तव तक अन्नू शुक्ला अपने को पत्रकार ना कहे. हालॉकि अमर उजाला मजवूरी मे अन्नू शुक्ला की खवरे जरूर छाप रहा है. क्यो कि अमर उजाला के पत्रकार वी0पी0 सिहॅ यादव ने खवर देना वन्द कर दिया है उनका लगभग डेढ लाख रूपया अमर उजाला पर बाकी है जिसकी शिकायत उन्होने की है. अभी तक वी0पी0 सिहॅ को अमर उजाला ने अपने से अलग नही किया. क्यो कि अगर नबम्बर के आखिरी सप्ताह तक अगर नये एजेन्ट अनिल कुमार ने 500 अखवार की बिक्री नही की तो अन्नू शुक्ला को हटा दिया जायेगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. nakul sundesha says:

    पत्रकार अगर सही जानकारी खोज कर लिखता हे जो खबर लेने में उसे कितनी मुश्किले यहाँ तक की जान का जोख़िम भी उठाना पड़ता हे तो आखिर पत्रकार को मिलता क्या हे
    वाही इसे मामले में पुलिसे व इस मामले से जुड़े लोग इस खबर को सेटलमेंट का नाम देकर कार्यवाही को हल्का बनाया जातः हे
    एक मामला गोरख धंधे का हो जिसका पर्दा फाश पत्रकार द्वारा किया जाता हे
    वाही मामला पुलिस में जाकर किसी की सिफारिश से सेटल मेंट के नाम पर हल्का बनाया जाता हे

    तो उस गोरख धंधे वाले का घर का गुजर धंधे से चलेगा
    पुलिस वाले का नोकरी की तनख्वाह से चलेगी
    लेकिन उस पत्रकार को क्या मिलता हे जिसने इसे खबरे का पर्दाफाश आपनी जान जोखिम में ड़ाल कर उस धंधे का पर्दा फाश किया
    आखिर उसे तो मिलती हे महंगाई से तिलमिली जिन्दगी
    जो खबर लेने के लिए मोटरसायकल में पेट्रोल भर कर हुई घटना जानकारी लेने जाने का भी समजोता करना पड़ता हे
    आखिर ईमान दार पत्रकारों का भविष्य छोटे शहर में क्याहोगा
    ये कोई बता सकता हे

  2. Nirmal Singh says:

    क्या सारे शस्त्रं लाइसेंस का आवेदन करने वाले मवाली होते है, आत्मरक्षा के लि‍ये लि‍ये सरकार से शस्त्र लाइसेंस मागंना अभी तक भरतीय संवि‍धान में कोई अपराध नही है। दरअसल इस मेल को भेजने वाला बुरी तरीके से मानसि‍क रोग से पीडि‍त है। हम सब को मि‍लकर उसके सीघ्र ही स्वस्थ होने की कामना करनी चाहि‍ये।

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