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तिब्बत में एक और युवा का आत्मदाह, आत्मदाह करने वालों की संख्या 81 हुई…

By   /  November 24, 2012  /  2 Comments

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-धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

तिब्बत में एक और तिब्बती युवा द्वारा आत्मदाह करने से महामहिम दलाईलामा और तिब्बती प्रशासन चिंता में है. इस यूवा के आत्म दाह से चीन की ज्यादतियों के खिलाफ आत्मदाह  करने वालों की संख्या 81 हो गई है. धर्मशाला में तिब्बती प्रशासन का कहना है कि अब तिब्बत में स्थिति काफी गम्भीर हो चुकी है. तिब्बती प्रशासन के अनुसार 29 वर्षीय सेखोग जे़कू ने कल शाम लगभग 6 बजकर 30 मिनट पर उतरी पूर्वी तिब्बत में डोकमों नगर में आत्म दाह कर लिया. मरते समय इस युवा ने हाथ जोड़कर दलाईलामा की दीघ्र आयु की कामना की और आत्मदाह कर लिया. इस यूवा की मौके पर ही मौत हो गई. उसके अंतिम संस्कार में  हजारों तिब्बतीयनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धाजलि दी. इस बारदात के बाद चीन सरकार ने इस क्षेत्र की सभी संचार व्यव्स्था को काट दिया है. तिब्बत में इस आत्मदाह से पहले 5 अन्य ने पिछले 6 दिन के अंदर आत्म दाह किया है इससे एक महीने में मरने वाले तिब्बती युवाओं की संख्या 19 हो गई है.

तिब्बती प्रशासन का कहना कि आत्मदाह की यह बढती प्रवृति चौंकाने वाली है. आत्मदाह करने वाले सभी यूवा तिब्बत की आज़ादी और दलाईलामा की तिब्बत में वापसी की मांग कर रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र संघ में मानवाधिकार के कमिश्नर नेवी पिले ने इस महीने के आरम्भ में चीन सरकार से आग्रह कर तिब्बत में तिब्बती लोगों की जायज मांगों पर गौर करने का आग्रह किया था जिससे आज तिब्बत में स्थिति इतनी गम्भीर हो गई है जिससे तिब्बती युवा आत्मदाह जैसे कदम उठाने पर उतारू हो गए है. उन्होने कहा था कि तिब्बत में लगातार हिंसा से तिब्बती लोगों द्वारा तिब्बत में मानवाधिकारों की बहाली की लगातार मांग की जा रही है.

तिब्बती प्रशासन का कहना है कि नेवी पिल्ले  की जोरदार मांग और अमेरिका के एम्बेसडर गेरी लाक के तिब्बत दौरे से यह सिद्ध हो जाता है कि तिब्बत में स्थिति कितनी गम्भीर है और इसमें विश्व भर को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है. उन्होने यह भी कहा है कि चीन सरकार को संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतर्राष्ट्रीय संस्था की 12 सूत्री सुझाव पर तुरंत कारवाई करनी चाहिए न  की वे तिब्बतियों पर ही दोशारोपण करता रहे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. tiwari b l says:

    ये तो बहुत गलत हो रहा है यदि ये मरने वाला दो चार चीनियों को मर के मरता तो कुछ बात आगे होती विचार भी आगे जाता ये आतिम्हात्तिया तो कायारना काम है ये जो ८१ जलकर मरगये है ये यदि ये १०० चीनी मरते हो पूरा संसार सुनता ये आतीं हत्तिया बन्द होनी कहिये दुश्मन को मार कर ही मरना ठीक है

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