/जमीन की खातिर भाई को 27 साल पहले ही मृत बता दिया

जमीन की खातिर भाई को 27 साल पहले ही मृत बता दिया

-बाड़मेर से चन्दन भाटी||
जमीन की खातिर भाई भाई का दुश्मन बन जाता है. यह बात सुभान के परिवार पर सोलह आने सच साबित हो रही है. धनोड़ा निवासी सुभान के भाई ने ही उसे 27 साल पहले मृत घोषित कर ग्राम पंचायत से मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवा दिया. खातेदारी जमीन हड़पने के लिए यह कदम उठाया गया. जब हकीकत का पता चला तो सुभान बोला मैं तो जिंदा हूं. इतना ही नहीं खातेदारी भूमि को लेकर विवाद बढ़ा तो सुभान ने न्यायालय की शरण ली.

खमीशा उर्फ सुभान पुत्र अली मोहम्मद निवासी धनोड़ा (भादरेस) की पैतृक गांव में खसरा न. 113 व 154 में संयुक्त खातेदारी भूमि है. उसके भाई ने खातेदारी जमीन हड़पने के लिए 19 अक्टूबर 2001 को ग्राम पंचायत भादरेस में खमीशा उर्फ सुभान का मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाया. जिसमें बताया कि 15 अप्रैल 1985 में खमीशा की मृत्यु होने की पुष्टि की गई.

इस प्रमाण पत्र के आधार पर खातेदार भूमि अपने नाम करवाने की साजिश रची गई. इसकी सूचना मिलने पर सुभान ने ग्राम पंचायत के सरपंच के समक्ष उपस्थित होकर जिंदा होने का दावा किया. इस पर तत्कालीन सरपंच सुखाराम ने खमीशा के जिंदा होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया. इस दरम्यान उसके भाइयों ने ही खातेदार भूमि पर कब्जा कर दिया. विवाद बढ़ा तो मामला कोर्ट में चला गया. बावजूद इसके खमीशा के भाई उक्त भूमि पर कब्जा करने में जुटे हैं. इस पर खमीशा ने न्यायालय में एक वाद दायर कर खातेदारी भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए स्टे देने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है. एडवोकेट मदन सिंघल ने बताया कि खमीशा का वाद दायर किया गया है. उसे न्याय मिलने की उम्मीद हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.