/जैसलमेर सम के धोरों बही नशे के खुमार की बयार

जैसलमेर सम के धोरों बही नशे के खुमार की बयार

निजी टीवी चैनल का कार्यक्रम रहा नशे में सरोबार/ देर रात तक चली म्यूजिक पार्टी ने किया आस पास के ग्रामीणों को परेशान

जैसलमेर से मनीष रामदेव।

जैसलमेर… पर्यटन के क्षेत्र में वह नाम जो किसी पहचान का मोहताज नहीं हैं, देश विदेश से सैलानी इस सीमावर्ती शहर की स्वर्णिम आभा को निहारने के लिये लाखों रूपये खर्च कर हर वर्ष यहां आते हैं। जैसलमेर का सोनार किला हो या नक्काशीदार हवेलियां हो या रेगिस्तान में नखलिस्तान का आभास कराने वाली गडीसर झील हो या फिर सम के रेतीले धोरे हो, यहां एक बार आने के बाद सैलानी यहां की यादों को अपने जेहन से नहीं निकाल पाता है। रेगिस्तान की इसी छवि के सहारे एक निजी चैनल द्वारा 16, 17 व 18 नवम्बर को जैसलमेर के सम के धोरों के पास एक अय्याशी भरे कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें 18 से 30 उम्र के युवाओं ने शिरकत की और सम के धोरों के बीच मदहोश मस्ती की। हालांकि कार्यक्रम निजी चैनल द्वारा अयोजित किया गया था और निजी भूमि पर किया गया था लेकिन इस कार्यक्रम के दौरान देर रात तक बजे म्यूजिक ने आयोजन स्थल के पास बसे ग्रामीणों की रातों की नींद हराम कर दी और इतना ही नहीं रात 10 बजे से आरम्भ होकर सुबह 6 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम को यहां रोकने वाला तक कोई नहीं था।
निजी चैनल के इस कार्यक्रम में तीन दिनों तक सम के पास स्थित कनोई गांव में भव्य आयोजन के लिये सैट लगाये गये थे जिसमें देशी व विदेशी संगीत से जुडे कार्यक्रम किये गये रॉक बैंड, अफ्रिकन बैंड सहित कई विदेशी कलाकारों ने इस कार्यक्रम के भव्य स्टेज से अपनी प्रस्तुतियां दी जिसमें युवा वर्ग की मदहोशी साफ दिखाई दे रही थी। बात करें अगर संगीत संसाधनों की तो अंतरार्ष्ट्रीय स्तर के म्यूजिक सिस्टम द्वारा देर रात तक तेज आवाज में चल रहा म्यूजिक दिल की धडकनों को बढा देने वाला था, आस पास के ग्रामीणों की मानें तो ये तीन राते इनके लिय काली रातों से कम नहीं थी क्योंकि इन तीन दिनों में तेज ध्वनि प्रदूषण के चलते उनके घरों में न तो बच्चे सो पाये और न ही वे खुद चैन की नींद ले पाये और इतना ही नहीं इस आयेाजन स्थल के आस पास स्थित अन्य पर्यटक केंपों के पर्यटक भी इस बात की शिकायत दर्ज करवाते पाये गये लेकिन इनते सब के बाद भी इन्हें रोकने वाला यहां पर कोई नहीं थी।
माना की इस प्रकार के आयोजन जैसलमेर शहर को पहचान दिलाने में कारगर साबित होते हैं लेकिन यहां के स्थानिय लोगों की उपेक्षा किसी भी हद तक जायज नहीं है। शहर में पर्यटन व्यवसाय को बढावा देने बात करने वाले इस कार्यक्रम के स्थानीय आयोजकों को भी यहां की स्थानीय जनता की सुविधाओं को दाव पर लगाने का कोई हक नहीं है। एक तरफ जहां माननीय उच्चतम न्यायलय के देर रात तक तेज आवाज में लाउड स्पीकर चलाने की बात कहीं जाती है वहीं रात भर चलने वाले इस कार्यक्रम को नियमों से क्यों परे रखा गया यह कोई नहीं जानता है। बात किसी को परेशान करने या फिर कार्यक्रम की गलतियां गिनवाने की नहीं है बात है इस प्रकार के कार्यक्रमों की मर्यादाओं को सीमित करने की और इन मर्यादाओं के लिये जिला प्रशासन को व पुलिस को सख्त रवैया इख्तेयार करने की आवश्यकता है।

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मनीष रामदेव बरसों से जैसलमेर से पत्रकारिता कर रहे हैं. वर्तमान एल्क्ट्रोनिक मीडिया के साथ साथ वैकल्पिक मीडिया के लिए भी अपना समय दे रहे हैं. मनीष रामदेव से 09352591777 पर सम्पर्क किया जा सकता है.