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मैं सेक्स के लिए पुरुषों का इस्तेमाल टिशू पेपर की तरह करती हूं

By   /  November 30, 2012  /  16 Comments

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“मैं सेक्स के लिए पुरुषों का इस्तेमाल टिशू पेपर की तरह करती हूं और इस्तेमाल के बाद फेंक देती हूं.” बोलने वाली तमिल फिल्मों की हिरोइन सोना हेडन उक्त बयान देने के बाद मुश्किल में फंसती नज़र आ रही है.

पुरुषों के हितों के लिए काम कर रही एक संस्था ने सोना के इस बयान के बाद उसे कोर्ट में घसीट लिया और गुरुवार को कोर्ट ने इस मामले में प्रसंज्ञान लेते हुए सोना हेडन को समन जारी कर दिया है.

गौरतलब है कि सोना हेडन ने एक तमिल पत्रिका को साक्षात्कार देते समय पुरुषों को नागवार गुजरने वाली ऐसी टिप्पणियाँ की थी. सोना ने तो मर्दों को सिरदर्द मानते हुए यहाँ तक कह डाला कि “मैं शादी में विश्वास नहीं करती, मर्दों के साथ रहना सबसे बड़ी बेवकूफी है”

सोना हेडन के इस बयान के बाद पुरूषों के हित के लिए संघर्षरत एक संस्था ने मंगलवार को वेल्लूर कोर्ट में यह कहते हुए अपील की थी कि हेडन के इस बयान से पुरूषों की भावनाओं को ठेस पहुंची है. हेडन को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए. इतना ही नहीं बल्कि संस्था ने हैडन के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत भी चाही है. कोर्ट ने हेडन के खिलाफ गुरूवार को समन जारी किया है.

हालाँकि विवाद बढ़ने पर सोना हेडन ने मामले को रफा दफा करने की नियत से विवाद से किनारा कर लिया था मगर अब यह विवाद सोना हैडन का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

16 Comments

  1. Rakesh Yadav says:

    yes besya ka kam hai.

  2. Namaskaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaar!

  3. वस्तुतः एक मनोवैज्ञानिक बिमारी है, और इसके पीछे कारण self satisfaction की है, जो वो चाहती हैं , सम्भव है वह पूरा नहीं हुआ है अबतक, िसलिये खिंझ, चिड़चिड़ापन ने उन्हें घेर लिया है और इन विकृतियों के अनुकूल उनका जीवन ढ़लता जा रहा है. यही सामाजिक तौर पर मर्दों के अवहेलना का कारण है ।.

  4. beta aysa nahi karate.

  5. wo bhi aadmi hai jisse yes paida hui hai.

  6. Kailash Soni says:

    iske bare me mahila aayog ki kya prtikriya hai bo inhe sapot kar rahi hai ya is per bolne ki kosis karegi.

  7. सही कह रही हो सोना …
    तुन सिर्फ नाम की ही होना हो , किन्तु तुम्हारा असली चेहरा कितना घिनोना है यह बात आपकी कहे शब्दों से साफ पता चलती है…….
    शयद आप यह भूल गई की कोई आदमी भी किसी औरत को टिशु पेपर की तरह इस्तेमाल कर सकता है …., & शायद कभी वो औरत आप भी हो सकती हो….
    कुलवंत मित्तल – आगरा

  8. eanka jabab deana jaruari hia agar admia tisua peapar ay kya hia.

  9. Om Prakash says:

    abhi tak to suna tha ki purush hi mahilao ko tissu paper samajhte hai jo use karte hai aur phek dete hai par yaha to bilkul ulti ganga beh rahi hai sona hedan ke bayan ki tarif ki jani chahiye jo purusho ko unhoine is aarop se mukt kar diya hai.

  10. yah group sex ke like hi h thode dino bad sali budhi ho jaegi fir rikshe wala bhi nahi puchega.

  11. gastiyon ka koi states nahi hota ,, kahan inke chakar m pade koi ,,,,,,, inko paisa chahiye hota h.

  12. Hariom Ojha says:

    randio ke liye chhut hai unka kotha kafi majbut hai , main cote per jata unka iste mal admi karta hai o kya karegi.

  13. Rajesh Masih says:

    purush shoshan. simply male exploitation.

  14. sochne ka tarika hai yes ye bhi isi samaj se hen jab inki soch is tarah ki hia to log inke bare men kya sochnge yes kya sochte hoge jiska inhen anumana bhi nahi hia.

  15. wo bhi aadmi hai jisse yes paida hui hai.

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