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माफ़ी क्यों मांगे नरेन्द्र मोदी??

By   /  November 26, 2012  /  3 Comments

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गुजरात के चुनाव जैसे जैसे निकट आते जा रहें है एवं चुनावी समर की सरगर्मियां बढती जा रही हैं वैसे वैसे ही अनेकों विश्लेषण और विचार प्रकट हो रहें हैं विशेषता है तो केवल यह की कोई भी व्यक्ति, नेता, समाचारपत्र या चैनल द्वारा नरेन्द्र मोदी को दो तिहाई बहुमत मिलनें में किसी भी प्रकार की शंका कुशंका व्यक्त नहीं की जा रही है. निःसंकोच यह कहा जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी चुनाव मैदान में हों या किसी अन्य प्रकार के अभियान में, जहां वे होते हैं वहां गुजरात दंगो की छाया और गोधरा में नृशंसता पूर्वक ज़िंदा जला कर मार डाले गए 15 बच्चों सहित 59 व्यक्तियों की चर्चा होती ही है. ये स्वाभाविक ही है कि भीषण, नृशंस व दिल दहला देनें वाली घटनाओं को लोग स्मृत करें और उसके सम्बन्ध में चर्चा आदि करतें रहें. यह भी स्वाभाविक ही है कि उस घटना या उस से जुड़ी परिस्थितियों या परिणामों का अध्ययन करतें रहें; किंतु यह घोर अस्वाभाविक और विचित्र ही है की लोग गुजरात की घटनाओं के सन्दर्भ में एकपक्षीय या एकराग अपनाएँ रहें और इतिहास और उससे जुड़े तथ्यों और सच्चाईयों की अनदेखी करतें रहें. 

 

कल ही प्रसिद्द मुस्लिम नेता और वाईंट कमिटी के अध्यक्ष सैयद शहाबुद्दीन ने फिर एक अनोखा और विवाद उत्पन्न करनें वाला व्यक्तव्य दिया है. एन गुजरात चुनाव की पूर्व बेला पर जब  पुरे राष्ट्र में यह हवा चल पड़ी है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व भाजपा दो तिहाई बहुमत हासिल कर रही है और विकास के मुद्दे पर न केवल हिन्दू बल्कि कुछ मात्रा में मुस्लिम बंधू भी नरेन्द्र मोदी को वोट देनें के लिए मानसिक रूप से तैयार होते दिख रहें है तब ऐसे समय में सैय्यद शहाबुद्दीन का बयान अनावश्यक होनें के साथ साथ गुजरात में हुए गोधरा हत्याकांड की टीस और वेदनां को पुनर्जागृत करनें वाला तो होगा ही साथ ही साथ एक प्रकार की खीझ भी उत्पन्न कर संघर्ष की स्थितियों का निर्माण भी कर रहा है.

बड़े ही हास्यास्पद ढंग से मुसलमानों के मतों का प्रलोभन या लालीपाप दिखाकर जिस ढंग से सैय्यद शहाबुद्दीन ने नरेन्द्र मोदी से गुजरात दंगों की माफ़ी मांगनें को कहा है वह अत्यंत ही क्षोभ जनक और चिढ व खीझ उपजानें वाला विषय लगता है. लगता यह भी है कि गुजरात के अनेकों मुस्लिम बंधुओं में नरेन्द्र मोदी के प्रति उपजें विश्वास, सुरक्षा, विकास और सामाजिक समरसता के बढ़ते भाव और उस भाव के वोटों में परिवर्तित हो जानें के डर भय से सैय्यद शहाबुद्दीन ने यह विवाद उत्पन्न करनें वाला बयान जारी किया है. गुजरात मुस्लिमों की 10 संस्थाओं की वाइंट कमेटी ने मोदी के सामने यह शर्त रखी है कि मोदी यदि 2002 में हुए गुजरात दंगों के लिए माफी मांगते हैं तो उन्हें समर्थन की अपील की जा सकती है. वाइंट कमेटी के चेयरमैन शहाबुद्दीन का कहना है कि मुसलमानों को लेकर मोदी के नजरिए में बदलाव आ रहा है. मोदी और भाजपा गुजरात विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को विशेष महत्त्व दे रही है “लेकिन देश का मुस्लिम समुदाय 2002 का दंगा भूला नहीं है” – यह बयान जारी करनें के समय और परिस्थितियों का यदि हम आकलन करें तो हमें महसुस होगा कि यह बयान मात्र सनसनी और चिढ खीज को उत्पन्न करनें के लिए ही दिया गया है.

नरेंद्र मोदी से माफ़ी की मांग करनें वालों से प्रश्न ही नहीं बल्कि यक्ष प्रश्न या ब्रह्म प्रश्न है कि  यदि साबरमती रेलगाड़ी से अयोध्या से कारसेवा कर लौट रहे ५६ यात्रियों की ज़िंदा जलाकर नृशंसता पूर्वक ह्त्या यदि नहीं की गई होती तो क्या गुजरात के दंगे होते? गुजरात के चुनावी समर में तीसरी बार विजय श्री की माला पहननें को तैयार खड़े मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से माफ़ी मांगनें की बात कहनें वालें और उन्हें मुसलामानों के वोटों का लालच दिखानें वालें सैय्यद शहाबुद्दीन से प्रश्न यह भी है कि गोधरा के जघन्य और नृशंस साबरमती ट्रेन हत्याकांड के लिए भी कोई क्षमा मांगनें को तैयार है क्या?? गुजरात के दंगो के लिए नरेन्द्र मोदी को पानी पी पी कर दोषी ठहरानें वालें सभी लोगों सहित सैय्यद शहाबुद्दीन को यह कब समझ आयेगा की गुजरात के दंगे एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रया थे और प्रकृति का अटल,अटूट, स्थापित नियम है की प्रतिक्रया तभी होती है जब कोई क्रिया हो. किसी शांत और सभ्य होनें का सदियों का इतिहास साथ लेकर चलनें वाला शांतिप्रिय गुजराती समाज भड़का तो क्यों भड़का और इतना अधिक क्यों भड़का इस बात पर आखिर कोई भी बहस क्यों नहीं करना चाहता यह समझ से परे है.

