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पूर्व छात्र योगेश कुमार शीतल की शिकायत: IIMC के टीचर कर रहे हैं बदनाम

By   /  August 4, 2011  /  1 Comment

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आईआईएमसी के बहुचर्तित पूर्व छात्र योगेश कुमार शीतल ने रहस्योद्घाटन किया है कि उसने संस्थान में ऐडमिशन की परीक्षा दो बार दी थी। पहली बार लिखित परीक्षा में पास होने के बावजूद उसे इंटरव्यू में छांट दिया गया था। बकौल योगेश, आईआईएमसी में भ्रष्टाचार बहुत गहरे जड़ जमाए बैठा है और इसका विरोध करने के कारण ही उले लक्ष्य बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि योगेश कुमार शीतल 2010-11 सत्र का छात्र था और उसने इंडिया गेट पर एनडीटीवी की एडीटर बरखा दत्त की हूटिंग करने में अहम भूमिका निभाई थी।

बताया जाता है कि इसके बाद जहां एक तरफ योगेश मीडिया और सामाजिक संगठनों में हीरो बन गया वहीं संस्थान के कुछ शिक्षकों की नजर में चढ़ भी गया। आईआईएमसी के एक शिक्षक आनंद प्रधान ने तो एनडीटीवी में कार्यरत अपनी एक मित्र के निजी खत पर योगेश को कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया था। इधर जब प्रधान पर पूर्व छात्रों ने ज्यादा आरोप लगाए तो संस्थान ने कई छात्रों के फेसबुक अकाउंटों को अपने यहां से बंद कर दिया गया। योगेश का पत्र इस प्रकार हे-

“मै अपने ऊपर लगे दाग को धोना चाहता हूं… मेरा रिटेन और इंटरव्यू सबकुछ ठीक से होने के बाद भी कक्षा में प्रधान सर का कहना था कि मैं यहां पैरवी से आया हूं। मै बताना नहीं चाह रहा था लेकिन अब साफ़ कर देना चाहता हूं कि मैंने आईआईएमसी की प्रवेश परीक्षा दो बार दी थी। पहली बार मेरा चयन रिटेन में ही हो पाया था साक्षात्कार में मै छंट गया था। अगर पैरवी वाली बात में दम है तो उसी साल मेरा दाखिला हो जाना चाहिए था। पैरवी किसी और ने की होगी और बदनामी मेरे मत्थे मढ़ दी गई। इसका कारण बस ये था कि संस्थान में होने वाले केम्पस प्लेसमेंट में बेहद कम पैसे दिए जाने की बात मैंने भड़ास के मंच से उठाई थी।

इस कथित गलती की सजा कोई शिक्षक किसी छात्र को ये कह कर नहीं दे सकता कि उसकी प्रतिभा में ही खोंट है। उस घटना के बाद मुझे जिन आरोपों का सामना करना पड़ा और मेरी जितनी बदनामी हुई उसकी तुलना में ये सब कुछ भी नहीं है। प्रधान सर अपना बोया हुआ काट रहे हैं। मै चाहता हूं कि मेरी कोपी सार्वजनिक की जाय और अगर ये साबित होता है कि मेरा दाखिला किसी के आशीर्वाद से हुआ है तो मै पत्रकारिता से संन्यास लेने के साथ ही संस्थान में कभी कदम नहीं रखूँगा। साथ ही संस्थान में दाखिले पर कोई शक कि गुन्जाईश नहीं रहे इसके लिए जरुरी है कि इस सत्र हुए नामांकन प्रक्रिया कि निष्पक्ष जांच हो।”

योगेश कुमार शीतल ने फेसबुक के अपने पृष्ठ पर एक अपील भी प्रकाशित की है जो इस प्रकार है:-

“पिछले दिनों आईआईएमसी में दाखिले में हुई धांधली को लेकर हुआ पर्दाफाश के बाद जिस कम्युनिटी पर छात्रों का जुटान शुरू हुआ था और कई चौकाने वाले सबूत धीरे धीरे सामने आ रहे थे उस कम्युनिटी को कुछ लोगों के लिए ब्लोक कर दिया गया है। बेशक आईआई एम सी प्रशासन ने डर कर ये कायरता पूर्ण कार्रवाई की है। गौरतलब हो कि दाखिले में धांधली की खबर के बाद प्रवेश परीक्षा में अनुत्तीर्ण कई विद्यार्थियों ने आरटीआई का इस्तेमाल कर अपनी कॉपी की छायाप्रति लेने की मांग की है जिससे आई आई एम सी प्रशासन घबराया हुआ है।

 हिंदी पत्रकारिता के गत सत्र के छात्र को आनंद प्रधान पहले ही पैरवी से आने की बात बीच कक्षा में कह चुके हैं. इससे आनंद प्रधान के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिल रहा है। फेसबुक पर ठोस सबूतों को सार्वजनिक करते हुए एक छात्र ने सत्र 2011 -12 के क्रमांक JA 10081 की जांच की मांग की तो हंगामा मच गया और देखते देखते आईआईएमसी प्रशासन के खिलाफ लोगों ने एक से एक साक्ष्य सार्वजनिक करना शुरू कर दिया. पिछली बार अनुत्तीर्ण रही दीपाली ने मुझे फोन कर बताया की उन्हें उस कम्युनिटी पे ब्लोक कर दिया गया है. दीपाली के अलावे भी कई पीड़ितों को ब्लोक कर दिया गया है ताकि सच्चाई दब जाय. गोया आंख बंद करने से शेर नहीं आये!!! आप सब से आग्रह है कि परदा फाड़ने में मदद करें।”

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. नितिन ठाकुर says:

    आईआईएमसी को दुकान बनाकर बहुत दिनों से चलाया जा रहा होगा मगर कोई भी बड़े बागड़बिल्लों के खिलाफ नहीं बोलना चाहता।योगेश ने आवाज़ उठाकर शांत पडे पानी में पत्थर फेंका है।

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