 

उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन पर एक हिंसक भीड़ द्वारा दो कोचों में आग लगा कर कोच संख्या एस-6 में 25 महिलाओं और 15 बच्चों समेत 59 लोगों की जघन्य और नृशंस ह्त्या कर गई थी यही वह क्रिया थी जिसनें प्रतिक्रया करनें के लिए शांत प्रकृति के लिए विश्वविख्यात गुजरातियों को उकसाया. इन कोचों में यात्रा कर रहे अधिकांश विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ता या समर्थक थे जो उत्तरप्रदेश के अयोध्या से श्री राम जन्मभूमि अभियान एक अभियान में कार सेवा करके लौट रहे थे. इस शुद्ध रूप से प्रायोजित जघन्य और नृशंस हत्याकांड के बाद प्रदेश भर में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा में हजारों लोगों की जान गई थी जिसमें अधिकांश एक खास समुदाय के थे.

नरेन्द्र मोदी से माफ़ी मांगने का कहनें वालें शहाबुद्दीन और उनकी दस मुस्लिम संगठनों की सम्मिलित संस्था वाईंट से पूरा देश यह प्रश्न भी करना चाहता है कि कारसेवकों की ह्त्या को एक सभ्य, सामाजिक और शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करनें वाला एक आम गुजराती कैसे भूल जाएँ? क्या ये लोग उन  लोगों को  भी माफ़ी मांगनें का परामर्श देंगे जो गौमांस का भक्षण कर इस देश के सौ करोड़ लोगों का दिल आये दिन दुखाते रहतें हैं?? क्या इस देश में यह तथ्य अनोखा या नया है कि इस  देश के मूल निवासी गाय को अपनी माता तो मानते ही हैं साथ साथ उसे ईश्वर के तुल्य भी मानतें है और स्वयं गाय में तैतीस करोड़ देवी देवताओं का वास भी मानते हैं. केवल यह एकमात्र मुद्दा नहीं है!!  मुद्दे कई और भी हैं जिन पर माफ़ी मांगी और मंगवाई जा सकती हैं!! पर क्या कोई इस देश में इन मुद्दों और विषयों पर चर्चा करनें का भी साहस कर पा रहा है??? आज पुरे देश को यह स्पष्ट और साफ़ समझ लेनें का समय है कि क्रियाएं न होगी तो प्रतिक्रियाएं भी न होगी और न ही एक दुसरें से माफ़ी और क्षमा मांगनें जैसी स्थितियां निर्मित होंगी. नरेन्द्र मोदी को माफ़ी मांगनें की कोई आवश्यकता नहीं है आवश्यकता है एक समरस, सद्भावी, एक दुसरें के विश्वासों, आग्रहों, परम्पराओं और धर्म स्थानों के आदर पूर्वक निर्वहन करनें वालें समाज की स्थापना की जो नरेन्द्र मोदी जैसा कुशल प्रशासक और नेता ही कर सकता है.  जय  गर्वी गुजरात!!!

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About the author

म.प्र. के आदिवासी बहुल जिले बैतुल में निवास. “दैनिक मत” समाचार पत्र के प्रधान संपादक. समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन. प्रयोगधर्मी कविता लेखन में सक्रिय .

3 Comments

  1. RAvi says:

    वैरी गुड आंसर to मुस्लिम कम्युनिटी

  2. tiwari b l says:

    जिस दे देश को वाट बा दिया हिन्दुयो के आर्धय पूजा इएस्थल भ्रिस्ट करवा दिए कैलाश मानसरोवर चला गया उस कांग्रेस से मफ्फी की बात कोण करेगा गोधरा मई निर्दोष कै सेवको को मासूमो को जला डाला एईस की मफ्फी कोण मंगेवाला है कितने बोम आकिर्मन धार्मिक ईस्थानो पर हूए कितने हिन्दू मारे गए इएस की मफ्फी कोण मांगे ने वाला है मोदी को किस बात की माफ़ी मागने की बात कोण उठारह है किस के पेय्रोकार है ये बकील साहब किय इएन हत्तिया रो से माफ़ी माँगा है मुम्बये की माफ़ी आल्ल्हादा की गन्न्धिद्हम की माफ़ी कोण मांगेगा ये राजनैतिक साजिस है चुनायो को देखा कर ये फंन्दे बजी हो रही है हिन्दू किय बेबकुफ़ है मुस्लमान किया इएस देश का मालिक बन्ने जा रहा है किस से कोण माफ़ी मांगे ये तीय तो होजये

  3. MUSALMAN HAMESH SOUDA HI YAIY KARTA HAI VO CHORAHE PAR KHADA HAI BOLO KAIY KIMAT LAGAYOGE YE KAAM CONGRES HI KAR SAKTI HAI KHARID NE BECHANE KA MUSALMAN UNIHI SE KHULA SOUDA KAIYO NAHI KAR LETA HAI LOKTANNARY KI PARIBHASHA TO KEWAL CONGRES HI SAJHA SAKTI HAI UKNKA LOKTANNAT ALAGA HI CHALTA HAI.

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